हिंदू राष्ट्र बना रहे थे, कॉकरोच राष्ट्र बनाया!

सन् 2026 की 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच भारत में वह हुआ, जिसकी दुनिया के किसी लोकतांत्रिक देश ने कल्पना नहीं की। दुनिया के अखबारों, टीवी चैनलों और डिजिटल मंचों पर भारत बतौर ‘कॉकरोच’ की पहचान के साथ उभरा। कभी ‘सांप-संपेरों के हिंदुस्तान’ की इमेज थी। पर 1947 में स्वतंत्रता के बाद के… Continue reading हिंदू राष्ट्र बना रहे थे, कॉकरोच राष्ट्र बनाया!

सपनों को गाते-गाते बना अमेरिका

अमेरिका ढाई सौ वर्ष का हुआ। इस शुक्रवार-शनिवार उसके जश्न की कुछ झलकियां टीवी पर देखी। एक परिचित धुन कानों में पड़ी—“डोंट स्टॉप बिलीविन” (Don’t Stop Believin’)। बरसों पुराना यह गीत मेरी पचास वर्षों की स्मृतियों को खोल गया। गीत सुन मुझे ब्रूस स्प्रिंगस्टीन की आवाज़ भी याद हो आई। ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने “बॉर्न टू… Continue reading सपनों को गाते-गाते बना अमेरिका

21वीं सदी का पूंजीवाद है इलॉन मस्क!

सवाल है कौन इलॉन मस्क के पूंजीवाद से मुकाबला कर सकता है? क्या चीन का अनुशासित साम्यवादी पूंजीवाद? क्या रूस के पुतिन का निरंकुशी स्टेट पूंजीवाद? क्या भारत के अंबानी-अदानियों की दुकानदारी का क्रोनी पूंजीवाद? क्या खाड़ी-अरब देशों के पेट्रोडॉलर का पूंजीवाद? या यूरोपीय संघ का भला-सौम्य पूंजीवाद? मेरा दो टूक मत है कि मुकाबला… Continue reading 21वीं सदी का पूंजीवाद है इलॉन मस्क!

उफ! 75 वर्ष बाद ही भारत बूढ़ा, बांझ और बेकार!

भारत आज उस श्राप का मारा है, जो न पीछे देखता है और न आगे! वह वर्तमान को कॉकरोच अवस्था में जीता है! सोचें, भारत सरकार और उसके मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अवस्था पर। खुद ने कथित फर्जी डिग्रियों के कॉकरोच पैदा किए और अब उन्हीं को निपटाने की चिंता में खपे हुए है।… Continue reading उफ! 75 वर्ष बाद ही भारत बूढ़ा, बांझ और बेकार!

भारत का हर अवसर जाया है! भारत अभिशप्त है, श्रापित है!

याद करें 14 मई 2014 से पहले के समय को! तब हवा में, लोगों की सांसों में, उम्मीदों में क्या कुछ था? उमंग थी, उम्मीदें थीं, ‘अच्छे दिनों’ की आहट थी। हिंदू कोई हो, वह भारत का अवसर आया बूझ रहा था। मानों हिंदुओं का कलियुग खत्म होने वाला है, सतयुग आ रहा है। काला… Continue reading भारत का हर अवसर जाया है! भारत अभिशप्त है, श्रापित है!

लोकतंत्र में कॉकरोच, चीन में रोबोट

समय का ही फेर है जो सब कुछ बेतुका है! जैसे ट्रंप क्यों चीन गए? क्या पाया? नरेंद्र मोदी नीदरलैंड गए तो वहां से भारत को क्या प्रवासी भारतीयों का नाच-गाना मात्र देखना था? ताकि भक्तों को लगे नीदरलैंड में भी अपनी संस्कृति के सुनहरे दिन हैं! ऐसे ही यूएई में शेख के साथ तेल-गैस… Continue reading लोकतंत्र में कॉकरोच, चीन में रोबोट

कौन है 27 लाख 4,283 मतदाताओं के नरसंहार का दोषी? मोदी, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट या विपक्ष?

विश्व इतिहास में, और खासकर लोकतांत्रिक देशों के इतिहास में ऐसे नरसंहार की कोई मिसाल नहीं है। इस नाते मई 2026 में ‘जीवित’ मतदाताओं को ‘मृत’, संदिग्ध दिखा, उन्हें डिलीट करके पश्चिम बंगाल में चुनाव होना लोकतंत्र का कलंक है। जबकि भारत अपने को न केवल गणतंत्र का जनक बताता है, बल्कि सबसे बड़ा लोकतंत्र… Continue reading कौन है 27 लाख 4,283 मतदाताओं के नरसंहार का दोषी? मोदी, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट या विपक्ष?

कंकाल हाज़िर है!

अप्रैल 2026 की सत्ताईस तारीख। स्थान, ओडिशा में क्योंझर ज़िले के गांव मालीपोसी की बैंक शाखा! जीतू मुंडा नाम का एक इंसान (यदि मानें तो) भरी दोपहरी की तेज़ गर्मी में अपने गवाह को लेकर पहुंचा। गवाह था वह कंकाल, जो दो महीने पहले मरी उसकी 56 वर्षीय बहन कालरा मुंडा का था! जीतू मुंडा… Continue reading कंकाल हाज़िर है!

‘नरककुंड’ मोदी, केजरीवाल, चड्ढा

ये चार शब्द! मतलब गुजरे सप्ताह की चार सुर्खियां! और इनमें सर्वाधिक चौंकाने वाली बात जो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (जिनके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कुछ नहीं किया!) ने भारत को ‘हेलहोल्स’ बताया। ‘नरककुंड’ की भारत ख्याति बनाई। अपने सोशल मीडिया अकाउंट में उन्होंने अपने रूढ़िवादी भक्त रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के “hellhole on… Continue reading ‘नरककुंड’ मोदी, केजरीवाल, चड्ढा

पैथेटिक भारत, बेचारे लोग!

मैं शनिवार शाम एक शादी समारोह में था। लोगों को सुनते-देखते हुए मौके की फील ले रहा था। तभी एक रिटायर अफसर ने पूछा- कुछ खबर है, मोदीजी ने आठ बजे क्या कहा? अब मैं न भाषण सुनता हूं और न सोशल मीडिया देखता हूं, सो बेखबर था। पर स्वयंस्फूर्त मैंने कहा, क्या कहेंगे? कहा… Continue reading पैथेटिक भारत, बेचारे लोग!

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