The US@250: सबसे श्रेष्ठ होने की ढही कहानियां

गहराते राजनीतिक ध्रुवीकरण और लगातार तीक्ष्ण होते सामाजिक अंतर्विरोधों के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी स्थापना- यानी ब्रिटिश राजशाही से आजादी की घोषणा- की 250वीं सालगिरह मनाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये अवसर उस समय आया, जब दुनिया पर आठ दशकों से जारी अमेरिकी वर्चस्व की जड़ें डगमगाती मालूम पड़ी हैं। अमेरिकी सैन्य शक्ति… Continue reading The US@250: सबसे श्रेष्ठ होने की ढही कहानियां

सुवेंदु से होगा पूर्वोत्तर का पूर्वोदय

पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में एक एक करके भाजपा या एनडीए की सरकार बन गई थी। लेकिन सबके पता है कि पूर्वोत्तर का गेटवे पश्चिम बंगाल है। वहीं पर एक ऐसी पार्टी की सरकार थी, जो भाजपा और केंद्र सरकार के प्रति लगातार द्वेष भाव रखती थी। इस वजह से पूर्वोत्तर के राज्यों की एनडीए… Continue reading सुवेंदु से होगा पूर्वोत्तर का पूर्वोदय

कहानी पर भारी तमाशा: ‘वेलकम टू द जंगल’

फ़िल्म की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वह लगातार हंसाने की कोशिश करती है, लेकिन अपने पात्रों को जीने का अवसर ही नहीं देती।…जबकि अच्छी कॉमेडी ठहराव से पैदा होती है। चार्ली चैप्लिन की मुस्कान, ऋषिकेश मुखर्जी की सहजता, बासु चटर्जी का घरेलूपन या प्रियदर्शन की अफरा-तफरी, इन सबमें एक समानता थी। वहां हंसी… Continue reading कहानी पर भारी तमाशा: ‘वेलकम टू द जंगल’

भारत का भविष्य कोचिंग कारोबार में गिरवी

भारत में अब किशोर ऐसे वर्षों से गुजरते हैं जिन्हें जीवन का सबसे जिज्ञासु और सबसे कल्पनाशील समय होना चाहिए। यही वह उम्र होती है जब मनुष्य खेलता है, पढ़ता है, संगीत सुनता है, बहस करता है, असफल होकर फिर उठता है और धीरे-धीरे स्वयं को पहचानता है। लेकिन प्रतियोगी परीक्षा की दुनिया इस पूरे… Continue reading भारत का भविष्य कोचिंग कारोबार में गिरवी

ईरान ने तोड़ दिया अमेरिका का रुतबा

ईरान ने प्रत्यक्ष युद्ध में अमेरिकी ताकत की सीमाओं को उजागर किया, जिसकी पहले से चीन और रूस के साथ अघोषित धुरी बनी हुई है। चीन अमेरिकी साम्राज्यवाद के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन कर उभरा है। वह उन तमाम देशों के लिए परोक्ष सहायक एवं सहारा बना हुआ है, जो पश्चिमी साम्राज्यवाद की मर्जी… Continue reading ईरान ने तोड़ दिया अमेरिका का रुतबा

पासपोर्ट पर अनावश्यक विवाद !

अंतरराष्ट्रीय रूप से, पासपोर्ट राष्ट्रीयता का प्रतीक है, लेकिन यदि किसी की नागरिकता पर विवाद हो (जैसे आप्रवासन, आतंकवाद या दोहरी नागरिकता के मामले में), तो कोर्ट या सक्षम प्राधिकरण मूल दस्तावेजों: जन्म प्रमाण-पत्र, माता-पिता के दस्तावेज, प्राकृतिककरण प्रमाण आदि, की जांच करते हैं। भारत में यह स्थिति नई नहीं है; बॉम्बे हाईकोर्ट (2013) और… Continue reading पासपोर्ट पर अनावश्यक विवाद !

कबीरदास खुद कहते हैं ‘मेरी बोली पूरबी’

कबीर की मुख्य भाषा साधुक्कड़ी थी, जिसमें भोजपुरी, अवधी, ब्रज और राजस्थानी के शब्द मिलते हैं। लेकिन उनकी रचनाओं (विशेष रूप से भजनों और साखियों) में भोजपुरी की बोली, लय और शब्दावली का गहरा प्रभाव है। भोजपुरी अंचल में ‘निर्गुण‘ कबीर की विचारधारा को जन जन तक पहुंचाने का सबसे लोकप्रिय माध्यम है। ‘तोरी गठरी… Continue reading कबीरदास खुद कहते हैं ‘मेरी बोली पूरबी’

कबीर दर्शन में उलटबांसी भरपूर

कबीर भारतीय दर्शन के मौलिक प्रवर्तक नहीं, बल्कि उसके अद्वितीय व्याख्याकार और लोकभाषा के महान संवाहक हैं। उन्होंने उपनिषदों के अद्वैत, हठयोग की अंतर्यात्रा और गीता के अनासक्ति योग को एक सूत्र में पिरोकर ऐसा जीवनदर्शन दिया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना छह सौ वर्ष पहले था। 29 जून : कबीर जयंती… Continue reading कबीर दर्शन में उलटबांसी भरपूर

बंगाल में सबके लिए समान कानून

जिन समाजों में बहुविवाह की प्रथा है वहां आबादी बढ़ने का अनुपात बाकी समाजों के मुकाबले ज्यादा है, जिससे समाज में एक किस्म का असंतुलन बनता है। इस कानून के जरिए उसे भी दूर किया जा सकेगा। इसलिए पश्चिम बंगाल में समान कानून के स्वागत की तैयारी होनी चाहिए। पश्चिम बंगाल की सुवेंदु सरकार अपना… Continue reading बंगाल में सबके लिए समान कानून

निर्भीक लज्जाहीनता की भट्टी से निकले तपस्वी

इस दौर के सियासतदां निर्भीक लज्जाहीनता की भट्टी से तप कर निकले हैं। उन्हें शाश्वत ढीठता की घुट्टियां पिला-पिला कर पाला-पोसा गया है। उन के मार्गदर्शक चूं-चूं का मुरब्बा नहीं हैं।… ये लोग मर्यादाओं से हट कर ही चलेंगे। इसलिए वे अपना कर्तव्यपालन कर रहे हैं। उन की गुरु-दक्षिणा के गर्व से फूल कर गुरुजन… Continue reading निर्भीक लज्जाहीनता की भट्टी से निकले तपस्वी

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