हमें फिर से ‘ठहरना’ सीखना होगा। बिना मोबाइल के, बिना किसी एजेंडा के। हमें फिर से पूछना होगा, “कैसे हो?” …रिश्ते समय मांगते हैं, उपस्थिति मांगते हैं, और सबसे बढ़ कर। साथ मांगते हैं। समय भी। यदि हम यह नहीं कर पाए, तो आने वाले समय में अवसाद केवल एक चिकित्सकीय समस्या नहीं रहेगा, बल्कि… Continue reading रिश्तों की खामोशी, अवसाद की चीख
