मोदी और शी ने की दोपक्षीय वार्ता

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नई दिल्ली। ब्रिक्स सम्मेलन से इतर जिस मुलाकात और बात की सबसे ज्यादा चर्चा थी वह शाम सात बजे के करीब संपन्न हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भारत मंडपम में दोपक्षीय वार्ता की। करीब 50 मिनट चली इस मीटिंग में मोदी और जिनपिंग ने इस बात पर सहमति जताई कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और संबंध लंबे चलने चाहिए। दोनों नेताओं के बीच सीमा विवाद, व्यापार और निवेश पर चर्चा हुई।

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि दोनों देशों के संबंध ‘तीन पारस्परिक सिद्धांतों, सम्मान, संवेदनशीलता और हित’ से जुड़े होने चाहिए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत में स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आपकी सकारात्मक टिप्पणियों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से प्राप्त समर्थन और सहयोग के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। अब हमारे पास दोपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है’।

इस दोपक्षीय बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि भारत और चीन एक दूसरे की खूबियों से सीख कर साझा विकास की ओर बढ़ सकते हैं। राष्ट्रपति शी जिनफिंग ने यह भी बताया कि वे प्रधानमंत्री मोदी से 21 बार मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत आने का निमंत्रण उनके जन्मदिन 15 जून को मिला था। जिनपिंग ने कहा, ‘हम पीएम मोदी से 21 बार मिल चुके हैं और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर पहुंचे हैं, जिन्होंने चीन व भारत संबंधों को निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर किया है’।

राष्ट्रपति जिनपिंग ने आगे कहा, ‘चीन ने हमेशा भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा और विकसित किया है। हालांकि, हमारे दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां भिन्न हैं, फिर भी हम एक दूसरे की खूबियों से पूर्णतः सीख सकते हैं, एक दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, साथ मिलकर सफलता प्राप्त कर सकते हैं और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं’।

गौरतलब है कि चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग सात साल बाद शनिवार को भारत आए। जून 2020 में गलवान में हुई झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। जिनपिंग इससे पहले 11 अक्टूबर 2019 को भारत आए थे। 15 जून 2020 को गलवान झड़प हुई थी। इसके बाद भारत-चीन रिश्तों में तनाव बढ़ा, लेकिन कारोबार नहीं रुका। 2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। इस तरह गलवान झड़प के बाद चीन से आयात दोगुना हो गया है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली और सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में गंभीर पहल हुई है।


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