कांग्रेस पार्टी के सामने राजनीतिक चुनौती तो भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी की है ही लेकिन एक बड़ी चुनौती प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की है। वह चुनौती कब और कहां से कांग्रेस को परेशान करने लगेगी यह पता नहीं चल पाता है। कांग्रेस के एक जानकार नेता ने कहा कि कई बार लगता है कि अब क्या कर लेंगे? कांग्रेस नेता सोचते हैं कि सोनिया और राहुल गांधी से कई कई दिन की पूछताछ हो चुकी है, रॉबर्ट वाड्रा से कई बार पूछताछ हो चुकी है, डीके शिवकुमार से लेकर पी चिदंबरम तक अनेक नेता जेल घूम आए हैं, जो जेल नहीं गए उनमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछताछ हो चुकी है इसलिए अब डरने की जरुरत नहीं है। लेकिन फिर कहीं और ईडी की कार्रवाई हो जाती है और पार्टी के लिए समस्या खड़ी हो जाती है।
ताजा मामला उत्तऱाखंड का है, जहां पांच महीने के बाद विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस पार्टी उम्मीद कर रही है कि भाजपा की 10 साल की सरकार के खिलाफ एंटी इन्कम्बैंसी है, जिसका उसको फायदा होगा। लेकिन वहां चुनाव से ऐन पहले पार्टी के सबसे बड़े नेता हरीश रावत विवादों में फंस गए हैं। पिछले दिनों उनके निजी सचिव चंदन सिंह जीना के यहां ईडी ने छापा मारा और सवा करोड़ रुपए से अधिक की नकदी व संपत्ति जब्त की। हरीश रावत जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे तब जीना उनके ओएसडी होते थे। आज वे किसी सरकारी पद पर नहीं हैं लेकिन वे हरीश रालत के पीए हैं। इसलिए उनके यहां ईडी की कार्रवाई की आंच रावत तक आनी ही थी। सो, रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वे अभी कांग्रेस कार्य समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य हैं और साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी के भी सदस्य हैं। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रही है इसलिए वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से पार्टी के अभियान पर किसी तरह की आंच आए। यह स्पष्ट रूप से नैतिक स्टैंड है लेकिन ईडी की कार्रवाई से भाजपा को मौका मिला है कि वह कांग्रेस के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
उत्तराखंड से पहले ईडी ने कर्नाटक में कार्रवाई की थी। ईडी ने पिछले हफ्ते कर्नाटक की डीके शिवकुमार सरकार के मंत्री सतीश जरकिहोली और उनकी सांसद बेटी प्रियंका के यहां छापा मारा। जरकिहोली परिवार बहुत मजबूत राजनीतिक परिवार है। उनमें भी सतीश का किस्सा बहुत दिलचस्प है। सतीश जरकिहोली एक समय सिद्धारमैया के सबसे करीबी लोगों में से थे। वे सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक के साथ मिल कर पिछड़ा, दलित व अल्पसंख्यक के अहिंदा समीकरण को आगे बढ़ाते थे और खुल कर शिवकुमार का विरोध करते थे। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवकुमार ने ऐसा जादू किया कि वे उनके खेमे में आ गए। इससे सिद्धारमैया नाराज हुए। कांग्रेस के अंदरूनी समीकरण में उनके पाला बदलने के दो महीने में उनके यहां ईडी का छापा पड़ गया। अब वे कह रहे हैं कि कांग्रेस के ही कुछ लोगों ने उनके यहां कार्रवाई कराई है और वे उन लोगों को जानते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को उन लोगों के बारे में बताया है। ईडी ने कांग्रेस को केरलम में अलग तरह से मुश्किल में डाला है। उसने कांग्रेस सरकार से कहा है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन, उनकी बेटी और दामाद के खिलाफ एसीबी से भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराए। कांग्रेस के लिए यह सांप छुछुंदर वाली गति है। उसका कोई भी कदम केरलम में भाजपा को फायदा पहुंचाने वाला होगा।
