असहज सच से मुंह मोड़ने की ‘सेकुलर’ कीमत

अब तक वामपंथी और स्वयंभू सेकुलरवादी भारत में मजहबी कट्टरता और आतंकवाद को मुस्लिम समाज में मौजूद ‘अशिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी’ का परिणाम बताकर या उसे केवल ‘मुल्ला-मौलवियों’ तक सीमित करके देखते रहे हैं। किंतु गत वर्ष दिल्ली में मुस्लिम डॉक्टरों द्वारा फिदायीन हमले और नासिक में पढ़े-लिखे ‘व्हाइट कॉलर’ कर्मचारियों पर लगे संगठित मतांतरण… Continue reading असहज सच से मुंह मोड़ने की ‘सेकुलर’ कीमत

नए युग के द्वार पर खड़ी है दुनिया

तेल और गैस की कीमतें विश्व बाजार से जुड़ी हुई हैं। अमेरिका में तेल और गैस का स्वामित्व निजी क्षेत्र की कंपनियों के पास है। अतः आपूर्ति घटने की स्थिति में उनका मुनाफा तो बढ़ेगा, लेकिन ऐसा आम अमेरिकी उपभोक्ता की कीमत पर होगा।  यही वो गंभीर स्थिति है, जिस वजह से ट्रंप ईरान युद्ध… Continue reading नए युग के द्वार पर खड़ी है दुनिया

बंगाल इस बार बदलाव के लिए तैयार

इसमें कोई संदेह नहीं है कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार के खिलाफ 15 साल की एंटी इन्कम्बैंसी है। इसे कम नहीं आंका जा सकता है। इन 15 वर्षों में आर्थिक व औद्योगिक गतिविधियां ठप्प हुई हैं। आर्थिक भ्रष्टाचार चरम पर है। केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और करोड़ों रुपए की जब्ती की तस्वीरों ने इस धारणा… Continue reading बंगाल इस बार बदलाव के लिए तैयार

बहेलिया-बिसात पर भग्नमनोरथी-ब्रह्मास्त्र

हमारा देश आजकल संविधान, क़ानून, नियम और स्थापित परंपराओं से नहीं, एक व्यक्ति के मन की बात और एक व्यक्ति के मस्तिष्क में कौंधने वाली तरंग के आधार पर चल रहा है। पिछले पौने बारह बरस में हम ने ऊलजुलूल फ़ैसलों की ऐसी अनगनित मिसालें देखी हैं, जिन का सिर-पैर न तो आज तक किसी… Continue reading बहेलिया-बिसात पर भग्नमनोरथी-ब्रह्मास्त्र

त्रिकालदर्शी ऋषिवर महर्षि पराशर

पराशर का जीवन एक सेतु है—आकाश और पृथ्वी के बीच, ज्ञान और कर्म के बीच, ऋषित्व और लोक के बीच। उन्होंने ज्ञान को गुफाओं से निकालकर खेतों, आकाश और समाज तक पहुँचाया। यही उनकी सबसे बड़ी महत्ता है। आज जब मनुष्य विज्ञान और अध्यात्म के बीच उलझा हुआ है, पराशर का मार्ग हमें संतुलन सिखाता… Continue reading त्रिकालदर्शी ऋषिवर महर्षि पराशर

सभ्यता ध्वंस की भाषा, लोकतंत्र की परीक्षा

भाषा ही यह तय करती है कि क्या सोचा जा सकता है और क्या किया जा सकता है, और जब भाषा से संकोच हटता है तो कल्पना भी सीमाएँ तोड़ देती है, और किसी देश या सभ्यता को मिटा देने की बात केवल बयान नहीं रहती, वह एक तरह की अनुमति बन जाती है।।। आज… Continue reading सभ्यता ध्वंस की भाषा, लोकतंत्र की परीक्षा

खिसियानी हिन्दू खम्भा नोचे!

हिन्दू नेता अपने ही हिन्दू बंधुओं (विरोधी दल) पर जितना शेर बनते हैं, उतना ही मुस्लिम या विदेशी दबंगों के सामने बाएं-दाएं करने लगते हैं। यह मौलाना मुहम्मद अली ने देखा था, और विन्स्टन चर्चिल ने भी। वही बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप ने भी देखा है। अधिकांश हिन्दू नेता मजबूत दुश्मन या सहयोगी से… Continue reading खिसियानी हिन्दू खम्भा नोचे!

पाकिस्तान का क्षण, भारत का आईना

पिछले एक दशक से नई दिल्ली ने खुद को एक उभरती शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसके वैश्विक संबंध रणनीतिक प्रभाव में बदलेंगे।..पर कूटनीति भाषणों, कहानियों की प्रतियोगिता नहीं है, वह प्रासंगिकता की परीक्षा है, और जब दुनिया को एक रास्ते की ज़रूरत थी, उसने उसी देश को चुना जो संदेश पहुँचा सकता… Continue reading पाकिस्तान का क्षण, भारत का आईना

नेपाल का युवा मंत्रिमंडल मिसाल बना!

नेपाल का कैबिनेट भारत, चीन सभी से युवा, अधिक समावेशी और योग्यता-आधारित है। भारत और चीन की तुलना में यहां भ्रष्टाचार-विरोधी ‘डिलीवरी बेस्ड गवर्नेंस‘ पर जोर है, जो पड़ोसियों में अक्सर कम देखा जाता है। इस कैबिनेट की सबसे बड़ी ताकत इसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि है। प्रधानमंत्री बालेन शाह स्वयं स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एम.टेक हैं। उनकी… Continue reading नेपाल का युवा मंत्रिमंडल मिसाल बना!

पुष्टिमार्ग के प्रणेता वल्लभाचार्य

वल्लभाचार्य का सबसे बड़ा धार्मिक कार्य पुष्टिमार्ग की स्थापना है। “पोषणं तदनुग्रहः” अर्थात भगवान की कृपा ही पोषण है। जहाँ अन्य मार्ग साधना, जप और तप पर जोर देते हैं, वहीं पुष्टिमार्ग पूरी तरह श्रीनाथ जी की कृपा पर आधारित है। उन्होंने पूजा के स्थान पर सेवा को प्रमुख बनाया। 13 अप्रैल वल्लभाचार्य जयंती पंद्रहवीं… Continue reading पुष्टिमार्ग के प्रणेता वल्लभाचार्य

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