सीबीआई अफसर को सजा, जरूरी फैसला!

सीबीआई खुद को देश की प्रमुख जांच एजेंसी बताती है, जो भ्रष्टाचार और दुरुपयोग के खिलाफ लड़ती है। लेकिन जब उसके अपने वरिष्ठ अधिकारी ही ‘मालाफाइड रेड’, मारपीट और साजिश में शामिल हों, तो सवाल उठता है कि तब सीबीआई अपने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करती? दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में… Continue reading सीबीआई अफसर को सजा, जरूरी फैसला!

चेतना संचार और पतितपावनी गंगा

वैशाख शुक्ल सप्तमी, जिसे गंगा सप्तमी या जह्नु सप्तमी कहा जाता है, गंगा के दूसरे जन्म का प्रतीक पर्व है। कथा के अनुसार जब गंगा ने ऋषि जह्नु के यज्ञ स्थल को जलमग्न कर दिया, तो उन्होंने क्रोध में गंगा को पी लिया और बाद में अपने कान से उन्हें पुनः बाहर निकाला। यह प्रसंग… Continue reading चेतना संचार और पतितपावनी गंगा

एक चेहरा, अंतहीन प्रचार अंतहीन

अभी मोदी ही सबसे बड़ी कहानी हैं। लेकिन कहानियां बदलती हैं। और इस कहानी के पाठक अब देख रहे हैं कि यह आगे बढ़ना बंद कर चुकी है। भारत का अगला अध्याय अतीत को दोहराकर नहीं बनेगा। वह तब बनेगा जब कोई दोनों भ्रमों को तोड़ने का साहस करेगा—पहचान की राजनीति और असफल आर्थिक ढांचे… Continue reading एक चेहरा, अंतहीन प्रचार अंतहीन

सांस्कृतिक पुनर्जागरण के युगपुरुष आद्य शंकराचार्य

भारतीय वाङ्मय के आकाश में आद्य गुरु शंकराचार्य एक ऐसे उज्ज्वल सूर्य हैं, जिन्होंने अल्पायु में ही अपनी प्रतिभा से चारों दिशाओं को आलोकित किया। वैशाख शुक्ल चतुर्थी को उनका जन्म केवल एक घटना नहीं, बल्कि क्षीण होते सनातन धर्म के पुनरुत्थान का एक दिव्य अभियान था। शंकराचार्य का आध्यात्मिक दर्शन “ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो… Continue reading सांस्कृतिक पुनर्जागरण के युगपुरुष आद्य शंकराचार्य

केंद्रीय सतर्कता आयोग से क्या बना?

सीबीआई द्वारा जांचे गए 7,072 भ्रष्टाचार के मामले अदालतों में लंबित हैं, जिनमें से 379 मामले 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं। 2,660 मामले 10 वर्ष से ज्यादा लंबित हैं। यह आंकड़ा न केवल न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति को दर्शाता है, बल्कि सीवीसी की निगरानी वाली पूरी व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर करता… Continue reading केंद्रीय सतर्कता आयोग से क्या बना?

हिमशिखरों का आह्वान और सनातन चेतना

बदरीनाथ (नारायण) और केदारनाथ (रुद्र) का संबंध परस्पर पूरक है। स्कंदपुराण के केदारखंड के अनुसार शिव और विष्णु के ये धाम एक ही ब्रह्म के दो स्वरूपों की अभिव्यक्ति हैं। मोक्ष धाम के रूप में प्रतिष्ठित बद‍रीनाथ में आदि गुरु शंकराचार्य ने लगभग 1200 वर्ष पूर्व मूर्ति की पुनर्स्थापना कर दक्षिण और उत्तर की सांस्कृतिक… Continue reading हिमशिखरों का आह्वान और सनातन चेतना

असहज सच से मुंह मोड़ने की ‘सेकुलर’ कीमत

अब तक वामपंथी और स्वयंभू सेकुलरवादी भारत में मजहबी कट्टरता और आतंकवाद को मुस्लिम समाज में मौजूद ‘अशिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी’ का परिणाम बताकर या उसे केवल ‘मुल्ला-मौलवियों’ तक सीमित करके देखते रहे हैं। किंतु गत वर्ष दिल्ली में मुस्लिम डॉक्टरों द्वारा फिदायीन हमले और नासिक में पढ़े-लिखे ‘व्हाइट कॉलर’ कर्मचारियों पर लगे संगठित मतांतरण… Continue reading असहज सच से मुंह मोड़ने की ‘सेकुलर’ कीमत

नए युग के द्वार पर खड़ी है दुनिया

तेल और गैस की कीमतें विश्व बाजार से जुड़ी हुई हैं। अमेरिका में तेल और गैस का स्वामित्व निजी क्षेत्र की कंपनियों के पास है। अतः आपूर्ति घटने की स्थिति में उनका मुनाफा तो बढ़ेगा, लेकिन ऐसा आम अमेरिकी उपभोक्ता की कीमत पर होगा।  यही वो गंभीर स्थिति है, जिस वजह से ट्रंप ईरान युद्ध… Continue reading नए युग के द्वार पर खड़ी है दुनिया

बंगाल इस बार बदलाव के लिए तैयार

इसमें कोई संदेह नहीं है कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार के खिलाफ 15 साल की एंटी इन्कम्बैंसी है। इसे कम नहीं आंका जा सकता है। इन 15 वर्षों में आर्थिक व औद्योगिक गतिविधियां ठप्प हुई हैं। आर्थिक भ्रष्टाचार चरम पर है। केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और करोड़ों रुपए की जब्ती की तस्वीरों ने इस धारणा… Continue reading बंगाल इस बार बदलाव के लिए तैयार

बहेलिया-बिसात पर भग्नमनोरथी-ब्रह्मास्त्र

हमारा देश आजकल संविधान, क़ानून, नियम और स्थापित परंपराओं से नहीं, एक व्यक्ति के मन की बात और एक व्यक्ति के मस्तिष्क में कौंधने वाली तरंग के आधार पर चल रहा है। पिछले पौने बारह बरस में हम ने ऊलजुलूल फ़ैसलों की ऐसी अनगनित मिसालें देखी हैं, जिन का सिर-पैर न तो आज तक किसी… Continue reading बहेलिया-बिसात पर भग्नमनोरथी-ब्रह्मास्त्र

logo