लप्पड़ खाने के बाद रुआंसे घूम रहे केजरीवाल से भी तो यह पूछा जाना चाहिए कि पिछले साढ़े तेरह बरस से वे भारत के लोकतंत्र का नमक अदा करने के लिए काम कर रहे थे या जनतंत्र की तेरहवीं के आयोजन में एक निष्ठावान गुपचुप सहयोगी बने बैठे हैं?… छद्म संघर्ष से आगे आए केजरीवाल… Continue reading जनतंत्र को पलीता लगाने में क्या केजरीवाल पीछे थे?
