ओह! भारत तब और अब! तब भारत गुल्ली डंडा खेलता था। अब क्रिकेट का सट्टा खेलता है। तब खेलना कर्म था, जिंदादिली थी, अब देखना है, लूटा जाना है। तब हर वह काम होता था जो मनुष्य (खासकर ‘कर्म’ के हिंदू फलसफे की अनिवार्यता में) अस्तित्व की तासीर है। तब कर्मवीर नेहरू थे। भारत कर्मशील… Continue reading कहां नेहरू, कहां मोदी!
