मोदी से नाराज हिंदू जाएगा कहां?

यह आज का यक्ष प्रश्न है। मेरा मानना है कि भक्त हिंदू मोदी का बना रहेगा। बुरे हालातों, बेरोजगारी, बेगारी, हताशाओं के बावजूद नरेंद्र मोदी को वोट देते रहेंगें। लेकिन उनकी संतानें दें, इसकी गारंटी नहीं हो सकती। पर मोटामोटी उत्तर भारत के हिंदू भक्तों के साथ मोदी का भावनात्मक जुड़ाव कायम है। उसके मनोविज्ञान… Continue reading मोदी से नाराज हिंदू जाएगा कहां?

कूटनीति से भारत का कुछ नहीं सधेगा

जंतर-मंतर से देश में बिगड़ी हवा से ध्यान बंटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश घूम रहे है। जुलाई के आखिर से वे या तो विदेश घूम रहे है या दिल्ली में वैसा ही विश्व तमाशा बना रहे है जैसे 2024 के आम चुनाव से पहले जी-20 सम्मेलन का तमाशा था। इस बार का तमाशा… Continue reading कूटनीति से भारत का कुछ नहीं सधेगा

बिना पैंदे का विकास आंकड़ा!

मोदी सरकार की साख का भगवान मालिक है। वह ज्योंहि कोई दांवा, आकंड़ा बताती है तुरंत मखौल शुरू हो जाता है। सवाल-दर-सवाल उठते है। खास कर आंकड़ों के मामले में। भारत सरकार ने 31 अगस्त को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के आर्थिक विकास के आंकड़े जारी किए। लोग ताली… Continue reading बिना पैंदे का विकास आंकड़ा!

इस विकास दर को दुनिया नहीं समझ पा रही

सवाल है कि भारत जो दावा कर रहा है कि विकास दर 7.8 फीसदी है तथा साल दर साल के आधार पर पिछले साल पहली तिमाही में विकास दर का आंकड़ा 6.9 था तो सवाल है कि दुनिया के देश या संस्थाएं इसे क्यों नहीं समझ रही हैं? भारत पिछले कई दशक से लगातार सबसे… Continue reading इस विकास दर को दुनिया नहीं समझ पा रही

शेयर बाजार की हकीकत क्या है?

भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 7.8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने की खबरों के बाद लगातार तीन दिन से शेयर बाजार में गिरावट है। एक समय जब बिना किसी ठोस कारण के भारत का शेयर बाजार तेजी से बढ़ रहा था तब सरकार और भाजपा के लोग बताते थे कि यह शेयर… Continue reading शेयर बाजार की हकीकत क्या है?

राहुल के बारह साल: बार-बार बदला शब्दकोश

वामपंथियों की फितूरी राजनीति का प्रमाण 2014 से अब राहुल गांधी और कांग्रेस के स्टैंड हैं। सोचें, राहुल गांधी पिछले बारह वर्षों से क्या कर रहे हैं, क्या कहा है? सबसे पहले उन्होंने आर्थिक गैरबराबरी का चश्मा पहना। भूमि अधिग्रहण, किसान, कॉरपोरेट सत्ता और अंततः “सूट-बूट की सरकार”। मोदी सरकार विरोधी इस पहली राजनीतिक फ्रेम… Continue reading राहुल के बारह साल: बार-बार बदला शब्दकोश

राजीव से राहुल: कांग्रेस भूल गई हिंदू को पढ़ना

राजीव गांधी का शासन पुराने ढर्रे की कांग्रेस के बुजुर्ग नेताओं के घेरे से नहीं हुआ। वे नई पीढ़ी ( अरूणसिंह, अरूण नेहरू, सतीश शर्मा दून स्कूल की मित्र मंडली) को लिए हुए थे। कंप्यूटर, टेलीकॉम, विज्ञान, आधुनिक प्रशासन और इक्कीसवीं सदी की बात करते थे। पुराने समाजवादी सत्ता-संसार से अलग दिखाई देते थे। युवा… Continue reading राजीव से राहुल: कांग्रेस भूल गई हिंदू को पढ़ना

सत्ता किसी की भी, खमीर लेफ्ट का ही!

ढेरों प्रमाण हैं। तारीखों और घटनाओं का वह अंतहीन सिलसिला है जिससे मेरा निष्कर्ष है कि भारत के कम्युनिस्टों ने न केवल देश का समय बिगाड़ा। खुद के अवसर भी गंवाए। लेफ्ट के खाते में राजनीतिक बरबादियां लगातार दर्ज कराईं। बावजूद इसके मेरे मन में कम्युनिस्ट नेताओं के चाल, चेहरे और चरित्र की कसौटी में… Continue reading सत्ता किसी की भी, खमीर लेफ्ट का ही!

कांग्रेस (राहुल) की दीमक है लेफ्ट!

यों कांग्रेस ही नहीं स्वतंत्र भारत ही एक श्राप का मारा है। इस श्राप का नाम है लेफ्ट, खासकर कम्युनिस्ट। इसने भारत की मूल सनातनी धर्म-पद्धति, सभ्यता और उसकी सहज सामाजिक चेतना को दीमक की तरह गलाया है। कैसे? याद करें तिलक-गोखले-गांधी की कांग्रेस को। स्वतंत्रता के समय वह “राम” का नाम लेती थी। कांग्रेस… Continue reading कांग्रेस (राहुल) की दीमक है लेफ्ट!

पर निर्भरता और असमानता का रिकार्ड

प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल भी लाल किले से भाषण दिया आत्मनिर्भर भारत की सबसे ज्यादा बात कही। लेकिन दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता पहले कभी भी इतनी नहीं रही है। इसी तरह मोदी जनधन खाते, आधार औऱ मोबाइल के हवाले दावा करते हैं कि भारत में बड़ी आबादी को अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा… Continue reading पर निर्भरता और असमानता का रिकार्ड

logo