ईरान में व्यवस्था बची, सत्ता भी बदली!

ईरान को नया सर्वोच्च नेता मिल गया है। हाल ही में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोज़तबा खामेनेई इस इस्लामी गणराज्य की सबसे ऊँची कुर्सी पर बैठे हैं। यह उस अनुमान के ठीक उलट है जो इज़राइल और अमेरिका के रणनीतिक हलकों में था। वहाँ यह विश्वास था कि अगर ईरान की व्यवस्था… Continue reading ईरान में व्यवस्था बची, सत्ता भी बदली!

तो “दुबई मॉडल” भू-राजनीति की लपटों में!

“दुबईकरण” (“Dubaization”) शब्द जितना आकर्षक है, उतना ही विरोधाभासी भी। शहरी अध्ययन के विद्वान यासर एलशेश्तावी का गढ़ा गया यह शब्द उस विकास मॉडल का प्रतीक है जो तमाशे और चमक पर टिका है। आसमान छूती इमारतें, कृत्रिम द्वीप, असीम पूँजी और यह विश्वास कि समृद्धि राजनीति से आगे निकल सकती है। मगर इन दिनों… Continue reading तो “दुबई मॉडल” भू-राजनीति की लपटों में!

अमेरिका की रहम और मौन

भारत को आज अमेरिका से असामान्य ‘अनुमति’ मिली! अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा— अमेरिकी ट्रेज़री विभाग (वित्त मंत्रालय) ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देते हुए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। इससे ठीक दो दिन पहले भारत से लौट रहे एक ईरानी नौसैनिक… Continue reading अमेरिका की रहम और मौन

कैसा भूमंडलीकरण, कैसी विश्व व्यवस्था?

साफ दिखलाई दे रहा है कि भूमंडलीकरण इतिहास की अनिवार्य धारा नहीं है, बल्कि मानों एक ऐसी व्यवस्था जैसी है जो परिस्थितियों पर निर्भर है। और वह लगातार खतरे के नीचे खड़ी है। कोई भी समय कभी भी इस पूरी व्यवस्था को पटरी से नीचे उतार सकता है, जैसे इस समय भूमंडलाकरण के साथ वैश्विक… Continue reading कैसा भूमंडलीकरण, कैसी विश्व व्यवस्था?

ईरान फंसा है! हमला ज़रूरी बुराई या जुआ?

यह सवाल सीधा नहीं है। दुनिया की राजधानियों में सार्वजनिक तौर पर सरकारें संयम और कूटनीति की बात करेंगी। लेकिन निजी बातचीत में तस्वीर अलग होगी। कुछ देशों को लगता है कि ईरान से लंबी बातचीत अब बेमतलब है। दूसरे मानते हैं कि युद्ध का जोखिम ठहराव से भी ज्यादा खतरनाक है। डोनाल्ड ट्रंप गोलमोल… Continue reading ईरान फंसा है! हमला ज़रूरी बुराई या जुआ?

हम पहुँचे या सिर्फ दिखे?

भारत इन दिनों खुद को ही मना रहा है। चौथे एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी पर अखबारों में उमंग भरे लेख छपे, टीवी बहसों में तालियाँ बजीं, सोशल मीडिया पर रील्स की बाढ़ आई। भारत मंडपम के सजे-धजे गलियारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चले, स्टॉल पर रुके, तकनीकी विशेषज्ञों की बातें सुनीं। सब एक सुविचारित… Continue reading हम पहुँचे या सिर्फ दिखे?

जापान “आयरन लेडी” की कमान में!

इन दिनों दुनिया की सबसे ताकतवर महिला के रूप में “आयरन लेडी” सानाए ताकाइची वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। जापान में उनके प्रचंड बहुमत ने उन्हें सुर्खियों में ला खड़ा किया है। लेकिन यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है, यह जापान के राजनीतिक इतिहास का एक प्रतीकात्मक मोड़ भी है। उस देश में,… Continue reading जापान “आयरन लेडी” की कमान में!

जेन-ज़ी ने भी लौटाई वंशवादी सरकार!

बांग्लादेश में “न्यू बांग्लादेश” का जनादेश है। चुनाव में बीएनपी को स्पष्ट बहुमत मिला है और तारिक रहमान की कमान मजबूती से उभरी है। उनके माता-पिता दोनों प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उनकी मां खालिदा जिया ने मृत्यु से कुछ दिन पहले ही उन्हें पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी थी। जैसे एक राजनीतिक वंश का अध्याय बंद… Continue reading जेन-ज़ी ने भी लौटाई वंशवादी सरकार!

अपने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री का शाही ‘मेन्यू’

क्या आप रात के भोजन में “दही फोम पर चार्ड पाइनऐप्पल के साथ कोशंबरी” या “कटहल और केले के फूल की सींख” खाना चाहेंगे? या मिठाई में एक कटोरी “श्रीखंड क्रेम ब्रूले”? ये व्यंजन हाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सेशेल्स के राष्ट्रपति के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित राजकीय भोज में परोसे गए।… Continue reading अपने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री का शाही ‘मेन्यू’

लोकतंत्र अपने उजाले में ही मर रहा है!

पिछले हफ्ते वॉशिंगटन पोस्ट में हुई छँटनी चौंकाने वाली नहीं थी। एक कॉरपोरेट फ़ैसले के तहत तीन सौ से ज़्यादा पत्रकार और कर्मचारी निकाल दिए गए। इसे व्यापारिक मजबूरी कहा गया। मतलब संस्था की “बदलती ज़रूरतों” के मुताबिक की गई छंटनी। स्थानीय, अंतरराष्ट्रीय, सांस्कृतिक और फ़ोटो जैसे पूरे रिपोर्टिंग विभाग या तो खत्म कर दिए… Continue reading लोकतंत्र अपने उजाले में ही मर रहा है!

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