ईरान फंसा है! हमला ज़रूरी बुराई या जुआ?

यह सवाल सीधा नहीं है। दुनिया की राजधानियों में सार्वजनिक तौर पर सरकारें संयम और कूटनीति की बात करेंगी। लेकिन निजी बातचीत में तस्वीर अलग होगी। कुछ देशों को लगता है कि ईरान से लंबी बातचीत अब बेमतलब है। दूसरे मानते हैं कि युद्ध का जोखिम ठहराव से भी ज्यादा खतरनाक है। डोनाल्ड ट्रंप गोलमोल… Continue reading ईरान फंसा है! हमला ज़रूरी बुराई या जुआ?

हम पहुँचे या सिर्फ दिखे?

भारत इन दिनों खुद को ही मना रहा है। चौथे एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी पर अखबारों में उमंग भरे लेख छपे, टीवी बहसों में तालियाँ बजीं, सोशल मीडिया पर रील्स की बाढ़ आई। भारत मंडपम के सजे-धजे गलियारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चले, स्टॉल पर रुके, तकनीकी विशेषज्ञों की बातें सुनीं। सब एक सुविचारित… Continue reading हम पहुँचे या सिर्फ दिखे?

जापान “आयरन लेडी” की कमान में!

इन दिनों दुनिया की सबसे ताकतवर महिला के रूप में “आयरन लेडी” सानाए ताकाइची वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। जापान में उनके प्रचंड बहुमत ने उन्हें सुर्खियों में ला खड़ा किया है। लेकिन यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है, यह जापान के राजनीतिक इतिहास का एक प्रतीकात्मक मोड़ भी है। उस देश में,… Continue reading जापान “आयरन लेडी” की कमान में!

जेन-ज़ी ने भी लौटाई वंशवादी सरकार!

बांग्लादेश में “न्यू बांग्लादेश” का जनादेश है। चुनाव में बीएनपी को स्पष्ट बहुमत मिला है और तारिक रहमान की कमान मजबूती से उभरी है। उनके माता-पिता दोनों प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उनकी मां खालिदा जिया ने मृत्यु से कुछ दिन पहले ही उन्हें पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी थी। जैसे एक राजनीतिक वंश का अध्याय बंद… Continue reading जेन-ज़ी ने भी लौटाई वंशवादी सरकार!

अपने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री का शाही ‘मेन्यू’

क्या आप रात के भोजन में “दही फोम पर चार्ड पाइनऐप्पल के साथ कोशंबरी” या “कटहल और केले के फूल की सींख” खाना चाहेंगे? या मिठाई में एक कटोरी “श्रीखंड क्रेम ब्रूले”? ये व्यंजन हाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सेशेल्स के राष्ट्रपति के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित राजकीय भोज में परोसे गए।… Continue reading अपने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री का शाही ‘मेन्यू’

लोकतंत्र अपने उजाले में ही मर रहा है!

पिछले हफ्ते वॉशिंगटन पोस्ट में हुई छँटनी चौंकाने वाली नहीं थी। एक कॉरपोरेट फ़ैसले के तहत तीन सौ से ज़्यादा पत्रकार और कर्मचारी निकाल दिए गए। इसे व्यापारिक मजबूरी कहा गया। मतलब संस्था की “बदलती ज़रूरतों” के मुताबिक की गई छंटनी। स्थानीय, अंतरराष्ट्रीय, सांस्कृतिक और फ़ोटो जैसे पूरे रिपोर्टिंग विभाग या तो खत्म कर दिए… Continue reading लोकतंत्र अपने उजाले में ही मर रहा है!

ऐसा कैसे जो तरूण (जेनरेशन ज़ेड) डफर?

यह कोई साधारण आंकड़ा नहीं है। ऐसा सत्य है, जो पढ़ते ही दिल-दिमाग दोनों को झिंझोडता है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट ने बताया है कि जेनरेशन ज़ेड वह पहली पीढ़ी है, जिसकी औसत बौद्धिक क्षमता—आईक्यू—पिछली पीढ़ी, यानी मिलेनियल्स की तुलना में घटा है। सीधे शब्दों में कहें, तो यह वह पहली पीढ़ी है जो अपने… Continue reading ऐसा कैसे जो तरूण (जेनरेशन ज़ेड) डफर?

रूस हितैषी ट्रंप आखिर क्या चाह रहे?

किसने कल्पना की थी एक दिन ऐसा भी आएगा जब रूस को अमेरिका दुश्मन की तरह देखना बंद करेगा? इतना ही नहीं वह यूक्रेन मसले पर साथी योरोपीय देशों को हैरान करेगा? मैंने अकादमिक वर्षों में एक ही दुनिया पढ़ी थी।  मॉस्को कोई साधारण राजधानी नहीं बल्कि वह डरावनी छाया है जिसकी चिंता में हर… Continue reading रूस हितैषी ट्रंप आखिर क्या चाह रहे?

हां, हम भारतीय लोकतंत्र से संतुष्ट!

कौन सोच सकता था कि पश्चिमी दुनिया की उन राजधानियों में लोकतंत्र लुढकेगा जिन्होंने कभी इसके धर्मग्रंथ लिखे थे!  मगर आज यही वास्तविकता है। पश्चिमी देशों में लोकतंत्र पर भरोसा कम हो रहा है। ऐसा माहौल है जैसा 1970 के दशक में था। यह तीखा सत्य फ़रीद ज़कारिया ने अपने हाल के पॉडकास्ट में बताया… Continue reading हां, हम भारतीय लोकतंत्र से संतुष्ट!

ट्रंप का अमेरिका वैश्विक बेगाना!

कौन सोच सकता था कि “नियम-आधारित व्यवस्था” का अपने को संरक्षक बताने वाला अमेरिका एक दिन दुनिया में अछूत बनने की और होगा?  जिसने उदार वैश्विक व्यवस्था बनवाई, नेटो को गूंथा, संयुक्त राष्ट्र का चार्टर लिखा, और दशकों तक दूसरों को वैश्विक ज़िम्मेदारी पर उपदेश दिया, वही उस वास्तुशिल्प से अब मुंह चुरा रहा है,… Continue reading ट्रंप का अमेरिका वैश्विक बेगाना!

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