इस युद्ध से ऊर्जा लॉकडाउन का डर!

युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि ऊर्जा पाइपलाइनों और आर्थिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी लड़ा जाता है। गौरतलब है कि शांति की अपील सभी पक्षों, अमेरिका, इजरायल, ईरान और मध्यस्थ देशों से होनी चाहिए। अन्यथा, दुनिया भर में ऊर्जा लॉकडाउन का साया काफ़ी देर तक मँडराता रहेगा। दुनिया नए संकट के कगार पर है।… Continue reading इस युद्ध से ऊर्जा लॉकडाउन का डर!

श्रीराम का मर्यादित जीवन

श्रीराम के जीवन का सबसे बड़ा आधार सत्य है। वाल्मीकि रामायण में उन्हें सत्यवादी और दृढव्रतः कहा गया है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने मानवीय सीमाओं अर्थात मर्यादाओं में रहकर वह सर्वोच्च आचरण प्रस्तुत किया, जो आज भी मानवता का पथ-प्रदर्शक है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण केवल एक महाकाव्य… Continue reading श्रीराम का मर्यादित जीवन

भारत से गुजरती जलडमरूमध्य रेखा!

उन्नति के सतही चित्र के नीचे एक शांत, पर अधिक निर्णायक वास्तविकता मौजूद है—भारत की समृद्धि कुछ बाहरी निर्भरताओं पर टिकी है, जिन्हें न तो व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है, न ही रणनीतिक रूप से सुरक्षित किया गया है। यह बात सबसे स्पष्ट रूप से फारस की खाड़ी के साथ उसके संबंध में… Continue reading भारत से गुजरती जलडमरूमध्य रेखा!

क्यों एचपीवी वैक्सीन के दुष्प्रभावों को छिपाया?

पुस्तक के दावे के अनुसार वैक्सीन के छुपे नुकसान सोशल मीडिया या एंटी-वैक्सीन ग्रुप्स में फैल सकते हैं, जिससे हिचकिचाहट बढ़ सकती है। खासकर 2010 के ट्रायल विवाद के बाद। लेकिन भारत में मुख्यधारा मीडिया और स्वास्थ्य विभाग इसे ‘मिथ’ बताते हुए प्रमोशन जारी रखते हैं। अगर अमरीका में हुए मुकदमे को केंद्र में रखा… Continue reading क्यों एचपीवी वैक्सीन के दुष्प्रभावों को छिपाया?

अमरीका-ईरान युद्ध से पूर्व सैनिक चिंतित

भारत को अपनी गलती सुधारनी चाहिए। तटस्थ रहकर शांति की बात करनी चाहिए। ईरान से संबंध वापसी सुधारने चाहिए। तेल आयात के वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए। भारत की विदेश नीति हमेशा “सभी के साथ, किसी के खिलाफ नहीं” रही है। मोदी सरकार को इस सिद्धांत पर लौटना चाहिए। क्योंकि अंत में भारत का हित सबसे… Continue reading अमरीका-ईरान युद्ध से पूर्व सैनिक चिंतित

भारतीय गुरुकुल परंपराः आदि से आधुनिकता तक का सफर

भारतीय सभ्यता में शिक्षा केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं, बल्कि संस्कार और आत्मबोध की एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही है। प्राचीन भारत में गुरुकुल (गुरु का घर) इसी सोच का केंद्र था, जहाँ ज्ञान देना कोई व्यापार नहीं, बल्कि एक पवित्र कार्य माना जाता था। उस समय गुरुकुल शिक्षा की एक ऐसी खास और… Continue reading भारतीय गुरुकुल परंपराः आदि से आधुनिकता तक का सफर

संविधान पवित्र या चुनाव की तारीख?

अगर ‘विचाराधीन श्रेणी’ के सभी मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच नहीं हो जाती है तो क्या चुनाव कराना उचित होगा? ऐसे जिन विचाराधीन मतदाताओं के नाम पूरक मतदाता सूची में नहीं शामिल किए जाते हैं उनका पक्ष सुने बगैर क्या मतदान कराना उचित होगा? ये गंभीर सवाल हैं। इस बात का कोई अर्थ नहीं है… Continue reading संविधान पवित्र या चुनाव की तारीख?

ईरान के निशाने पर अमेरिकी वर्चस्व का हर खंभा

लोगों की सोच में यह सवाल बना है कि अगर ईरान जैसी कमजोर शक्ति लड सकती है, तो चीन और रूस जैसी महाशक्तियों से मुकाबला करना अमेरिका के लिए कितना कठिन होगा? ऐसे सवालों और ऐसी धारणाओं का दुनिया को बदलने में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। इसीलिए इस युद्ध में जो हो रहा है, उसका… Continue reading ईरान के निशाने पर अमेरिकी वर्चस्व का हर खंभा

जंग ख़त्म, संघर्ष बाक़ी: ‘सूबेदार’

यह फ़िल्म युद्धभूमि से लौटे एक सैनिक की कहानी है, जो अपने ही समाज में मौजूद अन्याय, भ्रष्टाचार और हिंसा से जूझता है। इस अर्थ में ‘सूबेदार’ सिर्फ़ एक एक्शन-ड्रामा नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज के नैतिक संकट का सिनेमाई रूपक भी है। फ़िल्म का केंद्रीय पात्र सूबेदार अर्जुन मौर्य है, जिसकी भूमिका अनिल कपूर… Continue reading जंग ख़त्म, संघर्ष बाक़ी: ‘सूबेदार’

चाय से भी ज़्यादा गर्म केतलियों का युग

एक असम को छोड़ कर विधानसभा के इन चुनावों में कहीं और भाजपा के लिए कहीं भी मद्धम-सी भी लौ टिमटिमाती हुई अगर किसी को दिखाई दे रही हो तो मैं उस की परम आशावादिता को अभिनंदनीय मानता हूं।… इसलिए पांच राज्यों के मतदान तक भाजपा के चेहरे से टपकते नूर को देखते रहिए और… Continue reading चाय से भी ज़्यादा गर्म केतलियों का युग

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