पृथ्वी की गर्मी पर दो खलनायकों की गरमागरमी

क्लाइमेट चेंज से जुड़े मसलों में राष्ट्रपति बाइडन के खास कूटनीतिज्ञ जान कैरी इस समय भारत में हैं। भारत आने से ठीक पहले वे चीन में थे। चीनियों से उनकी चर्चा काफी हद तक असफल रही। सच तो यह है कि शी जिनपिंग और उनके मातहतों ने कैरी से दो टूक कह दिया चीनी अपने हिसाब से, अपनी स्पीड से कार्बन डाइऑक्साइड प्रदूषण से निज़ात पाने का काम करेंगे।जाहिर है चीनियों को बीजिंग में बढ़ते तापमान और हीट वेव की फ़िक्र नहीं है, भले जीना दूभर हो। धरती के हालात उनकी प्राथमिकता नहीं हैं। उनकी प्राथमिकता ताकत दिखाना है। दुनिया को यह मानने के लिए मजबूर करना है कि चीन एक बहुत बड़ा और एक बहुत ताकतवर देश है।वह अपने हिसाब से काम करेगा।

बाइडन की चीन से दो टूक

जो बाइडन ने साफ़ कर दिया है कि अमेरिका एक विश्व शक्ति है और रहेगा। और व्यवहार भी एक विश्व शक्ति जैसे करेगा। उन्होंने 28 जुलाई को घोषणा की कि जिस तरह अमेरिका अपने जखीरे से यूक्रेन को हथियार दे रहा है, उसी तरह ताईवान को भी देगा।चीन को यह भारी झटका है। स्वभाविक जो दुनिया में सनसनी है और चीन अपना आपा खो बैठा है। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने ताईवान को हथियार दिए जाने की घोषणा की आलोचना करते हुए उसे ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया। कहा कि इससे ताईवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हो गया है। चीन ने चेताया कि इससे चीन और अमरीका के सैन्य संबंध में जोखिम और बढ़ जायेगा।

बर्लुस्कोनीः ट्रंप का इतावली पितामह!

इटली राष्ट्रीय शोक में है। दूसरे महायुद्ध बाद सर्वाधिक लंबे समय प्रधानमंत्री रहे बर्लुस्कोनी की मृत्यु के गम में। वे 86 वर्ष के थे। एक मायने में बर्लुस्कोनी पश्चिमी सभ्यता के पहले डोनाल्ड ट्रंप। ट्रंप और बारिस जानसन उनके मानों वारिस, छोटे संस्करण! इटली की मौजूदा प्रधानमंत्री उनकी मुरीद रही है। वे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जिससे आधे इतावली उन्हे श्रद्धा से देखाते है वही विरोधी नफरत करते हुए। उनकी लीडरशीप मजबूत और निर्णायक व्यक्तित्व वाली थी। वे अरबपति थे। पैसे की ताकत से राजनीति पर कब्जा बनाया। उनका सबसे बडा मीडिया हाऊस तो एक फुटबाल क्लब के मालिक भी। सत्ता और पैसे से बर्लुस्कोनीने जितनी रंगीनियों, जैसी बेधड़की, बेशर्मी से जिंदगी जी वैसी पश्चिम में शायद ही किसी दूसरे प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति ने जी हो।

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