जनतंत्र को पलीता लगाने में क्या केजरीवाल पीछे थे?

लप्पड़ खाने के बाद रुआंसे घूम रहे केजरीवाल से भी तो यह पूछा जाना चाहिए कि पिछले साढ़े तेरह बरस से वे भारत के लोकतंत्र का नमक अदा करने के लिए काम कर रहे थे या जनतंत्र की तेरहवीं के आयोजन में एक निष्ठावान गुपचुप सहयोगी बने बैठे हैं?… छद्म संघर्ष से आगे आए केजरीवाल… Continue reading जनतंत्र को पलीता लगाने में क्या केजरीवाल पीछे थे?

डोनाल्ड ट्रंप का सत्ता व्याकरण

डोनाल्ड ट्रंप इतिहास की दुर्घटना नहीं हैं; वे उन तनावों की सबसे तीखी अभिव्यक्ति हैं जो अमेरिका लंबे समय से ढोता आया है—विमर्श बनाम प्रदर्शन, धैर्य बनाम अधीरता, अनुच्छेद बनाम ट्वीट। उन्होंने एक पुराने भूख को नई, डिजिटल आवाज़ दी, और वह आवाज़ उस भूख से भी तेज निकली जिसे वह व्यक्त करती थी। “मेरी… Continue reading डोनाल्ड ट्रंप का सत्ता व्याकरण

बंगाल के नतीजों का चौतरफा असर होगा

प्रधानमंत्री मोदी इस लगातार डायरेक्ट अमेरिका के सामने झुकते चले जा रहे हैं। यह देश के लिए एक बड़ा चिंता का विषय था लेकिन अब तो पाकिस्तान पर से आतंकवादी ठप्पा हटाना … क्या पाकिस्तान के सीमा-पार आतंकवाद के इतिहास के बावजूद यह भारत का अचानक जानबूझकर नरम रूख अपनाना नहीं है? आ गए एग्जिट… Continue reading बंगाल के नतीजों का चौतरफा असर होगा

पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग से क्या होगा ?

पर्यावरण को फायदा, ऊर्जा सुरक्षा की मज़बूती और किसानों की आय में बढ़ोतरी कुछ फ़ायदे ज़रूर हैं। लेकिन इसके साथ ही आम आदमी की जेब और पुराने वाहनों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर नीति संतुलित रही, तो यह ‘विन-विन’ निर्णय साबित हो सकता है। वरना, माइलेज का नुकसान और महंगाई का… Continue reading पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग से क्या होगा ?

लोकतंत्र के झटकने के रूप, ट्रंप और मोदी की कथा

अमेरिका में लोकतांत्रिक संकट तेज़ और स्पष्ट है, भारत में वह धीमा और संरचनात्मक रहा है। एक जगह विस्फोट है, दूसरी जगह धँसाव। पर दोनों का परिणाम समान है—संस्थाएँ मौजूद हैं, पर उनका प्रभाव बदल चुका है; चुनाव होते हैं, पर उनकी निष्पक्षता पर संरचनात्मक प्रभाव है; मीडिया है, पर उसकी सीमाएँ तय हैं। तेज़… Continue reading लोकतंत्र के झटकने के रूप, ट्रंप और मोदी की कथा

कांग्रेस की अनुयायी भाजपा

भाजपा द्वारा ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ का नारा संपूर्ण विचारहीनता का नमूना था। उसी क्रम में, उस के नेता जब कुछ मौलिक कोशिश करते हैं तो फूहड़ साबित होता है। चाहे झूला झुलाकर, गले लटक कर, अथवा तू-मैं की बेतकल्लुफी दिखाकर विदेशियों को जीतने का मंसूबा हो, या ‘घर में घुस कर मारने‘ का प्रदर्शन — सब… Continue reading कांग्रेस की अनुयायी भाजपा

आप सांसदों की सामूहिक पलटी

यह घटना राजनीति को एक ‘धंधा’ साबित करती है, जहां सिद्धांतों की जगह स्वार्थ हावी है। लेकिन एक सकारात्मक पक्ष यह भी है कि जनता अब ज्यादा सजग हो रही है। 2027 के चुनाव में मतदाता इन ‘ट्रैक्टरों’ को याद रखेंगे और वोट से जवाब देंगे। अशोक मित्तल पर ईडी के छापे के महज 10… Continue reading आप सांसदों की सामूहिक पलटी

बदलाव की बयार आंधी में बदलेगी!

मतदान के इतने भारी भरकम आंकड़े का जो पहला मैसेज लोगों तक पहुंचा वह ये है कि लोग बदलाव चाहते हैं और परिवर्तन के लिए इतनी बड़ी संख्या में निकल कर वोट कर रहे हैं। दूसरा मैसेज यह है कि चुनाव आयोग की ओर से कराई गई एसआईआर के कारण फर्जी मतदाताओं के नाम कट… Continue reading बदलाव की बयार आंधी में बदलेगी!

ईरान की शक्ति बनाम अमेरिका का खोखलापन!

आदर्श स्थिति वह होगी, जब व्यक्ति को सारी स्वतंत्रताएं एवं अधिकार एक साथ प्राप्त हों। मगर दुनिया में अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनी, जो यह सब सुनिश्चित कर सके। इस लिहाज से अब तक तमाम राजसत्ताएं एक किस्म की सौदेबाजी (trade-off) का उपकरण रही हैं। पलड़ा उन तबकों के हित में झुक जाता… Continue reading ईरान की शक्ति बनाम अमेरिका का खोखलापन!

‘माइकल’: एक अधूरी जीवनी

पॉप-संस्कृति के इतिहास में माइकल जैक्सन सिर्फ़ एक नाम नहीं, एक बहुत बड़ी घटना हैं, एक ऐसी रचना हैं जो संगीत, नृत्य, फैशन और ग्लोबल स्टारडम की सीमाओं को तोड़ती है। ऐसे कलाकार पर फ़िल्म बनाना, दरअसल, एक जोखिम भरा नैरेटिव निर्णय होता है: आप या तो एक ईमानदार, असहज और जटिल फिल्म बनाते हैं… Continue reading ‘माइकल’: एक अधूरी जीवनी

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