सद्भाव यात्रा के बीच हरियाणा की हार

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हरियाणा में कांग्रेस के नेता ब्रजेंद्र सिंह सद्भाव यात्रा कर रहे हैं। वे हजारों किलोमीटर पैदल चल चुके हैं। पिछले दिनों राहुल गांधी गुरुग्राम में उनकी यात्रा में शामिल हुए। हालांकि उस समय राज्य के कई नेता नदारद रहे। माना जा रहा है कि हरियाणा कांग्रेस में ब्रजेंद्र सिंह को स्वीकार करने का भाव नहीं है। ध्यान रहे वे कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं। हालांकि दोनों पिता पुत्र कुछ समय पहले भाजपा में चले गए थे। आईएएस से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर ब्रजेंद्र सिंह ने भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ा था और सांसद बने थै। हालांकि पिछले चुनाव में उनकी टिकट कट गई तो वे कांग्रेस में लौटे। कांग्रेस ने उनको विधानसभा में उतारा लेकिन वे बहुत मामूली अंतर से हार गए। उसके बाद यात्रा कर रहे हैं।

उनकी इस सद्भाव यात्रा के बीच हरियाणा में स्थानीय निकायों के चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस करो बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस सभी बड़े शहरों में मेयर का चुनाव हार गई। भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माने जाने वाले सोनीपत में भी भाजपा जीती। अंबाला और पंचकूला में भी भाजपा को बड़ी जीत मिली। खुद हुड्डा गढ़ी सांपला की जिस सीट से विधायक बनते हैं वहां भी भाजपा जीती। अब हरियाणा के सभी 11 नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है। गुरुग्राम से लेकर फरीदाबाद, अंबाला, रोहतक, पानीपत, करनाल, पंचकूला, यमुनानगर, हिसार और सोनीपत में भाजपा का मेयर है। नगर परिषद और नगर पंचायतों पर भी भाजपा का कब्जा है। इस तरह हरियाणा में भाजपा ने ट्रिपल इंजन की सरकार स्थापित कर ली है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के अंदर जो गुटबाजी है उसका असर चुनाव पर देखने को मिला है। एक तरफ हुड्डा अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं तो दूसरी ओर बीरेंद्र सिंह व ब्रजेंद्र सिंह से लेकर रणदीप सुरेजावाला तक जाट नेता उनको चुनौती दे रहे हैं।


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