‘कॉकटेल 2’: प्रदर्शन से दरकते प्रेम की कहानी

‘कॉकटेल 2’ सिर्फ प्रेम त्रिकोण की कहानी नहीं, बल्कि आधुनिक रिश्तों की असुरक्षा, अकेलेपन और आत्ममुग्धता का दस्तावेज़ बनने की कोशिश करती है। आज के ‘सिने-सोहबत‘ में इसी फ़िल्म पर गहराई से चर्चा करते हैं।  फ़िल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह पहली फ़िल्म की हूबहू नकल नहीं करती। सिने -सोहबत 2012 में… Continue reading ‘कॉकटेल 2’: प्रदर्शन से दरकते प्रेम की कहानी

आग की लपटें और सिस्टम की नाकामी

भारत में हाल के दिनों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो न केवल जान-माल का भारी नुकसान पहुंचा रही हैं बल्कि हमारे प्रशासनिक, नियामक और शहरी नियोजन तंत्र की गहरी खामियों को उजागर कर रही हैं। 3 जून 2026 को दिल्ली के मालवीय नगर में एक बेड एंड ब्रेकफास्ट होटल में लगी… Continue reading आग की लपटें और सिस्टम की नाकामी

यायावरी चेतना का शाश्वत सत्य

“चलते रहो, चलते रहो” भारतीय पर्यटन दर्शन का मूल आधार है। सच्चा यायावर वही है, जो जहां भी जाए, वहां की संस्कृति को सम्मान दे, उसमें आत्मीयता के साथ घुल-मिल जाए और पूरे विश्व को एक परिवार की तरह अनुभव करे। “चरैवेति” का यही संदेश आज भी वैश्विक शांति, सतत विकास और मानवीय सौहार्द का… Continue reading यायावरी चेतना का शाश्वत सत्य

नेहरू-मोदी तुलना: बचकानी या क्षुद्र?

नेहरू में नहीं था। वे जो बात कहते थे, जो विश्वास रखते थे, उसी अनुरूप ही सारे काम आजीवन किए। मोदी ने अपने विचारों के प्रति वैसी निष्ठा शायद ही दिखाई। यदि नेहरू को हिन्दुत्व भाव से एलर्जी थी, तो उन्होंने नकली बातें नहीं की। उन्हें वामपंथियों से सहानुभूति थी, तो उन्होंने वामपंथियों को सम्मानित… Continue reading नेहरू-मोदी तुलना: बचकानी या क्षुद्र?

किफायत तो छोड़िए, नाटक भी नहीं चलेगा

जब आप इस पूरे खेल को गौर से देखेंगे तभी समझ आएगा कि सरकार पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में क्यों नहीं लाना चाहती। अगर वह और राज्य सरकारें कर से मोटा कमाई करती हैं तो उसकी तेल कंपनियां और रिफायनरीज भी कमाई में होड़ लगाए हुई है। सिर्फ यह खेल खत्म हो जाए… Continue reading किफायत तो छोड़िए, नाटक भी नहीं चलेगा

पेपर लीक मामले में चीन से सीखें!

चीन की गाओकाओ परीक्षा में एक करोड़ तीस लाख छात्र बैठते हैं। वह दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है । पर इसमें लीक की घटनाएं नगण्य हैं। पेपर को परमाणु हथियारों जैसा ‘टॉप सीक्रेट’ माना जाता है। पेपर सेटर्स एक महीने पहले से ही आइसोलेशन में भेजे जाते हैं। पर्चों की प्रिंटिंग… Continue reading पेपर लीक मामले में चीन से सीखें!

विरह और वापसी का सिनेमाई राग: ‘मैं वापस आऊंगा’

इम्तियाज़ अली की यह फ़िल्म हमें याद दिलाती है कि सीमाएं देशों को बांट सकती हैं, लेकिन स्मृतियों को नहीं। समय शरीर को बूढ़ा कर सकता है, लेकिन प्रेम को नहीं। और शायद इसलिए फ़िल्म का शीर्षक अंततः एक वादा बन जाता है, “मैं वापस आऊंगा”। किसी व्यक्ति की तरह नहीं, बल्कि उस प्रेम की… Continue reading विरह और वापसी का सिनेमाई राग: ‘मैं वापस आऊंगा’

योग शिक्षकों के भविष्य पर सवाल

देश के कई विश्वविद्यालयों से योग में बीए, एमए और पीजी डिप्लोमा करने वाले युवाओं का कहना है कि पढ़ाई के दौरान उन्हें बताया जाता है कि योग का क्षेत्र बहुत व्यापक है, लेकिन वास्तविकता में सरकारी नौकरियां बेहद सीमित हैं।   स्कूलों में योग शिक्षकों के नियमित पद बहुत कम हैं। अधिकांश राज्यों में योग… Continue reading योग शिक्षकों के भविष्य पर सवाल

बंगाल के प्रभाव से बदलती देश की राजनीति

किसी भी पार्टी के लिए पूर्वी भारत का विजय अभियान तभी पूरा होता, जब वह पश्चिम बंगाल जीते। वैसे ही जैसे पश्चिम का विजय अभियान महाराष्ट्र और उत्तर का अभियान उत्तर प्रदेश के बगैर अधूरा होता है। बहरहाल, पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत ने सिर्फ पूर्वी भारत के अभियान को संपूर्ण नहीं बनाया है,… Continue reading बंगाल के प्रभाव से बदलती देश की राजनीति

तो सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं!

हकीकत यही है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में मैनुफैक्चरिंग की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयास सफल नहीं हुए। ‘मेक इन इंडिया’, पीएलआई योजना, बुनियादी ढांचे में निवेश, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक आपूर्ति-शृंखला में आए परिवर्तनों का लाभ उठाने के अवसर सामने थे, लेकिन मैनुफैक्चरिंग क्षमता, रोजगार देने की क्षमता, आपूर्ति-शृंखला की गहराई और देश… Continue reading तो सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं!

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