आपसी फूट ने ही इतिहास बिगाडा

इतिहास चेतावनी देता है कि मजबूत सेना भी बिखरे हुए समाज को नहीं बचा सकती। यदि आज का भारत जाति, भाषा या इंटरनेट पर फैलाए जा रहे प्रचार के कारण फिर से आपस में लड़ने लगा, तो वह प्राचीन भारत के उन राजाओं की तरह ही होगा जिन्होंने आपसी ईर्ष्या में अपनी स्वतंत्रता खो दी… Continue reading आपसी फूट ने ही इतिहास बिगाडा

आप पार्टी का झगड़ा लोकतंत्र की परीक्षा

क्या एक सांसद को पार्टी कोटा से बोलने का अधिकार पार्टी नेतृत्व के विवेक पर निर्भर होना चाहिए? संविधान और संसदीय परंपरा में सांसद पार्टी से कहीं ज़्यादा जनता का प्रतिनिधि है। लेकिन वास्तविकता में व्हिप और पार्टी लाइन बाध्यकारी हैं। आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी जो स्वयं ‘स्वराज’ और पारदर्शिता का नारा देती… Continue reading आप पार्टी का झगड़ा लोकतंत्र की परीक्षा

सनातन संस्कृति में मंदिर अंहम है!

मंदिर समाज को एक सूत्र में पिरोते हैं। त्योहारों, उत्सवों और सामूहिक भोज अर्थात भंडारा के माध्यम से जातिभेद मिटाकर एकता का संचार करते हैं। ये सामुदायिक केंद्र के रूप में सामाजिक समरसता का कार्य करते हैं। भारतीय परंपरा में मंदिरों का स्थान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वे धर्म और सभ्यता के… Continue reading सनातन संस्कृति में मंदिर अंहम है!

जिहादी मानसिकता का सिलसिला

गत 29 मार्च को दिल्ली पुलिस ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार जिहादी अहमद लोन उर्फ राजा कश्मीरी को दबोच लिया। बकौल मीडिया रिपोर्ट, उसकी कुदृष्टि राजधानी के पवित्र कालकाजी मंदिर और कनॉट प्लेस जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर थी। पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर वह लश्कर के लिए भारतीय मुस्लिम युवाओं… Continue reading जिहादी मानसिकता का सिलसिला

बदली हुई दुनिया में भारत

अपनी अल्प-दृष्टि के कारण भारत के शासकों ने ताकत निर्माण के बजाय शक्ति प्रदर्शन को तरजीह दी, जिसने भारत को विश्व मंच पर आज अलग-थलग खड़ा कर दिया है। अगर शक्ति अपनी हो, तो उसके प्रदर्शन में कोई बुराई नहीं होती। लेकिन किसी अन्य ताकतवर से जुड़ कर उसे अपनी शक्ति मान लेना हमेशा हानिकारक… Continue reading बदली हुई दुनिया में भारत

हिंसा, अव्यवस्था के भंवर में बंगाल

अगर एक बार समय की कमी या किसी अन्य आधार पर लाखों लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होता है और उसके बगैर चुनाव हो जाता है तो इसकी एक मिसाल बन जाएगी। इस बार भले स्वाभाविक कारणों से ऐसा हो लेकिन भविष्य में ऐसा भी हो सकता है कि इस घटनाक्रम की… Continue reading हिंसा, अव्यवस्था के भंवर में बंगाल

देह, दोष और दृष्टि की राजनीति: ‘एक्यूज्ड’

आज के सिने–सोहबत में हम बात करेंगे हाल ही में आई फ़िल्म ‘एक्यूज्ड’ की, एक ऐसी फ़िल्म जो केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि दर्शक को असहज प्रश्नों के बीच खड़ा कर देती है। अनुभूति कश्यप द्वारा निर्देशित यह फ़िल्म मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परतों से बनी एक जटिल कथा रचने की कोशिश करती है, जहां आरोप,… Continue reading देह, दोष और दृष्टि की राजनीति: ‘एक्यूज्ड’

नक्सल-मुक्त होने का मियांमिट्ठुई उत्सव

दूसरों के किए का श्रेय भी जबरन ख़ुद के बीजक में लिख कर, नाच-गा कर, उस का बिगुल बजा-बजा कर, ही तो भाजपा ने यह सियासी मुक़ाम हासिल किया है। सो, भाजपा के लिए जरूरी है कि वह कांग्रेस को नक्सलवाद का जन्मदाता बताए, कांग्रेस को उस का पालनहार बताए, कांग्रेस और नक्सलियों के बीच… Continue reading नक्सल-मुक्त होने का मियांमिट्ठुई उत्सव

नौकरी गंवाने के नए तनाव

31 मार्च को कोठानूर इलाके के एक हाई-राइज अपार्टमेंट में एक युवा तकनीकी जोड़ी ने आत्महत्या कर ली। पति भानुचंद्र रेड्डी (32) और पत्नी बीबी शाजिया सिराज (31)। दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर, दोनों की कमाई लाखों में, अमेरिका में काम का अनुभव, 80 लाख का सालाना पैकेज और सफलता की सारी बाहरी निशानियां। लेकिन अंदर से?… Continue reading नौकरी गंवाने के नए तनाव

सम्राट अशोक का शासन था नैतिकता से जुड़ा

अशोक की महत्ता इस बात में है कि उन्होंने शासन को नैतिकता से जोड़ा। उन्होंने सिद्ध किया कि सच्ची महानता साम्राज्य के विस्तार में नहीं, बल्कि प्रजा के चरित्र के उत्थान में है। वे आज भी भारतीय चेतना के ऐसे प्रतीक हैं, जो शक्ति और करुणा के संतुलन की प्रेरणा देते हैं। …भारतीय कला को… Continue reading सम्राट अशोक का शासन था नैतिकता से जुड़ा

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