रेलवे के बदहाल स्टेशन

रिपोर्ट इस सोच चुनौती देती है कि स्टेशनों का आधुनिकीकरण बुनियादी यात्री सेवाओं की गारंटी कर देता है। जहां स्टेशनों को फिर से बनाया गया, उनमें से भी कई जगहों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी है। रेलवे स्टेशनों की दुर्दशा वैसे तो किसी से छिपी नहीं है, लेकिन अब उनकी बदहाली की विस्तृत तस्वीर नियंत्रक… Continue reading रेलवे के बदहाल स्टेशन

यथार्थ से टकराती कथाएं

हकीकत से कटे नैरेटिव्स का अपना जीवनकाल होता है। जब उनका सामना विपरीत होते जमीनी हालात से होता है, तो उनमें दरारें पड़ने लगती हैं। ज़ेन-ज़ी का तेवर उन्हीं हालात का नतीजा है। भारत का राजनीतिक विमर्श काफी पहले शालीनता की हदें तोड़ चुका है, इसलिए इसमें नए अपशब्दों के जुड़ने पर शायद ही किसी… Continue reading यथार्थ से टकराती कथाएं

अमेरिका के खिलाफ सब!

अमेरिका के खिलाफ चीन से सहयोग करने का दोष भारत पर भी लगाया गया है। इसके अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा, और मेक्सिको जैसे देशों पर भी ऐसी ही तोहमत मढ़ी गई है। डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन को अपनी जमीन से कटी नीतियों में कोई खोट नज़र नहीं आता! इसलिए उसके अधिकारी अपनी हर नाकामी का… Continue reading अमेरिका के खिलाफ सब!

अंदर झांकने की जरूरत

बीते कुछ वर्षों में अचानक ऐसा क्या हो गया, जिससे भारतीय खाद्य पदार्थ दुनिया में संदेह और एतराज का निशाना बनने लगे हैं? इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए अपने अंदर झांकना होगा। इस शिकायत में सच्चाई हो सकती है कि भारत से खराब संबंधों के कारण ने चीन ने जेनेटिकली मॉडिफाइड होने का… Continue reading अंदर झांकने की जरूरत

कॉरपोरेट कल्चर का सवाल

टाटा परिवार आम चलन को तोड़ कर बाहर के व्यक्ति को चेयरमैन बनाने की उदारता तो दिखाता है, लेकिन उसे स्वतंत्र निर्णय नहीं लेने देता। यानी वह मालिक होने की पारंपरिक मानसिकता से उबर नहीं पाता। एन. चंद्रशेखरन के चेयरमैन पद छोड़ने से टाटा ग्रुप में जारी विवाद पर विराम जरूर लग गया है, लेकिन… Continue reading कॉरपोरेट कल्चर का सवाल

ये आपत्तियां गौरतलब हैं

एक समय अंतर-राज्यीय परिषद जैसे मंच थे, जहां केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े मुद्दों पर खुली चर्चा से अक्सर आम सहमति तैयार कर ली जाती थी। मगर अब केंद्र एकतरफा ढंग से ऐसे कदम उठा लेता है। अपने यहां मौजूद खनिजों पर टैक्स या उपकर लगाने के राज्यों के अधिकार को खत्म करने की केंद्र की… Continue reading ये आपत्तियां गौरतलब हैं

अनिवार्य है समग्र नीति

उन कदमों पर विचार अनिवार्य है, जिनसे दुस्साहसी कार्रवाइयों को चीन के लिए महंगा बनाया जाए। ऐसा तभी हो सकता है, जब भारत के पास राष्ट्रीय सहमति से तैयार समग्र चीन नीति हो। भारत- चीन संबंध में फिर पेच पड़े हैं। विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर उचित कदम उठाया है कि द्विपक्षीय संबंधों के… Continue reading अनिवार्य है समग्र नीति

कठघरे में न्याय प्रक्रिया

अडानी धन की ताकत से वे अमेरिका में भी बरी हो गए हैँ। मगर इस क्रम में यह भी साफ हुआ है कि अमेरिकी न्याय व्यवस्था कैसे काम करती है और उस पर धन का कितना प्रभाव है। अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गरौफिस ने अडानी समूह के खिलाफ घूस देने और धोखाधड़ी के आपराधिक मुकदमे… Continue reading कठघरे में न्याय प्रक्रिया

छात्र असंतोष पर सियासत?

किसी आंदोलन में विपक्ष की घुसपैठ असामान्य नहीं है। विपक्ष के अपने सियासी स्वार्थ होते हैं। दरअसल, यह सुनिश्चित करना आंदोलन नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि उसके एजेंडे को कोई और अगवा ना कर ले जाए। छात्रों के विधानसभा घेराव कार्यक्रम से पहले झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के तीन अन्य सदस्यों ने इस्तीफा दे… Continue reading छात्र असंतोष पर सियासत?

एकतरफा और एकांगी

मोदी सरकार के साथ दिक्कत यह है कि संवाद से अधिकतम सहमति बनाने के बजाय वह ऐसी एकतरफा एवं एकांगी पहल कर देती है, जिससे जनता के बहुत बड़े हिस्सों के प्रभावित होने की संभावना रहती है। केंद्र का यह बयान सटीक है कि कोई बड़ा देश अपने यहां अनियंत्रित एवं अनियमित विदेशी अनुदान की… Continue reading एकतरफा और एकांगी

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