ईरानी विदेश मंत्री की अपील, ‘ ब्रिक्स का मंच अहम

Categorized as समाचार

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ब्रिक्स मंच से संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने सदस्य देशों से अपील की कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन करने वालों की निंदा करने में अब किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।

गुरुवार को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि पिछले एक साल में ईरान पर दो बार “क्रूर और गैरकानूनी” आक्रमण हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इन हमलों को झूठे आरोपों के आधार पर उचित ठहराने की कोशिश की गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन इससे अलग तस्वीर पेश करते हैं। उनके अनुसार, ईरान को “गैरकानूनी विस्तारवाद और युद्धोन्माद” का शिकार बनाया जा रहा है।

अराघची ने कहा कि भारी दबाव और हिंसा के बावजूद ईरानी जनता ने अपनी स्वतंत्रता, संप्रभुता और आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया है। उन्होंने दोहराया, “ईरान न कभी दबाव के आगे झुका है और न ही झुकेगा।

अपने संबोधन में उन्होंने ईरान की सेना, डॉक्टरों, शिक्षकों और सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि इन सभी ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने जीवन को जोखिम में डाला है। उन्होंने युद्ध से प्रभावित परिवारों, विशेषकर माताओं और युवाओं के साहस का भी उल्लेख किया।

Also Read : पीएम मोदी की अपील के बाद बस से सफर पर निकले नितिन गडकरी

अराघची ने कहा कि ईरान ऐसा देश नहीं है जो दबाव में टूट जाए, बल्कि हर संकट के बाद और अधिक मजबूत होकर सामने आता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान कूटनीति और बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान से जुड़े किसी भी विवाद का सैन्य समाधान संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि किसी विदेशी ताकत ने हमला किया, तो ईरानी सशस्त्र बल उसका “कड़ा और निर्णायक जवाब” देने के लिए तैयार हैं, जबकि ईरान की आम जनता युद्ध नहीं चाहती।

ब्रिक्स मंच की सराहना करते हुए अराघची ने इसे “नई वैश्विक व्यवस्था” का प्रतीक बताया, जिसमें ग्लोबल साउथ की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने अमेरिका पर “वर्चस्ववादी मानसिकता” अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान की लड़ाई केवल अपनी सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि उन देशों के लिए भी है जो पश्चिमी दबाव और हस्तक्षेप का विरोध करते हैं।

अराघची ने ब्रिक्स देशों से अपील की कि वे अमेरिका और इजरायल की ओर से अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघनों की खुलकर निंदा करें, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल को रोकें और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह ठहराने की दिशा में कदम उठाएं।

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था बनाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए जो अधिक न्यायपूर्ण, संतुलित और मानवीय हो।

Pic Credit : ANI


Previous News Next News

More News

किसान सम्मान के नाम से ई-20 पेट्रोल बिकेगा

July 30, 2026

भारतीय जनता पार्टी और उसकी केंद्र सरकार के बारे में एक बात माननी होगी। दोनों अपने किसी फैसले को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी तर्क खोज सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फैसले को जस्टिफाई करने के लिए प्राइमरी तर्क पर ही अड़े रहे हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति या सरकार अपने फैसले…

ओवैसी का बिहार वाला दांव यूपी में भी

July 30, 2026

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में एक दांव चला था। उन्होंने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल किया जाए। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान गाजे बाजे के साथ लालू प्रसाद के निवास के बाहर पहुंच…

जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है?

July 30, 2026

यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की…

केरल हारने का कारण खोज लिया सीपीएम ने

July 30, 2026

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन एलडीएफ इस साल मई के चुनाव में हार गया था। उसके बाद से पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि सब कुछ ठीक था तो पार्टी क्यों हारी? इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मंथन…

नीलेकणी क्या नीट खत्म करने की सिफारिश करेंगे?

July 30, 2026

इंफोसिस के सह संस्थापक और भारत में आधार क्रांति के सूत्रधार नंदन नीलेकणी के ऊपर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने का जिम्मा सौंपा है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के पूर्व प्रमुख एस सोमनाथ को भी इस उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पता नहीं लोगों को याद…

logo