युद्ध का भारत पर होगा प्रभाव

लंबे समय तक चलने वाला युद्ध भारत की रसद लागत और प्रेषण को प्रभावित करेगा। ऐसे में भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है, और मुद्रास्फीति बढ़ने से आम आदमी पर बोझ पड़ेगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले ही बढ़ी हुई हैं, जिससे परिवहन और कृषि क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। दुनिया एक नए… Continue reading युद्ध का भारत पर होगा प्रभाव

चुनाव घोषणा पर नजर है लेकिन…..

स्पष्ट अर्थ है कि जब तक इन सभी 52 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच नहीं हो जाती है और उनमें से पात्र मतदाताओं के नाम पूरक मतदाता सूची में नहीं शामिल किया जाता है तब तक चुनाव नहीं होगा। तभी प्रश्न है कि क्या चुनाव से पहले इन सभी मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच… Continue reading चुनाव घोषणा पर नजर है लेकिन…..

भारत को सिर्फ अपने हित साधने

संदेह नहीं कि अमेरिका-इजराइल और ईरान अपने अपने उद्देश्यों को साधने में लगे है, जिसपर वैश्विक शांति, स्थिरता, नैतिकता, लोकतंत्र और मानवता का दिखावा रूपी मुलम्मा चढ़ाया जा रहा है। भारत के लिए सबसे समझदारी भरा रास्ता यही है कि वह राष्ट्रहितों, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को ऊपर रखे। यही व्यवहारिक और जिम्मेदार… Continue reading भारत को सिर्फ अपने हित साधने

कैसे समझें अमेरिका के नग्न तांडव को

ट्रंप और उनके अधिकारियों को इस बात का श्रेय देना होगा कि वे अपने मकसद को लेकर अक्सर कोई लाग-लपेट नहीं दिखाते। वे वही बोलते हैं, जो उनका मकसद है। … सार यह कि अमेरिक चाहता है कि दुनिया के तमाम देश अपने प्राकृतिक संसाधनों तक अमेरिकी कंपनियों की पहुंच निर्बाध बनने दें, अपने बाजार… Continue reading कैसे समझें अमेरिका के नग्न तांडव को

जंग ख़त्म, संघर्ष बाक़ी: ‘सूबेदार’

यह फ़िल्म युद्धभूमि से लौटे एक सैनिक की कहानी है, जो अपने ही समाज में मौजूद अन्याय, भ्रष्टाचार और हिंसा से जूझता है। इस अर्थ में ‘सूबेदार’ सिर्फ़ एक एक्शन-ड्रामा नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज के नैतिक संकट का सिनेमाई रूपक भी है। फ़िल्म का केंद्रीय पात्र सूबेदार अर्जुन मौर्य है, जिसकी भूमिका अनिल कपूर… Continue reading जंग ख़त्म, संघर्ष बाक़ी: ‘सूबेदार’

क्रिकेट में तो हुए विश्वगुरु!

बीसमबीस विश्वकप 2026 में अपने खिलाड़ियों ने किंवदंती नुमां क्रिकेट खेली। .. अमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम पर सवा-लाख लोगों ने बीसमबीस विश्वकप जीत का भव्य उत्सव मनाया। सभी ने खिलाड़ियों का परिवार से मिलना देखा। सेल्फी और फोटो खिंचवाना चला। देश-विदेश से खूब वाहवाही मिली। देश भर को गर्व की अनुभूति हुई। इसलिए क्रिकेट… Continue reading क्रिकेट में तो हुए विश्वगुरु!

पारस-शिलाओं के स्पर्श से वंचित ओम बिरला

चलिए, जो हुआ, सो, हुआ। बिरला फिर आसनारूढ़ हैं। उन्हें होना ही था। कोई दूर-दूर तक सपने में भी यह नहीं सोच रहा था कि उन्हें हटाने का प्रस्ताव पारित हो जाएगा। सो, सब प्रतीकात्मक था। मगर बिरला अगर थोड़े भी संवेदनशील हैं तो यह अहसास उन्हें ज़रूर कचोट रहा होगा कि भारतीय संसद के… Continue reading पारस-शिलाओं के स्पर्श से वंचित ओम बिरला

शिक्षण संस्थाओं में अब भाईसाहबों का बोलबाला

अब भारत में एक भी बौद्धिक, साहित्यिक मंच, पत्रिका नहीं जो देश में भी जानी जाती हो। यह शिक्षा को दलबंदी के हवाले करने से हुआ। अंग्रेज शासक शिक्षा संस्थानों के लिए भारत या बाहर से भी केवल विद्वानों को ही खोज कर लाते थे। जबकि देसी शासक अकादमिक कुर्सियाँ भी प्रायः दलीय कारकूनों, मुंशियों,… Continue reading शिक्षण संस्थाओं में अब भाईसाहबों का बोलबाला

लड़ाकू विमान अपग्रेड का हाल कहीं पहल जैसा न हो

दावा है कि छठी पीढ़ी की ओर अपग्रेड से ‘एमका’ अमरीका के ‘नेक्स्ट जनरेशन एयर डोमिनेन्स’ (NGAD) या चीनी छठी पीढ़ी कार्यक्रमों से मुकाबला अवश्य कर सकेगा। लेकिन वहीं इस परियोजना में चुनौतियां भी हैं। जैसे कि इंजन विकास में देरी, फंडिंग की कमी और समयसीमा का पालन। इसलिए यदि ‘एमका’ को एक सफल परियोजना… Continue reading लड़ाकू विमान अपग्रेड का हाल कहीं पहल जैसा न हो

‘राष्ट्रवादी’ देसी शासकों ने शिक्षा को बनाया बाँझ

जो लोग मैकाले को कोसते और ‘इंडियन नॉलेज‘ का डंका पीटते हैं, वही दूसरी साँस में भारतीय इंजीनियर, डॉक्टर और टीचर ‘एक्सपोर्ट‘ करने की डींग भी हाँकते हैं। जबकि ऐसे भारतीय मैकाले-शिक्षा, यानी अंग्रेजों की देन हैं! इसी तरह, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम्‘ बोल कर फूलते हैं, वही अमेरिका और यूरोप को नीच बताते हैं। ऐसे… Continue reading ‘राष्ट्रवादी’ देसी शासकों ने शिक्षा को बनाया बाँझ

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