हम इंसानों का जवाब नहीं!

पता नहीं ब्रह्माण्ड में मनुष्य (होमो सेपियन) जैसा कोई जीव है भी या नहीं। संभव है इसी सदी या अगली सदी में मालूम हो कि कहीं और भी ऐसे जीव हैं, जिनमें रावण जैसा अहंकार भी है तो राम जैसी विनम्रता भी! पृथ्वी जैसा ही एक विचित्र ग्रह। मनुष्य ने स्वर्ग-नर्क की कल्पनाएं गढ़ीं, देवताओं… Continue reading हम इंसानों का जवाब नहीं!

भारत होर्मुज की चौकीदारी क्यों नहीं संभालता?

पता है भारत के जनजीवन, उसकी अर्थिकी की नाड़ी क्या है? करीब 10 किलोमीटर की वह पतली नाड़ी, जिसका नाम होर्मुज की खाड़ी है। यह नाड़ी प्रत्यक्ष तौर पर भारत के सौ करोड़ लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी (गैस, पेट्रोल, उर्वरक, अर्थिकी-खेती, रसोई के ईंधन की वजह से) से जुड़ी है। हां, 145 करोड़ लोगों… Continue reading भारत होर्मुज की चौकीदारी क्यों नहीं संभालता?

युद्ध से नहीं, केकड़ा राजनीति के देशों से है लोगों का नारकीय जीवन!

हाल में 143 देशों के लोगों के ‘आनंद’, ‘खुशी’, ‘प्रसन्नता’ की तुलना वाली वैश्विक रिपोर्ट आई। वर्ष 2024–2025 की तस्वीर थी। क्या है तस्वीर? वही जो दुनिया दस वर्षों से लगातार देख-सुन रही है! मतलब फ़िनलैंड लगातार आठ-नौ वर्षों से खुशियों, प्रसन्नता का नंबर एक स्वर्ग। उसके बाद के दस में से बाकी नौ डेनमार्क,… Continue reading युद्ध से नहीं, केकड़ा राजनीति के देशों से है लोगों का नारकीय जीवन!

खाड़ी लड़ाई कितने महीने, साल चलेगी?

क्या यूक्रेन-रूस की लड़ाई से भी लंबी? संभव है! इसलिए क्योंकि रूस-यूक्रेन की लड़ाई जमीनी है। दो सेनाओं का आमना-सामना है। वही खाड़ी में धर्म-सभ्यता-इतिहास की बोतल से निकले शैतान, जिन्न, अलीबाबा के बीच की मूंछ की लड़ाई है। कौन शैतान, कौन जिन्न व कौन अलीबाबा इसका भेद बेमतलब है इसलिए क्योंकि यह कॉमन बात… Continue reading खाड़ी लड़ाई कितने महीने, साल चलेगी?

महान राष्ट्र हमेशा गैंगस्टरों जैसे, छोटे राष्ट्र वेश्याओं की तरह

आज लिखना शुरू करने ही वाला था कि ‘द इकॉनोमिस्ट’ पत्रिका के ऐप पर आज के ही (8 मार्च 2026) Today’s Quote खंड में लिखा हुआ यह कोट पढ़ा — “द ग्रेट नेशन्स हैव ऑलवेज एक्टेड लाइक गैंगस्टर्स, एंड द स्मॉल नेशन्स लाइक प्रॉस्टिट्यूट्स।” (महान राष्ट्र हमेशा गैंगस्टरों की तरह व्यवहार करते हैं, वहीं छोटे… Continue reading महान राष्ट्र हमेशा गैंगस्टरों जैसे, छोटे राष्ट्र वेश्याओं की तरह

नेतन्याहू ने दुनिया बदली!

ओह! इक्कीसवीं सदी। इस सदी के प्रारंभ की एक तारीख 9/11 की थी। ताज़ा तारीख 2/28 है। और 26 वर्षों की इस पूरी अवधि के प्रतीक कौन हैं? तब जॉर्ज डब्ल्यू बुश थे। अब डोनाल्ड ट्रंप हैं। और तीसरे प्रतीक इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू हैं। 9/11 के समय नेतन्याहू प्रधानमंत्री नहीं थे। वे 1996 में… Continue reading नेतन्याहू ने दुनिया बदली!

तभी अमेरिकी लोकतंत्र है बेजोड़ निर्भयता-बुद्धि का असली विश्वगुरु

देश-सभ्यता विशेष को व्यक्ति विशेष कितना तबाह कर देता है और संविधान, सुप्रीम कोर्ट कैसे देश बचाने की ढाल बनते हैं, इसका प्रमाण आज अमेरिका है। उस नाते अमेरिका के ढाई सौ साल और भारत की स्वतंत्रता, संविधान के आठ दशकों का क्या फर्क है? भारत ने कुछ ही दशकों में संविधान से सरकार को… Continue reading तभी अमेरिकी लोकतंत्र है बेजोड़ निर्भयता-बुद्धि का असली विश्वगुरु

वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?

देश इन दिनों सत्य-शोध की कोयला खदान है, जिससे यदा-कदा निकले चमकीले कण दिमाग़ और बुद्धि को खदबदा देते हैं। हाल में रक्षा बजट में एक लाख करोड़ रु. से अधिक बढ़ोतरी की खबर थी। भारत 2026–27 में 2.19 लाख करोड़ रु. के सैन्य उपकरण खरीदेगा। ऐसे ही यूरोपीय संघ के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति… Continue reading वह सनातन चरित्र कहां जो भारत बने?

एपस्टीनः सेक्स, सत्ता का वैश्विक मकड़जाल

चाहे तो इसे पतनगामी पूंजीवाद का मकड़जाल कहें या अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष का कालजयी सत्व-तत्व! मनुष्य आदिकाल से पैसे (पॉवर, अर्थ) और सेक्स (काम-भोग) की वासना में जन्म-जन्मांतर चक्र में खपा चला आ रहा है। इसी से धर्म व मोक्ष के फलसफ़े गढ़े। बावजूद इसके ताजा सुर्खियां चौंकाने वाली है। पहली बार सेक्स-पॉवर की… Continue reading एपस्टीनः सेक्स, सत्ता का वैश्विक मकड़जाल

26 जनवरीः अमिट नेहरू दिवस

आज इक्कीसवीं सदी के वर्ष छब्बीस की 26 जनवरी है। और यह पंडित नेहरू का दिन है। क्या आप चौंके? स्वाभाविक है। हम वे नागरिक हैं जो इतिहास और इतिहास-बोध से कम, मिथक और कल्पनाओं में जीते आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले माने कि राजपथ को कर्तव्यपथ नाम देकर, और लुटियन दिल्ली में नई… Continue reading 26 जनवरीः अमिट नेहरू दिवस

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