खुशहाली, समृद्धि आखिर होती क्या है? खासकर उस देश के लिए जहां जीतने का शौर है जीतता दिखता है लेकिन भीतर से थका, खोखला है? कागज़ों पर, सोशल मीडिया पर, प्रेस कॉन्फ़्रेंसों और सरकारी चमक-दमक वाले आयोजनों में भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से दौड़ रही है। उसकी कूटनीति आत्मविश्वासी है, उसकी वैश्विक छवि दमक रही… Continue reading “नया भारत” उत्सव मनाता नहीं, उत्सव अभिनय करता है!
