फूफाओं ने ही बचा रखा है नरेंद्र भाई का भारत

फूफाओं ने सवाल उठाया है कि भारत कुल मिला कर चौथी बार और नरेंद्र भाई के रायसीना पहाड़ी पर पहुंचने के बाद तीसरी बार ब्रिक्स-सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है, मगर कोई यह तो बताए कि पिछले दो-तीन ब्रिक्स-आयोजनों के बाद से हमारे पल्ले पड़ा क्या है? नरेंद्र भाई के कार्यकाल का पहला ब्रिक्स-सम्मेलन 2016… Continue reading फूफाओं ने ही बचा रखा है नरेंद्र भाई का भारत

आयुर्वेद और कानून की अनदेखी करते नीमहकीम!

मरीज को भी सतर्क होना चाहिए। अगली बार जब आप ऐसे किसी विज्ञापन के बाद किसी उपचार केंद्र में जाएँ तो उपाधि मत पूछिए, रजिस्ट्रेशन पूछिए। चमत्कार मत पूछिए, लिखित निदान और सूचित सहमति पूछिए। जो व्यक्ति कैमरे पर देश का वैद्य बनते हों और असल में केवल मैट्रिक पास या स्नातक हों, वह आचार्य… Continue reading आयुर्वेद और कानून की अनदेखी करते नीमहकीम!

ये आंकड़े असल हकीकत नहीं बताते

आखिर यह कैसे संभव है कि तिमाही विकास दर 7.8 प्रतिशत पहुंच जाए, जबकि खपत और वास्तविक उत्पादन-मात्रा के संकेतक पीछे रह जाएं? इसे समझने के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की कार्यप्रणाली के भीतर लगे तकनीकी पहियों को देखना होगा। मुख्यतः तीन प्रक्रियाएं ऐसा परिणाम पैदा करती हैं। विभागों में नीति अब उस तस्वीर… Continue reading ये आंकड़े असल हकीकत नहीं बताते

हवा बदल रही है?

इस वर्ष दो घटनाओं ने हवा बदलने में निर्णायक काम किया। यह थे — शिक्षा और मंदिर पर घमंडी लापरवाही। पहली थी: यूजीसी गाइडलाइन्स, जिस ने भाजपा को हिन्दू स्टार से एक बौना वी.पी. सिंह बना दिया। …. रही-सही कसर अयोध्या राम मंदिर में बेफिक्र और नियमित चोरी ने पूरी कर दी। दोनों घटनाओं ने… Continue reading हवा बदल रही है?

लोकतंत्र के लिए जागरूक जनता ज़रूरी

कस्बों-देगात में खस्ता हाल सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अपने स्कूलों की अव्यवस्था के विरुद्ध आवाज़ उठाने लगे हैं। उनमें स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल पूछने की हिम्मत आ गई है। प्रसन्नता तो इस बात की है कि अब ऐसी चेतना प्राथमिक पाठशालाओं के बच्चों तक में पैदा हो गई है। … राजस्थान के एक माध्यमिक… Continue reading लोकतंत्र के लिए जागरूक जनता ज़रूरी

एसीओ और ब्रिक्स पर ट्रंप का साया

महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर दुनिया पर हर हाल में अपना वर्चस्व कायम रखने पर आमादा अमेरिका और उसके बरक्स बहु-ध्रुवीय दुनिया के निर्माण की कोशिशों से जुड़े देशों के बीच खाई चौड़ी होती जा रही है। नतीजा है कि अब दोनों तरफ दांव लगा कर चलना कठिन होता जा रहा है। इस नई स्थिति का तनाव… Continue reading एसीओ और ब्रिक्स पर ट्रंप का साया

विकास की गाथा नहीं पचा पा रही कांग्रेस

यह बड़े आश्चर्य की बात है और संभवतः पूरे विश्व में किसी और देश में ऐसा नहीं होता होगा कि देश के विपक्ष को देश का विकास पसंद नहीं आए! यह आश्चर्य भारत में प्रायः घटित होने लगा है। जब भी भारत के विकास के आंकड़े आते हैं तो विपक्ष उस पर सवाल उठाने लगता… Continue reading विकास की गाथा नहीं पचा पा रही कांग्रेस

रसोई से निकला लीजेंड: ‘टोनी’

‘टोनी’ आइकोनिक शेफ़ एंथनी बॉर्डेन की ही लिखी किताब ‘किचन कॉन्फिडेंशियल’ के शुरुआती हिस्सों से प्रेरित है, लेकिन यह दस्तावेजी पुनर्निर्माण नहीं है। जॉनसन और उनके सह-लेखकों ने बॉर्डेन के कई अनुभवों को गर्मी के एक ही मौसम में समेट दिया है। कुछ पात्र और घटनाएं वास्तविकता से प्रेरित हैं, लेकिन फ़िल्म ने उन्हें नाटकीय… Continue reading रसोई से निकला लीजेंड: ‘टोनी’

श्रीकृष्ण, करूक्षेत्र और प्रबंधन

महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भों से यह अकाट्य रूप से सिद्ध होता है कि श्रीकृष्ण द्वारा संचालित कुरुक्षेत्र मैनेजमेंट का प्रत्येक अध्याय आधुनिक जीवन और कॉर्पोरेट जगत के संकटों का अचूक समाधान है। दुर्योधन का प्रबंधन अहंकार, अति आत्मविश्वास और केंद्रीकृत सत्ता का था, जिसका परिणाम विनाश हुआ। इसके विपरीत, श्रीकृष्ण का प्रबंधन विकेंद्रीकृत, नैतिक,… Continue reading श्रीकृष्ण, करूक्षेत्र और प्रबंधन

सेवा में चुप्पी, सेवानिवृत्ति पर सनसनी!

हम सत्य को तब मनाते हैं जब वह किसी को नुकसान न पहुंचाए। अधिकारी को याद रखना चाहिए कि पछतावे की किताब अच्छी बिक सकती है, पर अच्छी संस्थाएं उन लोगों से बनती हैं जो पछतावे के लिए सामग्री जमा ही नहीं करते। नियम पुस्तक हाथ में हो और रीढ़ मज़बूत हो, तो सेवानिवृत्ति पर… Continue reading सेवा में चुप्पी, सेवानिवृत्ति पर सनसनी!

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