एल्गोरिद्म, लाठी और इक्कीसवीं सदी

इक्कीसवीं सदी दिमाग की है और प्रमाण पूरी मानवता द्वारा चिप, एआई को मस्तिष्क बनाना है। औद्योगिक क्रांति का बीज भाप से ऊर्जा थी तो नई सहस्राब्दी की मानव क्रांति का बीज वह नया मस्तिष्क है जो डेटा सेंटरों, चिप, रोबो से गुंथता तथा विकसित होता हुआ है। और यह बिना दिल के है। उस… Continue reading एल्गोरिद्म, लाठी और इक्कीसवीं सदी

25 वर्षों का भारत चिट्ठा

इक्कीसवीं सदी के पहले पच्चीस वर्ष। ये ढाई दशक मानवता की अमूल्य, अविस्मरणीय अवधि के थे। इसमें मनुष्य के हाथों मनुष्य-समतुल्य कृत्रिम बुद्धि (एआई) बनी तो अंतरिक्ष-ब्रह्माण्ड को भेदने का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बना। तब पृथ्वी के सर्वाधिक आबादी वाले भारत में क्या बना? भीड़ और उसकी आवाजाही या कनेक्टिविटी का इंफ्रास्ट्रक्चर। फिर उसी से फैला… Continue reading 25 वर्षों का भारत चिट्ठा

असल ‘धुरंधर’ अमेरिका

यह तारीफ़ नहीं है। वह सत्यमेव जयते है, जिसका आधार बुद्धि‑ज्ञान और सैन्य शक्ति, दोनों के एवरेस्ट की वाह है। अमेरिका ने सन् 2025–26 में दिमाग से कृत्रिम बुद्धि को स्थापित कर जहां मानवता को चमत्कृत किया, वहीं तीन जनवरी 2026 की रात में उसके सैन्य बल ने वेनेज़ुएला देश के राष्ट्रपति को उठा कर… Continue reading असल ‘धुरंधर’ अमेरिका

अंग्रेजों का एक नमक टैक्स और मोदी राज में हवा, पानी, सड़क, बिजली सब पर टैक्स!

खबर छोटी है। हवा को सांस लायक बनाने के प्यूरीफायर पर सरकार 18 फीसदी जीएसटी वसूलती है! इसी पर सरकार ने अदालत को यह कहते हुए हैसियत बताई कि हम ऐसे टैक्स हटाना, कम करना नहीं करेंगे। सो, भारत के नागरिकों को यदि हवा, सांस शुद्ध (अपने जतन से) लेनी है तो पहले मोदी राज… Continue reading अंग्रेजों का एक नमक टैक्स और मोदी राज में हवा, पानी, सड़क, बिजली सब पर टैक्स!

2025: भारत ने गंवाई विवेक, बुद्धि और गरिमा!

सन् 2025 में भारत ने बहुत कुछ खोया। हालांकि दुनिया ने भी इस वर्ष बहुत गंवाया। पर भारत का नुकसान अपनी प्रकृति में अलग था। यदि अमेरिका एक अकेले डोनाल्ड ट्रंप से पहचान, गरिमा और विवेक में खोखला, भटका हुआ था तो भारत का सत्य है राष्ट्र-राज्य की प्रवृत्तियों, साख और नैतिक धाक को गंवा… Continue reading 2025: भारत ने गंवाई विवेक, बुद्धि और गरिमा!

अपनी विदेश नीति का लोटा-दर्शन!

भारत अब अमेरिका, चीन और रूस के तिराहे पर है। इन तीनों देशों के मुखियाओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी फोटो खिंचवाते हैं। और इसकी हकीकत ही भारत की विदेश नीति का खुलासा है। सोचें, इस सवाल पर कि 1947 से 2025 के 78 वर्षों में भारत की विदेश नीति में वह क्या है, जिससे 140… Continue reading अपनी विदेश नीति का लोटा-दर्शन!

मैकाले को गाली और विरासत की पूजा!

मैकाले को बेचारा माने या महान? इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने कोसा है। कहा है कि मैकाले भारतीयों की ‘गुलामी की मानसिकता’ का ज़िम्मेदार है। पर फिर अगले दिन उन्होंने मैकाले की विरासत का अभिनंदन किया। मत्था टेका। पेचीदा मसला है। सोचें, भारत की आज बनावट और बुनावट क्या है? नरेंद्र मोदी यदि बतौर प्रधानमंत्री… Continue reading मैकाले को गाली और विरासत की पूजा!

हम बाँझ हो रहे हैं!

पर सवाल यह है कि क्या हम बाँझ हो रहे हैं या हो चुके हैं? और उससे भी बड़ा सवाल यह कि बाँझ होना आखिर है क्या? मेरा मानना है, बाँझपन को केवल स्त्री या पुरुष की संतान उत्पन्न करने की अक्षमता के अर्थ में नहीं, बल्कि बंजरता, अनुत्पादकता, नाकाबिलियत और असमर्थता के उस गहरे अर्थ-भाव… Continue reading हम बाँझ हो रहे हैं!

हम लुढ़कने के लिए ही हैं!

आंखें थकती नहीं। दिमाग रुकता नहीं। तब भला बुढ़ापा कैसा होगा? मैं बूढ़ा नहीं हूं, लेकिन उम्र सत्तर की है। और दिमाग ने लगभग पचास साल भारत और भारत के लोगों पर गौर करते हुए बिताए हैं तो शायद यही वजह है जो कोई दिन ऐसा नहीं आता जब यह सवाल मन में न उठे… Continue reading हम लुढ़कने के लिए ही हैं!

बनिए भारत के सर्वकालिक धन भोगी!

हिंदू धर्म में लक्ष्मीपुत्रों के खिलाफ क्रांति संभव ही नहीं! भारत असमानता का अब वैश्विक उपमहाद्वीप है। 140 करोड़ लोगों की आबादी है। पर इनकी कुल संपत्ति का 60 प्रतिशत सिर्फ़ एक प्रतिशत परिवारों के पास है! हुरुन इंडिया की ताज़ा रिपोर्ट मानें तो भारत में 1,687 व्यक्तियों की संपत्ति हज़ार-हज़ार करोड़ रुपए से अधिक है,… Continue reading बनिए भारत के सर्वकालिक धन भोगी!

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