आगे कुँआ, पीछे मोदी

बेचारे हिन्दू दोहरी चोट झेल रहे हैं — संघ-परिवार का विश्वासघात और ब्लैकमेलिंग।‌ क्या इस से आगे कोई फर्क पड़ेगा? नहीं, राजा बाबू ने सब प्रबंध कर लिया है। कहीं कोई छिद्र नहीं छोड़ा। चाहे संवैधानिक संस्थाओं, रेफरियों पर धब्बा लगता रहे। लिहाजा चुनावी फुटबॉल का नेशनल कप वही जीतते रहेंगे। बाकी इंडिया बस वाचता… Continue reading आगे कुँआ, पीछे मोदी

आर्युवेद में वैज्ञानिक शोध आवश्यक

आज मोमो, नूडल्स, बर्गर, पिज़्ज़ा जैसे न जाने कितने उत्पाद हैं जो अब भारत की धमनियों में प्रवेश कर चुके हैं और सबके स्वास्थ्य का सत्यानाश कर रहे हैं। यही है बाज़ारू संस्कृति। पहले अखाद्य पदार्थ खाओ। फिर बीमार पड़ो और फिर महंगे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाओ। इस विषम चक्र से बचने का एक… Continue reading आर्युवेद में वैज्ञानिक शोध आवश्यक

वेस्ट बंगाल को बेस्ट बंगाल बनाएंगे सुवेंदु

मुख्यमंत्री ने कारोबार सुगमता सुनिश्चित करने की अपनी सोच को आगे बढ़ाते हुए ऐलान किया कि सभी बड़े निवेश प्रस्तावों को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी। इस प्रणाली के तहत औद्योगिक विकास निगम, भूमि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित विभाग आवश्यक स्वीकृतियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र एक ही मंच… Continue reading वेस्ट बंगाल को बेस्ट बंगाल बनाएंगे सुवेंदु

मोदी से अब किसको उम्मीद!

हम तो बस जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि हमें या सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बना दिया जाए। हमारी बस इतनी-सी मांग है कि जवाबदेही तय की जाए और शिक्षा मंत्री के रूप में उस व्यक्ति को बदला जाए, जो ठीक से परीक्षाएं आयोजित कराने में विफल… Continue reading मोदी से अब किसको उम्मीद!

एक मूक स्त्री की चीख: ‘बेबी डू डाई डू’

फ़िल्म का शीर्षक भी अपने भीतर एक विचित्र बेचैनी समेटे हुए है। ‘बेबी डू डाई डू‘ किसी लोकप्रिय धुन जैसा सुनाई देता है, लेकिन फ़िल्म देखते हुए महसूस होता है कि यह जीवन के एक अंतहीन चक्र का रूपक है, करो, बचो, गिरो, फिर उठो। यहां मृत्यु केवल शरीर की नहीं, संवेदनाओं की भी है।… Continue reading एक मूक स्त्री की चीख: ‘बेबी डू डाई डू’

मोदी-भागवत मल्लयुद्ध का धारावाहिक

सोचने की बात यह है कि आज गडकरी के साथ, जो कुछ हो रहा है, क्यों हो रहा है? इस के बीज कम-से-कम 17 साल पुराने हैं। तब नरेंद्र भाई गुजरात के मुख्यमंत्री थे और गडकरी 2009 में भाजपा के अध्यक्ष बन गए थे।… पूरा देश पूछ रहा है कि पेट्रोलियम मंत्री तो हरदीप सिंह… Continue reading मोदी-भागवत मल्लयुद्ध का धारावाहिक

‘भजन क्लबिंग’ का बढ़ता ट्रेंड

पिछले कुछ वर्षों से भारत में युवाओं के बीच एक नए चलन की शुरुआत हुई है जिसे ‘भजन क्लबिंग’ कहा जाता है। युवाओं का यह नया ‘सोबर हाई’ सबसे चर्चित ट्रेंड बन गया है। पारंपरिक भजनों को क्लब-स्टाइल एनर्जी, आधुनिक संगीत, लाइटिंग और परफॉर्मेंस के साथ पेश किया जा रहा है। आज की भागदौड़ भरी… Continue reading ‘भजन क्लबिंग’ का बढ़ता ट्रेंड

राम मंदिर का कलंक

यह मंदिर ही नहीं, सत्ता भी चलाने की अयोग्यता का अधिक बड़ा संकेत है। वैयक्तिक ईमानदारी इस की कैफियत नहीं हो सकती। उस से कई गुणा अधिक महत्वपूर्ण समाज की सुरक्षा, न्याय, और सुव्यवस्था कायम करना है। शासक का मूल्यांकन इतिहास इसी से करता है — न कि वह खुद कैसा था।…. वे राजनीतिक काम… Continue reading राम मंदिर का कलंक

नादब्रह्म की कल्पना और संगीत की उत्पत्ति

भारतीय परंपरा में संगीत केवल मनोरंजन का साधन अथवा भौतिक कला मात्र नहीं, अपितु यह परब्रह्म के साक्षात्कार, आत्मानुसंधान एवं मोक्ष प्राप्ति का एक सिद्ध, साक्षात और सर्वोत्कृष्ट मार्ग है। भारतीय संस्कृति में संगीत की उत्पत्ति, महता और उपयोगिता का विशद निरूपण हमारे प्राचीनतम ग्रंथों में उपलब्ध है। वेदों से लेकर उपनिषदों और पुराणों तक,… Continue reading नादब्रह्म की कल्पना और संगीत की उत्पत्ति

परिवारों में सोचा जाए डिजिटल डिटॉक्स

हर समय नोटिफिकेशन्स, लाइक्स और कमेंट्स आदि की तलाश में हमारा मस्तिष्क डोपामाइन की लगातार खोज में रहता है। इससे चिंता, अवसाद, नींद की समस्या और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी आती है। ‘डिजिटल डिप्रेशन’ या ‘सोशल मीडिया एंग्जायटी’ अब आम शब्द बन गए हैं। युवा पीढ़ी में आत्म-सम्मान कम होना, दूसरों से… Continue reading परिवारों में सोचा जाए डिजिटल डिटॉक्स

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