केरल को ले कर मीडिया का रोना धोना

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कितनी टीवी डिबेटें हुईं इस पर कि पांच दिन हो गए, छह हो गए। अब तो सात हो गए। एंकरों को ऐसा लग रहा था कि वे सख्त से सख्त भाषा में बोलकर कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनने को ही रोक देंगे या रोक देंगी! कांग्रेस बना ही नहीं सकती। फैसला लेना ही नहीं आता। अभी मोदी और अमित शाह हों तो एक मिनट में घोषित कर दें।

मुख्यमंत्री तो कांग्रेस का ही घोषित होना था। केरलम कभी राष्ट्रीय प्रेस का मुख्य विषय नहीं रहा। लेकिन पिछले एक हफ्ते में मीडिया ने ऐसा तूफान उठाया कि लगा कि केरलम का मुख्यमंत्री अगर जल्दी घोषित नहीं हुआ तो कोई बड़ी राष्ट्रीय विपदा आ जाएगी। खैर, कांग्रेस ने जनता के बीच लोकप्रिय और पांच साल तक विपक्ष का नेता रहते हुए केरलम में कांग्रेस की जमीन बनाने वाले वी डी के नाम से जाने जाने वाले वाडस्सेरी दामोदरन सतीशन को नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है।

कितनी टीवी डिबेटें हुईं इस पर कि पांच दिन हो गए, छह हो गए। अब तो सात हो गए। एंकरों को ऐसा लग रहा था कि वे सख्त से सख्त भाषा में बोलकर कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनने को ही रोक देंगे या रोक देंगी! कांग्रेस बना ही नहीं सकती। फैसला लेना ही नहीं आता। अभी मोदी और अमित शाह हों तो एक मिनट में घोषित कर दें। हालांकि बंगाल और असम, जहां उन्होंने अभी किए, वहां भाजपा के किसी नेता को नहीं बना पाए। दूसरी पार्टियों से आए हुए लोगों को ही बनाना पड़ा।

खैर, कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और केरल में ऑब्जर्वर बनकर गए अजय माकन ने “देर हो रही है” का अच्छा जवाब दिया। उन्होंने सन 2000 के बाद का सारा रिकॉर्ड बताते हुए कहा कि इस दौरान कांग्रेस को 22 मौके मिले। मुख्यमंत्री चुनने के औसत दिन लगे पांच। 22 में से 14 बार पांच या उससे कम दिन में फैसला किया।

माकन ने कहा, अब बीजेपी का रिकॉर्ड देखिए। उसके 30 मामले हैं। इनमें 13 बार आठ या उससे ज्यादा दिन लगे। औसत 7.2 दिन लगे। सबसे ज्यादा 15 दिन, 2022 में योगी आदित्यनाथ को यूपी का मुख्यमंत्री चुनने में। 2022 में ही उत्तराखंड में पुष्कर धामी को बनाने में 13 दिन। राजस्थान में 2023 में भजनलाल को और दिल्ली में 2025 में रेखा गुप्ता को बनाने में 12-12 दिन।

मणिपुर 2022, अरुणाचल 2024 में 11-11 दिन।

मीडिया की बेमतलब की बहसों और सवालों पर माकन को कहना पड़ा कि बीजेपी की इन देरियों पर गोदी मीडिया चुप रहा। उन्होंने “गोदी मीडिया” शब्द का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने तो 15 दिन, 13 दिन, 12 दिन नहीं लगाए।

अजय माकन को आता है, उनकी ही भाषा में उन्हें जवाब देना!

लेकिन गोदी मीडिया को वही विषय उठाना है जिसमें वह कांग्रेस को और खासतौर से राहुल को बुरा-भला कह सके। दुनिया के इतिहास में पहली बार हो रहा है जब मीडिया ने अपना मुख्य काम विपक्ष को घेरना बना लिया हो। नहीं तो पत्रकारिता सत्ता पक्ष को घेरने के लिए शुरू हुई थी।

मगर अब सत्ता पक्ष तो होली काऊ है। और विपक्ष देश की सभी समस्याओं की जड़। आज गुरुवार को जब कांग्रेस ने गोदी मीडिया का एक मुद्दा “मुख्यमंत्री घोषित क्यों नहीं?” खत्म किया, हालांकि गोदी मीडिया के लिए वह खत्म नहीं हुआ, वह अगली कमी ढूंढने लगी कि सतीशन को ही क्यों? के. सी. वेणुगोपाल को क्यों नहीं? कारण भी उन्होंने ढूंढ लिया कि राहुल की नहीं चली!

