खुद को बेपर्दा करती कांग्रेस

यह सम्मेलन कोई रस्मी जमावड़ा नहीं, बल्कि विश्व की तकनीकी व्यवस्था में भारत की बढ़ती ख्याति का ऐलान था। लेकिन भारत मंडपम के भीतर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया ‘अर्धनग्न प्रदर्शन’ वैमनस्य का भद्दा प्रदर्शन था। स्वयं राहुल गांधी ने अपने आरोपी कार्यकर्ताओं को ‘बब्बर शेर’ कहकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रधानमंत्री… Continue reading खुद को बेपर्दा करती कांग्रेस

इस तरह बिखरा मोदी का मायाजाल

विडंबना ही कहा जाएगा कि जिन दो शिखर सम्मेलनों से प्रधानमंत्री की वैश्विक या विश्व-गुरु की छवि चमकाने की कोशिश हुई, वे दोनों ही मौके विपरीत परिणाम देने वाले साबित हुए। ऐसा क्यों हुआ, इसे समझना महत्त्वपूर्ण है। मगर उसके पहले इस पर ध्यान देना उचित होगा कि आखिर ये मायाजाल था क्या और इसे… Continue reading इस तरह बिखरा मोदी का मायाजाल

रोशनी की तलाश में भटकते ‘दो दीवाने शहर में’

आज के ‘सिने-सोहबत’ में जो फ़िल्म चर्चा का विषय है वो है ‘दो दीवाने शहर में’ जिसके निर्देशक हैं रवि उद्यावर और लिखा है अभिरुचि चांद ने। मौजूदा दौर में जब हिंदी सिनेमा का बड़ा हिस्सा हिंसा, प्रतिशोध और अंधेरे मनोविज्ञान से भरा हुआ है, दर्शक स्वाभाविक रूप से एक हल्की-फुल्की, संवेदनशील और मुस्कुराहट से… Continue reading रोशनी की तलाश में भटकते ‘दो दीवाने शहर में’

बंगाल चुनाव करवट बदल रहा है

एक मार्च से ही केंद्रीय बलों की तैनाती हो रही है और 10 मार्च तक कुल 480 कंपनियों को पश्चिम बंगाल में तैनात किया जाएगा। इसका अर्थ है कि चुनाव की घोषणा होने और अधिसूचना जारी होने से पहले ही केंद्रीय बलों की पर्याप्त तैनाती हो जाएगी। जमीनी स्तर पर इसका कितना लाभ होगा यह… Continue reading बंगाल चुनाव करवट बदल रहा है

भारत का विमानन क्षेत्र कैसे बने सुरक्षित?

भारत का विमानन क्षेत्र दुनिया का सबसे तेज बढ़ने वाला क्षेत्र है, लेकिन अभी भी निजी चार्टर में सुरक्षा की लापरवाही घातक साबित हो रही है। सरकार, डीजीसीए और ऑपरेटर्स मिलकर सुधार करें तो ही यात्रियों का भरोसा बहाल हो सकेगा। हाल में निजी चार्टर विमानन कंपनियों से जुड़ी विमान दुर्घटनाओं ने पूरे देश को… Continue reading भारत का विमानन क्षेत्र कैसे बने सुरक्षित?

शिव में ही अंत और शिव में ही प्रारंभ

रंगभरी एकादशी के अगले दिन महादेव अपने वैरागी रूप में मणिकर्णिका महाश्मशान में भस्म की होली खेलते हैं। यह उनके गृहस्थ और औघड़, दोनों रूपों का संतुलन दिखाता है। लोक मान्यता है कि रंगभरी के उत्सव में देवता तो शामिल हुए, पर भूत-प्रेत और अघोरी छूट गए थे। इसलिए महादेव अगले दिन मसान में उनके… Continue reading शिव में ही अंत और शिव में ही प्रारंभ

टैरिफ और ताकत का अनुशासन

भारत इस आर्थिक कूटनीति की वापसी से परखा गया। आलोचकों का तर्क है कि नई दिल्ली ने दबाव में जल्दी कदम उठाया — कृषि और नीतिगत स्वायत्तता के कुछ मोर्चों पर रियायत दी, जबकि धैर्य बेहतर शर्तें दिला सकता था। जिन देशों ने अधिक घर्षण सहा, उनकी तुलना में भारत का रुख सावधान दिखा। आरोप… Continue reading टैरिफ और ताकत का अनुशासन

एप्स्टीन फाइल का क़हर

फ़ाइलें 30 जनवरी 2026 को सामने इसलिए आई क्योंकि अमरीका के सांसदों ने न्यायिक विभाग पर भारी दबाव बनाया। अभी भी बहुत सारी सूचनाओं को ये विभाग दबा कर बैठा है। अमरीका के जो भी सांसद बारी-बारी से जाकर न्यायिक विभाग में इन फाइलों का निरीक्षण कर रहे हैं वे सदमें में आ जाते हैं।… Continue reading एप्स्टीन फाइल का क़हर

विश्व शांति के लिए जरूरी है आपसी समझ

महोपनिषद का प्रसिद्ध वाक्य—“अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्”—दुनिया को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है। ईशोपनिषद कहता है कि जो सबमें स्वयं को और स्वयं में सबको देखता है, वह किसी से द्वेष नहीं करता। 23 फरवरी- विश्व शांति व आपसी समझ दिवस पॉल हैरिस ने 1905 में रोटरी… Continue reading विश्व शांति के लिए जरूरी है आपसी समझ

बांग्लादेश हो या नेपालः सामने वही सवाल

बांग्लादेश में विद्रोह का जो परिणाम हुआ है, उससे अलग सूरत नेपाल में नहीं होगी, जहां अगले पांच मार्च को आम चुनाव होना है। क्या बिना ऐसी संगठित पार्टी की मौजूदगी के- जिसके पास स्पष्ट विचारधारा और सुपरिभाषित संगठन हो- कोई ऐसा परिवर्तन हो सकता है, जिससे मूलभूत ढांचा बदले और आम जन के जीवन… Continue reading बांग्लादेश हो या नेपालः सामने वही सवाल

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