मीडिया इधर का हो या उधर का, एकतरफा!

चाहे कोई भी दल सत्ता में हो जब तक उसका शासन और प्रशासन आम जनता के प्रति जवाबदेह न हो तब तक वो कितना भी ढोल पीटता रहे, जनता उसके दावों पर विश्वास नहीं करती। आम जनता को बड़े स्तर के बड़े घोटालों से इतना सरोकार नहीं होता जितना उनकी रोज़ की ज़िंदगी में पुलिस… Continue reading मीडिया इधर का हो या उधर का, एकतरफा!

फौरी छापों की तानाशाही

बच्चा एक ऐसी थाली के सामने बैठा है, उसके सामने इंसानियत के पूरे ज्ञान का इतिहास एक ही बार में परोस दिया गया हो और कहा गया हो—“लो, खाओ।” थाली भरी हुई है। लेकिन, ध्यान से देखें तो वह पूरी तरह खाली है। …जब बारह साल बाद एक बच्चा बाहर निकलता है और वह एक… Continue reading फौरी छापों की तानाशाही

युवाओं को अपने प्रधानमंत्री पर भरोसा है

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा और परीक्षा की प्रक्रिया में सुधार की जो पहल की है उस पर छात्रों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया के बाहर सार्वजनिक रूप से भी दिखने लगी है। उन्होंने जो नियम बनाने और विधायी कदम उठाने की पहल की है और युवाओं से सीधी अपील की है उसका असर यह हुआ है… Continue reading युवाओं को अपने प्रधानमंत्री पर भरोसा है

कॉकरोचः आगे रास्ता घुमावदार है

सार यह है कि किसी एक मुद्दे पर सीमित रह कर बेहतर नतीजे हासिल कर लेना फिलहाल संभव नहीं रह गया है। इसीलिए ऐसी दीर्घकालिक राजनीति की जरूरत उत्तरोत्तर अधिक स्पष्ट होती जा रही है, जो पांच साल के चुनावी चक्र से प्रेरित ना हो। वैसी राजनीति, जो वोट के अधिकार एवं वोटिंग मशीनों से… Continue reading कॉकरोचः आगे रास्ता घुमावदार है

डिजिटल दुनिया में इंसानियत का पासवर्ड: ‘प्रीतम एंड पेड्रो’

जब ओटीटी पर अपराध आधारित कहानियां अक्सर हिंसा, अंधेरे और सनसनी का सहारा लेती हैं, तब ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ एक अलग रास्ता चुनती है। यह विश्वास करती है कि गंभीर बात भी मुस्कुराते हुए कही जा सकती है। यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है। इस सीरीज़ को देखते हुए बार-बार लगा कि डिजिटल युग में… Continue reading डिजिटल दुनिया में इंसानियत का पासवर्ड: ‘प्रीतम एंड पेड्रो’

रुस्तम-ए-हिंद को सींकिया टोली का जवाब

मनमोहन सिंह के ज़़माने में टूजी स्पेक्ट्रम मामले में ए राजा का नाम आया, इस्तीफ़ा देना पड़ा। दयानिधि मारन का नाम आया, इस्तीफ़ा देना पड़ा। भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में वीरभद्र सिंह का नाम आया, उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। रिश्वतखोरी के मामले में पवन कुमार बंसल के भतीजे का नाम आया, उन का इस्तीफ़ा… Continue reading रुस्तम-ए-हिंद को सींकिया टोली का जवाब

डिजिटल इंडिया: दिक्कत कहाँ है ?

भारत में करीब 15 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं और 2050 तक यह संख्या दोगुनी होने वाली है। हेल्पएज इंडिया जैसे संगठनों के सर्वे के अनुसार, 85.8% बुजुर्ग डिजिटली निरक्षर हैं। केवल 5% ही ऑनलाइन बैंकिंग या स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करते हैं। 66% इन सेवाओं को भ्रमित करने वाला मानते हैं और 51% गलती करने… Continue reading डिजिटल इंडिया: दिक्कत कहाँ है ?

लोकतंत्र की शक्ति राज्य नहीं, जागरूक नागरिक होते हैं

लोकतंत्र में किसी नागरिक को अपनी बात मनवाने के लिए अपने शरीर को दाँव पर नहीं लगाना चाहिए। संसद, न्यायालय, जनप्रतिनिधि, आयोग, मीडिया और नागरिक संस्थाएँ इसलिए होती हैं कि कोई व्यक्ति अपने जीवन को अंतिम तर्क बनाने के लिए विवश न हो। यदि किसी नागरिक को यह महसूस होने लगे कि उसकी आवाज़ इन… Continue reading लोकतंत्र की शक्ति राज्य नहीं, जागरूक नागरिक होते हैं

सोनम वांगचुक और गणतंत्र की नैतिक परीक्षा

सोनम वांगचुक का आंदोलन एक प्रश्नपत्र से आगे बढ़ जाता है। वे केवल परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही नहीं माँग रहे। वे उस सोच पर प्रश्न उठा रहे हैं, जिसने शिक्षा को छँटनी की मशीन बना दिया है। उनके भीतर छिपा प्रश्न कहीं बड़ा है—क्या भारत अपने युवाओं का भविष्य बना रहा है, या केवल उनका… Continue reading सोनम वांगचुक और गणतंत्र की नैतिक परीक्षा

आगे कुँआ, पीछे मोदी

बेचारे हिन्दू दोहरी चोट झेल रहे हैं — संघ-परिवार का विश्वासघात और ब्लैकमेलिंग।‌ क्या इस से आगे कोई फर्क पड़ेगा? नहीं, राजा बाबू ने सब प्रबंध कर लिया है। कहीं कोई छिद्र नहीं छोड़ा। चाहे संवैधानिक संस्थाओं, रेफरियों पर धब्बा लगता रहे। लिहाजा चुनावी फुटबॉल का नेशनल कप वही जीतते रहेंगे। बाकी इंडिया बस वाचता… Continue reading आगे कुँआ, पीछे मोदी

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