मूल मुद्दा तो राहुल को ही कमजोर करना है। इसलिए उसी दिन राहुल की विदेश यात्राओं के खर्च का हिसाब बताने बैठ गए। जैसे राहुल की विदेश यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की तरह सरकारी विमान में होती हो। मुद्दा प्रधानमंत्री का देश को किफायत से चलाने और खुद शाहखर्ची करने का है। मगर राहुल को बीच में लाए बिना बीजेपी अपने नेता का भी बचाव नहीं कर पाती है।

राहुल कमजोर हो जाएं, नेहरू के काम छोटे दिखने लगें, इंदिरा का अमेरिका के राष्ट्रपति को डपट देने की बात जनता भूल जाए, इससे भाजपा समझती है कि प्रधानमंत्री मोदी का कद बड़ा हो जाएगा। काश ऐसा हो सकता! तो शायद राहुल कहते कि भाई मेरे सामने बैठकर चार कमियां और निकाल लो। मगर देश के प्रधानमंत्री का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान बना दो। देश का सम्मान तो कम नहीं हो सकता, मगर प्रधानमंत्री पद की जो गरिमा गिरा दी है, वह अगर मेरी निंदा से वापस आ जाए तो खूब करो!

लेकिन आज का विषय केरलम था। वहीं से बात शुरू की थी हमने। और फिर वहीं ले जा रहे हैं कि मुख्य सवाल यह है कि केरल के तमाम विषयों में नंबर वन रहने पर तो इस मीडिया ने कभी नहीं कहा कि दूसरे प्रदेशों को भी इन्हें आदर्श मानकर काम करना चाहिए। वहां चाहे लेफ्ट की सरकार रही हो या कांग्रेस की, सामाजिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता के कई मापदंडों पर इन्होंने हमेशा केरलम को नंबर वन रखा है।

याद रहे, यहां बीजेपी की सरकार कभी नहीं रही। साक्षरता दर में सर्वोच्च। 96 प्रतिशत से अधिक। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में अव्वल। सबसे कम शिशु मृत्यु दर और मातृत्व मृत्यु दर। सबसे कम गरीबी और भुखमरी। और एक ऐसा पैमाना, जिसका ढोल पीटकर मोदी 2014 में सत्ता में आए थे।

भ्रष्टाचार। मगर वही आज देश और डबल इंजन वाले राज्यों की सबसे बड़ी समस्या है। मगर कोई कार्रवाई नहीं। सारी ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई और दूसरी सारी जांच एजेंसियां विपक्ष के नेताओं के पीछे लगी हैं। उस भ्रष्टाचार के पैमाने पर केरलम सबसे कम भ्रष्ट राज्यों में गिना जाता है।एक और बता दें, महिला सुरक्षा। इसका तो सबसे बड़ा नारा लगाकर मोदी सत्ता में आए थे — “बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार।” उसके बाद क्या हुआ, यह बताने की जरूरत नहीं है। केवल इतना ही कि अगर महिला ने शिकायत की तो उसे सड़कों पर घसीटा गया। महिला पहलवान। दलित बलात्कार-हत्या पर परिवार ने आवाज उठाई तो आरोपियों ने उनका घर महीनों तक घेरकर गांव में अलग-थलग कर दिया। हाथरस। और बहुत सारी घटनाएं।

एक तो अभी हो गई। चलती बस में वैसी ही निर्भया जैसी। दिल्ली में ही। जिसको मुद्दा बनाकर भाजपा ने यूपीए सरकार को घेरा था। जबकि निर्भया का परिवार कह रहा था कि सरकार की तरफ से पूरी मदद मिल रही है। बाकी केसों में तो पीड़ितों के आरोप हैं कि सरकार आरोपियों के साथ खड़ी हुई है। महिला सुरक्षा कहीं नहीं कर पाए।

तो इस पैमाने पर केरलम की स्थिति क्या है, वह हिंदी प्रदेशों से वहां जाकर काम करने वाली लड़कियों से पूछ लीजिए। या यहां से घूमने या किसी भी काम से जाने वालों से। होटलों में रूम सर्विस का काम करती हैं लड़कियां। पूरी सुरक्षा की भावना के साथ। उत्तर भारतीय लड़कियां। कहती हैं वहां तो कोई महिला के साथ गलत बात ही नहीं करता। यहां से जाने वालों पर भी माहौल का ऐसा असर हो जाता है कि वे भी पूरे सम्मान और डिस्टेंस के साथ बिहेव करते हैं।

बहुत सारी बातें हैं। विदेशी मीडिया में छपती हैं। मगर कभी आपने राष्ट्रीय मीडिया में केरल के आम जीवन के बेहतर होने की खबरें नहीं देखी होंगी। हां, यहां यह जरूर छपता है कि यहां से गए भाजपा मुख्यमंत्रियों ने केरल को अपने प्रदेश जैसा बनाने का वादा किया। मुख्यमंत्री ने क्या कहा, बस यह छपता है। यह नहीं छपता या दिखाया जाता कि फिर वहां की जनता ने कहा — अपने जैसा बनाना है तो फिर रहने दो!


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