अब बेलगाम परमाणु होड़

परमाणु अस्त्रों की होड़ से बचने के लिए संधि की शुरुआत 1970 के दशक से हुई। तब से हमेशा किसी ना किसी संधि का अस्तित्व रहा। मगर अब ऐसा नहीं है। इससे परमाणु हथियारों और मिसाइलों की नई होड़ का रास्ता साफ हो गया है। पांच दशक में ऐसी स्थिति पहली बार आई है, जब… Continue reading अब बेलगाम परमाणु होड़

ममता बनर्जी का मोर्चा

एसआईआर गंभीर विसंगतियों से ग्रस्त रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से खामियां दूर करने में कई बार मदद मिली, लेकिन बुनियादी मुद्दे हल नहीं हुए। ममता बनर्जी के वकील की भूमिका अपनाने से भी ऐसा होने की संभावना कम ही है। ममता बनर्जी इस मामले में अनूठी राजनेता हैं कि सत्ता के ऊंचे पदों… Continue reading ममता बनर्जी का मोर्चा

एक प्रतीकात्मक सरकार

मणिपुर में वर्तमान विधानसभा के तहत ही नई सरकार बनाने के निर्णय के साथ कई दिक्कतें जुड़ी हैँ। पहली तो यही कि विधानसभा की संवैधानिक स्थिति पर सवाल हैं। इस बारे में हाई कोर्ट में कांग्रेस की याचिका विचाराधीन है। मणिपुर में सरकार बनाने का भारतीय जनता पार्टी का फैसला समस्याग्रस्त है। भाजपा की सोच… Continue reading एक प्रतीकात्मक सरकार

स्पष्टीकरण के बावजूद

यह कहना काफी नहीं है कि व्यापार समझौते पर बातचीत अभी चल रही है और उसे लिखा नहीं गया है। जब ऐसा होगा, तब पूरी जानकारी दी जाएगी। दरअसल, पीयूष गोयल की इस टिप्पणी ने अनिश्चय और बढ़ा दिया है। भारत- अमेरिका ट्रेड डील के बारे में डॉनल्ड ट्रंप की घोषणा से बने अनिश्चय के… Continue reading स्पष्टीकरण के बावजूद

किताब तो आने दीजिए

सत्ता पक्ष के मुताबिक चूंकि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए उसमें वर्णित मामलों का उल्लेख सदन में नहीं हो सकता। मगर किताब का प्रकाशन किसने रोक रखा है? बेहतर होगा कि प्रकाशन की मंजूरी अविलंब दी जाए। पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरावणे की किताब लगभग 21 महीनों से प्रकाशन के इंतजार में… Continue reading किताब तो आने दीजिए

जो स्पष्ट और अस्पष्ट

अमेरिका में टैरिफ 18 प्रतिशत होने से भारत के श्रम-केंद्रित उद्योगों को राहत मिलेगी। लेकिन अमेरिका की भू-राजनीतिक रणनीतियों से जुड़ी शर्तें डील में शामिल हुईं, तो आर्थिक के साथ-साथ भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए भी वो हानिकारक बात होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज… Continue reading जो स्पष्ट और अस्पष्ट

बजट दायरे से बाहर

सालाना बजट आज महज वित्तीय विवरण, कर दरों में हेरफेर, खर्च के लक्ष्यों की घोषणा और जहां-तहां कुछ प्रोत्साहनों के एलान का दस्तावेज भर रह गया है। बुनियादी आर्थिक समस्याओं के हल की बात उसके दायरे से बाहर हो चुकी है। कांग्रेस की राय में केंद्रीय बजट अर्थव्यवस्था की बुनियादी चुनौतियों से आंख मिलाने में… Continue reading बजट दायरे से बाहर

पाकिस्तान की सियासी चाल

यह लाइन भारत की रही है कि आतंकवाद और क्रिकेट साथ-साथ नहीं चल सकते। मगर दोनों देशों के बीच मैच चलते रहें, इसकी राह भी निकाली जाती रही है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसा करने में बीसीसीआई सहायक बनती आई है। जो फैसला भारत को लेना चाहिए था, वह पाकिस्तान ने किया है। दोनों देशों की… Continue reading पाकिस्तान की सियासी चाल

बजट का सीधा गणित

केंद्रीय आमदनी में कॉरपोरेट टैक्स का हिस्सा 18 फीसदी ही रह गया है, जबकि आम लोगों का कर योगदान 46 फीसदी पहुंच गया है। यह प्रतिगामी सूरत है। बजट से साफ है कि इसमें सुधार का कोई प्रयास नहीं किया गया है। केंद्रीय बजट में 2026-27 में 53,47,315 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।… Continue reading बजट का सीधा गणित

सैद्धांतिक रूप से अहम

आरटीई कानून लागू हुए 16 वर्ष गुजर गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से जाहिर है कि सरकारों ने उस धारा के तहत अपने दायित्व को नहीं निभाया। यानी लड़कियों के लिए अलग शौचालय की जरूरत पूरी नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट की इस व्याख्या का ऊंचा सैद्धांतिक महत्त्व है कि मासिक धर्म संबंधी… Continue reading सैद्धांतिक रूप से अहम

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