‘मां-बहन’: रिश्तों की गालियों से गरिमा तक की सिनेमाई यात्रा

यहां स्त्री-विमर्श है, लेकिन नारेबाज़ी नहीं। यहां सामाजिक टिप्पणी है, लेकिन उपदेश नहीं। यहाँ संवेदनशीलता है, लेकिन भावुकता का अतिरेक नहीं। तकनीकी पक्ष की बात करें तो फ़िल्म का कैमरा वर्क कहानी के स्वभाव के अनुरूप है। चमक-दमक से दूर, वास्तविक जीवन के करीब। फ्रेम्स में एक तरह की घरेलू घुटन भी है और आत्मीयता… Continue reading ‘मां-बहन’: रिश्तों की गालियों से गरिमा तक की सिनेमाई यात्रा

अब भी द्रोणागिरी पर्वत लाएंगे या नहीं राहुल?

सब नसीब की बातें हैं। एक देश है, एक संविधान है, सब के लिए एक नियम-क़ानून हैं, फिर भी अगर भोपाल और रांची में किसी का आसमानी सुल्तानी से सब-कुछ छिन जाता है और किसी को सब-कुछ मिल जाता है तो इसे आप नसीब का खेल नहीं मानेंगे तो और क्या मानेंगे? इसलिए देना है… Continue reading अब भी द्रोणागिरी पर्वत लाएंगे या नहीं राहुल?

नागरिकों के लिए जरूरी आपदा प्रबंधन जानकारी

जैसे ही आग की खबर लगी, सभी विदेशियों ने अपने-अपने कमरों के दरवाज़ों के नीचे वाली जगह पर गीले तौलिये लगा दिये थे। ऐसा करने से धुएँ को कमरे के अंदर आने का मार्ग नहीं मिला। इसके साथ ही सभी विदेशियों ने अपनी नाक को एक गीले कपड़े से बांध रखा था जिससे कि धुआँ… Continue reading नागरिकों के लिए जरूरी आपदा प्रबंधन जानकारी

अपनी लाईन के चक्कर में भारत की लाईन छोटी कर दी!

नेहरू और पटेल ने देश बनाया था। 560 से अधिक रियासतों का भारत में विलय करवाया था। नेहरू को नहीं मानते चलो पटेल ने तो करवाया था। मगर जब आज 1952 से पहले की सरकार को ही नहीं मान रहे है तो पटेल गृहमंत्री कैसे थे? क्या नेहरू और पटेल ने 560 से अधिक रियासतों… Continue reading अपनी लाईन के चक्कर में भारत की लाईन छोटी कर दी!

हम क्यों बने हुए हैं अमेरिका के हित-साधक?

अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्ते को किस रूप में देखता है और भारत से क्या अपेक्षाएं रखता है, इसे दो टूक बयान करने में वहां के युद्ध मंत्री पीट हेगसेट ने कोई लाग-लपेट नहीं बरता। इस वर्ष के सांगरी-ला डायलॉग में दिए उनके भाषण के बाद भारत के लिए यह तय करना आसान हो… Continue reading हम क्यों बने हुए हैं अमेरिका के हित-साधक?

कैसे बने नकलमुक्त शिक्षा व्यवस्था?

नीट परीक्षाओं के विवाद से देश भर में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। ये परीक्षाएं दोबारा करवाने की बात भी हो रही है। लेकिन अक्सर यह देखा गया है कि भारत में होने वाली परीक्षाओं में या तो पेपर लीक किए जाते हैं या फिर परीक्षाओं के समय बड़े स्तर पर नक़ल की… Continue reading कैसे बने नकलमुक्त शिक्षा व्यवस्था?

क्लब अनंत क्लब-कथा अनंता

मुंबई में एक नहीं, आधा दर्जन जिमखाना क्लब हैं और सब सरकार की दी हुई भूमि पर बने हुए हैं। दक्षिण मुंबई में आज़ाद मैदान के दक्षिणी छोर की 28 हज़ार गज ज़मीन पर बाम्बे जिमखाना का भवन बना हुआ है। मगर उस के पास कुल मिला कर साढ़े 7 एकड़ ज़मीन है। मरीन ड्राइव… Continue reading क्लब अनंत क्लब-कथा अनंता

तिनका-तिनका बिखरता तृणमूल

संभावना इस बात की है कि जैसे उनके 58 विधायकों ने अलग गुट बनाया है वैसे उनके 41 सांसदों में से 30 से ज्यादा सांसद अलग गुट बनाएं या सीधे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाएं। अगर ऐसा होता है तो भाजपा संसद के दोनों सदनों में अपने दम पर पूर्ण बहुमत के करीब… Continue reading तिनका-तिनका बिखरता तृणमूल

वाह! सूर्यवंशी की बल्लेबाजी

धरोहर मान लिए गए सूर्यवंशी शारीरिक व मानसिक तौर पर सुदृढ़, निडर व परिपक्क ही लगे। शुरुआती दौर में देखने पर लगता था कि वैभव खास लप्पेबाज हैं जो किस्मत के भरोसे खेलना चाहते हैं। गेंद को बस उठाकर या उड़ाकर ही मारना चाहते हैं। मगर उनमें लगातार लड़कपन की लय से भरा आत्मविश्वास झलकता… Continue reading वाह! सूर्यवंशी की बल्लेबाजी

‘ऑब्सेशन’: थिएटर के अंधेरे में लौटी रोशनी

‘ऑब्सेशन’ कहती है कि यदि कहानी में दम हो, तो करोड़ों डॉलर के सेट, विशाल वीएफएक्स और सुपरस्टार हमेशा जरूरी नहीं होते। सिनेमा का मूल तत्व आज भी वही है, एक अच्छी कहानी, कुछ विश्वसनीय पात्र और दर्शक के मन को छू लेने वाली भावनाएं। सिने सोहबत आज के सिने-सोहबत में हाल ही में थिएटर… Continue reading ‘ऑब्सेशन’: थिएटर के अंधेरे में लौटी रोशनी

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