बढ़ रही है बंगाल की भूमिका

चार मई को आए चुनाव नतीजे और उसके बाद के घटनाक्रम ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक फलक पर पश्चिम बंगाल के अपना गौरवशाली स्थान प्राप्त करने की संभावना को साकार कर दिया है। सबसे पहला बदलाव तो यह हुआ कि लगातार केंद्र से लड़ने वाली सरकारों की जगह बंगाल के लोगों ने केंद्र में… Continue reading बढ़ रही है बंगाल की भूमिका

अकारण नहीं है ‘लाल खतरे’ का लौट आना!

अमेरिका और पूरे पश्चिम में हाल मेंल उभरी “चाइनामैक्सिंग” (Chinamaxing) की परिघटना उनकी चिंता का इससे भी बड़ा स्रोत है। “चाइनामैक्सिंग” इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भू-राजनीतिक चर्चाओं में उभरा एक आधुनिक स्लैंग है।… फिलहाल दुनिया के किसी क्षेत्र या देश में समाजवादी क्रांति या डेमोक्रेटिक सेंट्रलिज्म के सिद्धांत पर संगठित किसी कम्युनिस्ट पार्टी के क्रांतिकारी रास्ते से सत्ता में… Continue reading अकारण नहीं है ‘लाल खतरे’ का लौट आना!

‘अल्फ़ा’: स्पाई यूनिवर्स में नायिका तो आ गई पर कहानी!

आलिया भट्ट इस फ़िल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके भीतर का अभिनेता लगातार संघर्ष करता दिखाई देता है। उनका शरीर भले पारंपरिक एक्शन स्टार जैसा न हो, लेकिन उनकी आंखों में अपने किरदार के प्रति एक अडिग विश्वास दिखाई देता है। उन्होंने अपनी सीमाओं को अभिनय और तैयारी से ढंकने की पूरी कोशिश की… Continue reading ‘अल्फ़ा’: स्पाई यूनिवर्स में नायिका तो आ गई पर कहानी!

‘मोशा’ से कुनमुनाहट का ताज़ा पथ-संचलन

बारह बरस में भाजपा के आंगन में प्रवेश करने वाले सारे सियासी घुसपैठिए ‘मोशा- के लिए बूमरेंग साबित होंगे।… बारह साल में तक़रीबन दो सौ सांसद और विधायक दूसरे राजनीतिक दलों को छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हैं। हर चार दलबदलू सांसदों-विधायकों में से तीन से ज़्यादा को भाजपा ने सीधे अपनी गोद में… Continue reading ‘मोशा’ से कुनमुनाहट का ताज़ा पथ-संचलन

खूबसूरत खेल के भावुक पल

विश्वविजेता अर्जेंटीना पर फीफा फुटबॉल विश्वकप में बने रहने या बाहर हो जाने का खतरा मंडराया तो उनकी टीम ने मेसी के प्रति अनोखा खेल समर्पण दिखाया। और फिर जो बचे हुए तेरह मिनट साठ सेकंड में फुटबॉल खेली गई वो देखने वाले ताउम्र याद रखेंगे। अद्भुत, अविस्मरणीय व आक्रामक फुटबॉल हुई। मन में धीरज… Continue reading खूबसूरत खेल के भावुक पल

गणतंत्र का मालिक कौन?

अब लोकतंत्र बंदूक से कम, कारोबार से ज्यादा बदला जाता है। सत्ता पर कब्जा करने से पहले संस्थाओं की नीलामी शुरू हो जाती है। संविधान बाहर से वैसा ही दिखता है, लेकिन भीतर उसकी आत्मा धीरे धीरे निजी नियंत्रण में चली जाती है। यहीं से गणतंत्र और निजी साम्राज्य के बीच की रेखा धुंधली होने… Continue reading गणतंत्र का मालिक कौन?

डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिका को बना दिया दुकान

वे एक मालिक हैं। ऐसे मालिक, जो हर संस्था को संपत्ति और हर व्यवस्था को सौदे की संभावना के रूप में देखते हैं। वे शून्य के मालिक हैं। वे शिकारी हैं, लेकिन जंगल के नहीं। जंगल का शिकारी भी प्रकृति के किसी संतुलन का हिस्सा होता है। ट्रंप का संसार बाजार का है। वहां हर… Continue reading डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिका को बना दिया दुकान

क्या प्रधान ही प्रधान दोषी हैं?

सब के ऊपर बड़े प्रधान हैं। इसलिए छोटे प्रधानों को दोष देना व्यर्थ है। औपचारिक और वास्तविक अधिकारों, तथा अधिकारियों में इतना भेद पहले कभी नहीं था। यह चालू दौर की विशेषता है। दोहरी व्यवस्था, दोहरी बातें, दोहरे पैमाने, दोहरे काम, दोहरे चेहरे … सब कुछ दोहरा। एक दिखावटी, एक असली। एक प्रदर्शनीय, एक छिपावनीय।… Continue reading क्या प्रधान ही प्रधान दोषी हैं?

राष्ट्रचेतना के शिल्पी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आधुनिक भारत के ऐसे राष्ट्रऋषि थे, जिन्होंने राजनीति को सत्ता या व्यक्तिगत लाभ का माध्यम नहीं माना। उनके लिए राजनीति राष्ट्रसेवा और राष्ट्रनिर्माण का एक पवित्र यज्ञ थी, जिसमें व्यक्ति स्वयं को समर्पित करता है। 6 जुलाई: श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती भारतीय परंपरा में राष्ट्र केवल जमीन का एक टुकड़ा या… Continue reading राष्ट्रचेतना के शिल्पी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

यूरोप पर पर्यावरण कुप्रबंधन की मार!

यूरोप की गर्मी चेतावनी है। अगर हम खराब पर्यावरण प्रबंधन और लापरवाही जारी रखेंगे, तो भविष्य में 50 डिग्री तापमान, विनाशकारी बाढ़ और अपरिवर्तनीय क्षति सामान्य हो जाएंगी। समय कम है। 1.5 डिग्री लक्ष्य बचाना संभव है, लेकिन इसके लिए तत्काल, सामूहिक और निर्णायक कार्रवाई जरूरी है। प्रकृति हमें चेतावनी दे रही है, अब अनदेखी… Continue reading यूरोप पर पर्यावरण कुप्रबंधन की मार!

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