अब तक वामपंथी और स्वयंभू सेकुलरवादी भारत में मजहबी कट्टरता और आतंकवाद को मुस्लिम समाज में मौजूद ‘अशिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी’ का परिणाम बताकर या उसे केवल ‘मुल्ला-मौलवियों’ तक सीमित करके देखते रहे हैं। किंतु गत वर्ष दिल्ली में मुस्लिम डॉक्टरों द्वारा फिदायीन हमले और नासिक में पढ़े-लिखे ‘व्हाइट कॉलर’ कर्मचारियों पर लगे संगठित मतांतरण… Continue reading असहज सच से मुंह मोड़ने की ‘सेकुलर’ कीमत
