भारत का हर अवसर जाया है! भारत अभिशप्त है, श्रापित है!

याद करें 14 मई 2014 से पहले के समय को! तब हवा में, लोगों की सांसों में, उम्मीदों में क्या कुछ था? उमंग थी, उम्मीदें थीं, ‘अच्छे दिनों’ की आहट थी। हिंदू कोई हो, वह भारत का अवसर आया बूझ रहा था। मानों हिंदुओं का कलियुग खत्म होने वाला है, सतयुग आ रहा है। काला… Continue reading भारत का हर अवसर जाया है! भारत अभिशप्त है, श्रापित है!

लोकतंत्र में कॉकरोच, चीन में रोबोट

समय का ही फेर है जो सब कुछ बेतुका है! जैसे ट्रंप क्यों चीन गए? क्या पाया? नरेंद्र मोदी नीदरलैंड गए तो वहां से भारत को क्या प्रवासी भारतीयों का नाच-गाना मात्र देखना था? ताकि भक्तों को लगे नीदरलैंड में भी अपनी संस्कृति के सुनहरे दिन हैं! ऐसे ही यूएई में शेख के साथ तेल-गैस… Continue reading लोकतंत्र में कॉकरोच, चीन में रोबोट

कौन है 27 लाख 4,283 मतदाताओं के नरसंहार का दोषी? मोदी, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट या विपक्ष?

विश्व इतिहास में, और खासकर लोकतांत्रिक देशों के इतिहास में ऐसे नरसंहार की कोई मिसाल नहीं है। इस नाते मई 2026 में ‘जीवित’ मतदाताओं को ‘मृत’, संदिग्ध दिखा, उन्हें डिलीट करके पश्चिम बंगाल में चुनाव होना लोकतंत्र का कलंक है। जबकि भारत अपने को न केवल गणतंत्र का जनक बताता है, बल्कि सबसे बड़ा लोकतंत्र… Continue reading कौन है 27 लाख 4,283 मतदाताओं के नरसंहार का दोषी? मोदी, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट या विपक्ष?

कंकाल हाज़िर है!

अप्रैल 2026 की सत्ताईस तारीख। स्थान, ओडिशा में क्योंझर ज़िले के गांव मालीपोसी की बैंक शाखा! जीतू मुंडा नाम का एक इंसान (यदि मानें तो) भरी दोपहरी की तेज़ गर्मी में अपने गवाह को लेकर पहुंचा। गवाह था वह कंकाल, जो दो महीने पहले मरी उसकी 56 वर्षीय बहन कालरा मुंडा का था! जीतू मुंडा… Continue reading कंकाल हाज़िर है!

‘नरककुंड’ मोदी, केजरीवाल, चड्ढा

ये चार शब्द! मतलब गुजरे सप्ताह की चार सुर्खियां! और इनमें सर्वाधिक चौंकाने वाली बात जो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (जिनके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कुछ नहीं किया!) ने भारत को ‘हेलहोल्स’ बताया। ‘नरककुंड’ की भारत ख्याति बनाई। अपने सोशल मीडिया अकाउंट में उन्होंने अपने रूढ़िवादी भक्त रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के “hellhole on… Continue reading ‘नरककुंड’ मोदी, केजरीवाल, चड्ढा

पैथेटिक भारत, बेचारे लोग!

मैं शनिवार शाम एक शादी समारोह में था। लोगों को सुनते-देखते हुए मौके की फील ले रहा था। तभी एक रिटायर अफसर ने पूछा- कुछ खबर है, मोदीजी ने आठ बजे क्या कहा? अब मैं न भाषण सुनता हूं और न सोशल मीडिया देखता हूं, सो बेखबर था। पर स्वयंस्फूर्त मैंने कहा, क्या कहेंगे? कहा… Continue reading पैथेटिक भारत, बेचारे लोग!

हम इंसानों का जवाब नहीं!

पता नहीं ब्रह्माण्ड में मनुष्य (होमो सेपियन) जैसा कोई जीव है भी या नहीं। संभव है इसी सदी या अगली सदी में मालूम हो कि कहीं और भी ऐसे जीव हैं, जिनमें रावण जैसा अहंकार भी है तो राम जैसी विनम्रता भी! पृथ्वी जैसा ही एक विचित्र ग्रह। मनुष्य ने स्वर्ग-नर्क की कल्पनाएं गढ़ीं, देवताओं… Continue reading हम इंसानों का जवाब नहीं!

भारत होर्मुज की चौकीदारी क्यों नहीं संभालता?

पता है भारत के जनजीवन, उसकी अर्थिकी की नाड़ी क्या है? करीब 10 किलोमीटर की वह पतली नाड़ी, जिसका नाम होर्मुज की खाड़ी है। यह नाड़ी प्रत्यक्ष तौर पर भारत के सौ करोड़ लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी (गैस, पेट्रोल, उर्वरक, अर्थिकी-खेती, रसोई के ईंधन की वजह से) से जुड़ी है। हां, 145 करोड़ लोगों… Continue reading भारत होर्मुज की चौकीदारी क्यों नहीं संभालता?

युद्ध से नहीं, केकड़ा राजनीति के देशों से है लोगों का नारकीय जीवन!

हाल में 143 देशों के लोगों के ‘आनंद’, ‘खुशी’, ‘प्रसन्नता’ की तुलना वाली वैश्विक रिपोर्ट आई। वर्ष 2024–2025 की तस्वीर थी। क्या है तस्वीर? वही जो दुनिया दस वर्षों से लगातार देख-सुन रही है! मतलब फ़िनलैंड लगातार आठ-नौ वर्षों से खुशियों, प्रसन्नता का नंबर एक स्वर्ग। उसके बाद के दस में से बाकी नौ डेनमार्क,… Continue reading युद्ध से नहीं, केकड़ा राजनीति के देशों से है लोगों का नारकीय जीवन!

खाड़ी लड़ाई कितने महीने, साल चलेगी?

क्या यूक्रेन-रूस की लड़ाई से भी लंबी? संभव है! इसलिए क्योंकि रूस-यूक्रेन की लड़ाई जमीनी है। दो सेनाओं का आमना-सामना है। वही खाड़ी में धर्म-सभ्यता-इतिहास की बोतल से निकले शैतान, जिन्न, अलीबाबा के बीच की मूंछ की लड़ाई है। कौन शैतान, कौन जिन्न व कौन अलीबाबा इसका भेद बेमतलब है इसलिए क्योंकि यह कॉमन बात… Continue reading खाड़ी लड़ाई कितने महीने, साल चलेगी?

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