तभी अमेरिकी लोकतंत्र है बेजोड़ निर्भयता-बुद्धि का असली विश्वगुरु

देश-सभ्यता विशेष को व्यक्ति विशेष कितना तबाह कर देता है और संविधान, सुप्रीम कोर्ट कैसे देश बचाने की ढाल बनते हैं, इसका प्रमाण आज अमेरिका है। उस नाते अमेरिका के ढाई सौ साल और भारत की स्वतंत्रता, संविधान के आठ दशकों का क्या फर्क है? भारत ने कुछ ही दशकों में संविधान से सरकार को… Continue reading तभी अमेरिकी लोकतंत्र है बेजोड़ निर्भयता-बुद्धि का असली विश्वगुरु

वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?

देश इन दिनों सत्य-शोध की कोयला खदान है, जिससे यदा-कदा निकले चमकीले कण दिमाग़ और बुद्धि को खदबदा देते हैं। हाल में रक्षा बजट में एक लाख करोड़ रु. से अधिक बढ़ोतरी की खबर थी। भारत 2026–27 में 2.19 लाख करोड़ रु. के सैन्य उपकरण खरीदेगा। ऐसे ही यूरोपीय संघ के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति… Continue reading वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?

एपस्टीनः सेक्स, सत्ता का वैश्विक मकड़जाल

चाहे तो इसे पतनगामी पूंजीवाद का मकड़जाल कहें या अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष का कालजयी सत्व-तत्व! मनुष्य आदिकाल से पैसे (पॉवर, अर्थ) और सेक्स (काम-भोग) की वासना में जन्म-जन्मांतर चक्र में खपा चला आ रहा है। इसी से धर्म व मोक्ष के फलसफ़े गढ़े। बावजूद इसके ताजा सुर्खियां चौंकाने वाली है। पहली बार सेक्स-पॉवर की… Continue reading एपस्टीनः सेक्स, सत्ता का वैश्विक मकड़जाल

26 जनवरीः अमिट नेहरू दिवस

आज इक्कीसवीं सदी के वर्ष छब्बीस की 26 जनवरी है। और यह पंडित नेहरू का दिन है। क्या आप चौंके? स्वाभाविक है। हम वे नागरिक हैं जो इतिहास और इतिहास-बोध से कम, मिथक और कल्पनाओं में जीते आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले माने कि राजपथ को कर्तव्यपथ नाम देकर, और लुटियन दिल्ली में नई… Continue reading 26 जनवरीः अमिट नेहरू दिवस

एल्गोरिद्म, लाठी और इक्कीसवीं सदी

इक्कीसवीं सदी दिमाग की है और प्रमाण पूरी मानवता द्वारा चिप, एआई को मस्तिष्क बनाना है। औद्योगिक क्रांति का बीज भाप से ऊर्जा थी तो नई सहस्राब्दी की मानव क्रांति का बीज वह नया मस्तिष्क है जो डेटा सेंटरों, चिप, रोबो से गुंथता तथा विकसित होता हुआ है। और यह बिना दिल के है। उस… Continue reading एल्गोरिद्म, लाठी और इक्कीसवीं सदी

25 वर्षों का भारत चिट्ठा

इक्कीसवीं सदी के पहले पच्चीस वर्ष। ये ढाई दशक मानवता की अमूल्य, अविस्मरणीय अवधि के थे। इसमें मनुष्य के हाथों मनुष्य-समतुल्य कृत्रिम बुद्धि (एआई) बनी तो अंतरिक्ष-ब्रह्माण्ड को भेदने का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बना। तब पृथ्वी के सर्वाधिक आबादी वाले भारत में क्या बना? भीड़ और उसकी आवाजाही या कनेक्टिविटी का इंफ्रास्ट्रक्चर। फिर उसी से फैला… Continue reading 25 वर्षों का भारत चिट्ठा

असल ‘धुरंधर’ अमेरिका

यह तारीफ़ नहीं है। वह सत्यमेव जयते है, जिसका आधार बुद्धि‑ज्ञान और सैन्य शक्ति, दोनों के एवरेस्ट की वाह है। अमेरिका ने सन् 2025–26 में दिमाग से कृत्रिम बुद्धि को स्थापित कर जहां मानवता को चमत्कृत किया, वहीं तीन जनवरी 2026 की रात में उसके सैन्य बल ने वेनेज़ुएला देश के राष्ट्रपति को उठा कर… Continue reading असल ‘धुरंधर’ अमेरिका

अंग्रेजों का एक नमक टैक्स और मोदी राज में हवा, पानी, सड़क, बिजली सब पर टैक्स!

खबर छोटी है। हवा को सांस लायक बनाने के प्यूरीफायर पर सरकार 18 फीसदी जीएसटी वसूलती है! इसी पर सरकार ने अदालत को यह कहते हुए हैसियत बताई कि हम ऐसे टैक्स हटाना, कम करना नहीं करेंगे। सो, भारत के नागरिकों को यदि हवा, सांस शुद्ध (अपने जतन से) लेनी है तो पहले मोदी राज… Continue reading अंग्रेजों का एक नमक टैक्स और मोदी राज में हवा, पानी, सड़क, बिजली सब पर टैक्स!

2025: भारत ने गंवाई विवेक, बुद्धि और गरिमा!

सन् 2025 में भारत ने बहुत कुछ खोया। हालांकि दुनिया ने भी इस वर्ष बहुत गंवाया। पर भारत का नुकसान अपनी प्रकृति में अलग था। यदि अमेरिका एक अकेले डोनाल्ड ट्रंप से पहचान, गरिमा और विवेक में खोखला, भटका हुआ था तो भारत का सत्य है राष्ट्र-राज्य की प्रवृत्तियों, साख और नैतिक धाक को गंवा… Continue reading 2025: भारत ने गंवाई विवेक, बुद्धि और गरिमा!

अपनी विदेश नीति का लोटा-दर्शन!

भारत अब अमेरिका, चीन और रूस के तिराहे पर है। इन तीनों देशों के मुखियाओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी फोटो खिंचवाते हैं। और इसकी हकीकत ही भारत की विदेश नीति का खुलासा है। सोचें, इस सवाल पर कि 1947 से 2025 के 78 वर्षों में भारत की विदेश नीति में वह क्या है, जिससे 140… Continue reading अपनी विदेश नीति का लोटा-दर्शन!

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