गोल्फ-अंगने की परीकथा से झांकती ताताथैया

आज दिल्ली गोल्फ क्लब की ज़मीन का बाज़ार-मूल्य क़रीब 60 हज़ार करोड़ रुपए है और वह सरकार को पट्टे के लिए औसतन साढ़े पांच लाख रुपए सालाना का किराया देता है। यह ज़मीन हरित क्षेत्र में है, इसलिए उस पर कोई पक्का निर्माण नहीं हो सकता है। …  नरेंद्र भाई मोदी के प्रधानमंत्री बनने के… Continue reading गोल्फ-अंगने की परीकथा से झांकती ताताथैया

केमद्रुम योग से ग्रसित समृद्ध कुटीर-उद्योग

विबंलडन में हरित घास वाले 38 टेनिस मैदान हैं। दिल्ली जिमखाना में 26 हैं। तो क्या इस का लेखाजोखा नहीं होना चाहिए कि हमारे जिमखाना ने कितनी सेरेना विलियम्स, मार्टिना नवरातिलोवा, स्टेफी ग्राफ और रॉजर फेडरर अपने अंगने में खिलाए हैं?… दिल्ली के पश्चिमी इलाके में बना रोशनआरा क्लब 23 एकड भूमि पर काबिज़ है़।… Continue reading केमद्रुम योग से ग्रसित समृद्ध कुटीर-उद्योग

पंजाब निकाय चुनाव में फिसड्डी रही भाजपा

भाजपा की चुनावी सोच की दाद देनी चाहिए । कम से कम पंजाब में हुए निकाय चुनावों को लेकर। सूबे में पिछले दिनों हुए इन चुनावों में वह एक ,दो या तीसरे नहीं बल्कि पाँचवें स्थान पर रही यहाँ तक कि थक चुके शिरोमणि अकाली दल और निर्दलीयों से भी कम उसे वोट मिले हैं… Continue reading पंजाब निकाय चुनाव में फिसड्डी रही भाजपा

श्वेतों के भूरे-वंशजों का लोकोपकारी स्वांग

मैं भी दिल्ली और देश भर में पसरे इन क्लबों के अंतःपुर का पिछले चार दशक से चश्मदीद ग़वाह हूं और ताल ठोक कर कह सकता हूं कि इन के सदस्यों और अतिथियों में महज़ 15 फ़ीसदी ही भलेमानुस होंगे। मैं अपने एक स्वर्गीय मित्रवत-परिचित की आत्मा से क्षमा मांगते हुए यह उपमा दिए बिना… Continue reading श्वेतों के भूरे-वंशजों का लोकोपकारी स्वांग

गर्मियों में कैसे बिजली की आपूर्ति हो ?

जब हर साल गर्मी आती है और मांग बढ़ती है, तो तैयारी क्यों नहीं होती? पिछले वर्षों में क्षमता में वृद्धि हुई है, लेकिन वितरण व्यवस्था में सुधार अपर्याप्त रहा। ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर, पुरानी लाइनें और शाम के समय सोलर जनरेशन घटने के बाद की कमी को प्रबंधित करने की ठोस योजना नजर नहीं आती। उत्तर… Continue reading गर्मियों में कैसे बिजली की आपूर्ति हो ?

मातृदेवो भव, पितृदेवो भव

आज संयुक्त राष्ट्र 1 जून को वैश्विक अभिभावक दिवस के रूप में मनाता है। इसका उद्देश्य परिवारों के विघटन, वृद्धों के अकेलेपन, बढ़ते वृद्धाश्रमों और उपभोक्तावादी जीवनशैली के दुष्प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करना है। पश्चिमी समाज जहाँ अधिकारों की बात अधिक करता है, वहीं भारतीय संस्कृति कर्तव्य और ऋण की भावना को महत्व देती… Continue reading मातृदेवो भव, पितृदेवो भव

जन मानस पर कैसे छा गए कॉकरोच?

सही वक्त है, जब सरकार को ऐसे तरीके छोड़ कर विरोधियों की बात भी सुननी चाहिए। सोशल मीडिया से हैंडल या पोस्ट हटवाने के तरीके से उसे बाज आना चाहिए। वरना, जिस घुटन और आक्रोश ने कॉकरोचों को अपनी पार्टी बनाने पर मजबूर किया है, वो उनके विरोध को और भी धारदार रूप प्रदान कर… Continue reading जन मानस पर कैसे छा गए कॉकरोच?

बंगाल हर तरह से बदल रहा

घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें भारत की सीमा से निकालने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। सिर्फ पश्चिम बंगाल में नहीं, बल्कि बिहार से लेकर राजस्थान तक यह अभियान चल रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा जिन राज्यों के साथ मिलती है वहां बाड़ लगाई जा रही है और सीमा की सुरक्षा को… Continue reading बंगाल हर तरह से बदल रहा

‘सिस्टम’: न्याय, सत्ता और संवेदनाओं के बीच की बेचैनी

भारतीय सिनेमा में अदालतों और न्याय व्यवस्था पर आधारित फ़िल्में हमेशा से दर्शकों को आकर्षित करती रही हैं। ऐसी फ़िल्मों की सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे केवल कानूनी बहसों तक सीमित न रह जाएं, बल्कि इंसानी भावनाओं, सामाजिक यथार्थ और सत्ता की जटिलताओं को भी अपने भीतर समेट सकें। अश्विनी अय्यर तिवारी… Continue reading ‘सिस्टम’: न्याय, सत्ता और संवेदनाओं के बीच की बेचैनी

वीआईपी अपराधियों के लिए जेल मानो होटल?

सवाल है कि पैरोल का सिलसिला कानून है या विशेषाधिकार? हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स एक्ट के तहत कैदियों को पैरोल और फरलो का प्रावधान है। इस कानून के अनुसार, एक साल की सजा पूरी करने के बाद कोई भी कैदी प्रति वर्ष 10 सप्ताह की पैरोल और 21 दिन की फरलो का हकदार है। राम… Continue reading वीआईपी अपराधियों के लिए जेल मानो होटल?

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