अमेरिका उस युद्ध को समाप्त नहीं कर पाता जिसे वह बार-बार शुरू करता है!

अमेरिका और ईरान दोनों अलग-अलग तरह के युद्ध के लिए बने हैं, अलग-अलग समय-धाराओं पर लड़ते हैं, जबकि ताजा युद्ध ऐसे लड़ा जा रहा है मानो अमेरिका और इज़राइल की सीमाओं से बाहर रहने वाले लोग केवल दृश्य हों, दांव नहीं।.. ईरान ऐसा तंत्र नहीं है जो एक प्रहार से ढह जाए। वह ऐसा तंत्र… Continue reading अमेरिका उस युद्ध को समाप्त नहीं कर पाता जिसे वह बार-बार शुरू करता है!

तभी काबिल लोग देश छोड़ जा रहे हैं।

गत आठ दशकों में विविध क्षेत्रों में तबाह, परेशान, अपमानित होने वाले करोड़ों हिन्दू केवल इसलिए दुर्गति में पड़े, क्योंकि अंग्रेजों का स्थान लेने के ख्वाहिशमंद हिन्दू नेता राजनीति के मूल तत्व से लापरवाह रहे हैं। वह कि जिम्मेदारी से अपने को दाँव पर लगाकर, दृढ़ता से ही राज्य एवं उस में रहने वाली जनता… Continue reading तभी काबिल लोग देश छोड़ जा रहे हैं।

हिन्दू राजनीति पतवार विहीन नाव

हिन्दू और मुस्लिम नेताओं की आदतों, शैलियों, और उपलब्धियों में अंतर को ‘भारतीयता‘ के माथे नहीं डाला जा सकता। वह सीधे-सीधे हिन्दू नेताओं और मुस्लिम नेताओं की भिन्नताएं हैं। हिन्दू नेता आज तक, यानी गत एक सौ बीस सालों से जब से उन्होंने राजनीति में हाथ आजमाना शुरू किया, तब से स्तरीय राजनीति का क-ख-ग… Continue reading हिन्दू राजनीति पतवार विहीन नाव

श्रीराम आज भी क्यों प्रासंगिक?

श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व सर्वांगीण है। वे सफल राजनीतिज्ञ, कुशल कूटनीतिज्ञ, गहन विचारक और दार्शनिक के रूप में सदैव प्रतिष्ठित रहेंगे। इस बहुआयामी स्वरूप के पीछे उनकी दिव्य चेतना और शक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्रीराम का संपूर्ण जीवन मानवीय मर्यादाओं से संचालित है। वे हर परिस्थिति का सामना एक सामान्य मनुष्य की तरह करते हैं… Continue reading श्रीराम आज भी क्यों प्रासंगिक?

अमेरिका का स्वेज नहर क्षण

अब ऐसी ताकतों का उदय हो चुका है, जो अमेरिका को “नहीं” कह सकते हैं। वे उस इनकार पर कायम बने रह सकते हैं। जो ऐसा करने में सक्षम हैं, वे सभी एक ध्रुव हैं। ईरान ने खुद को एक ऐसा ध्रुव साबित किया है। उसने दिखाया है कि अपनी खास भौगोलिक स्थिति, सैन्य क्षमताओं… Continue reading अमेरिका का स्वेज नहर क्षण

न्यायपालिका संवैधानिक अधिकारों की संरक्षक

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की जटिलता बढ़ती जा रही है और विचाराधीन श्रेणी के 60 लाख मतदाताओं में से जिनके नाम कट रहे हैं उनकी सुनवाई के लिए बने अपीलीय ट्रिब्यूनल ने अभी तक अपना कामकाज आरंभ नहीं हुआ है। विचाराधीन श्रेणी के करीब 40 फीसदी यानी लगभग 24 लाख मतदाताओं के नाम कटने… Continue reading न्यायपालिका संवैधानिक अधिकारों की संरक्षक

चुप्पी की छटपटाहट: ‘बयान’

फ़िल्म का सबसे भयावह पहलू उसका ‘विलेन’ नहीं, बल्कि उसका पूरा ‘सिस्टम’ है, जिसमें पंथ, सत्ता और ‘खामोश हिंसा’ अपने अपने अनुपात में मौजूद हैं। पंथ नेता का किरदार जिसे चंद्रचूड़ सिंह ने बेहद संयमित और सधे तरीके से निभाया है, किसी पारंपरिक खलनायक की तरह नहीं है। वह चिल्लाता नहीं, हिंसक नहीं दिखता लेकिन… Continue reading चुप्पी की छटपटाहट: ‘बयान’

इस युद्ध से ऊर्जा लॉकडाउन का डर!

युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि ऊर्जा पाइपलाइनों और आर्थिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी लड़ा जाता है। गौरतलब है कि शांति की अपील सभी पक्षों, अमेरिका, इजरायल, ईरान और मध्यस्थ देशों से होनी चाहिए। अन्यथा, दुनिया भर में ऊर्जा लॉकडाउन का साया काफ़ी देर तक मँडराता रहेगा। दुनिया नए संकट के कगार पर है।… Continue reading इस युद्ध से ऊर्जा लॉकडाउन का डर!

श्रीराम का मर्यादित जीवन

श्रीराम के जीवन का सबसे बड़ा आधार सत्य है। वाल्मीकि रामायण में उन्हें सत्यवादी और दृढव्रतः कहा गया है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने मानवीय सीमाओं अर्थात मर्यादाओं में रहकर वह सर्वोच्च आचरण प्रस्तुत किया, जो आज भी मानवता का पथ-प्रदर्शक है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण केवल एक महाकाव्य… Continue reading श्रीराम का मर्यादित जीवन

भारत से गुजरती जलडमरूमध्य रेखा!

उन्नति के सतही चित्र के नीचे एक शांत, पर अधिक निर्णायक वास्तविकता मौजूद है—भारत की समृद्धि कुछ बाहरी निर्भरताओं पर टिकी है, जिन्हें न तो व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है, न ही रणनीतिक रूप से सुरक्षित किया गया है। यह बात सबसे स्पष्ट रूप से फारस की खाड़ी के साथ उसके संबंध में… Continue reading भारत से गुजरती जलडमरूमध्य रेखा!

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