शिक्षण संस्थाओं में अब भाईसाहबों का बोलबाला

अब भारत में एक भी बौद्धिक, साहित्यिक मंच, पत्रिका नहीं जो देश में भी जानी जाती हो। यह शिक्षा को दलबंदी के हवाले करने से हुआ। अंग्रेज शासक शिक्षा संस्थानों के लिए भारत या बाहर से भी केवल विद्वानों को ही खोज कर लाते थे। जबकि देसी शासक अकादमिक कुर्सियाँ भी प्रायः दलीय कारकूनों, मुंशियों,… Continue reading शिक्षण संस्थाओं में अब भाईसाहबों का बोलबाला

लड़ाकू विमान अपग्रेड का हाल कहीं पहल जैसा न हो

दावा है कि छठी पीढ़ी की ओर अपग्रेड से ‘एमका’ अमरीका के ‘नेक्स्ट जनरेशन एयर डोमिनेन्स’ (NGAD) या चीनी छठी पीढ़ी कार्यक्रमों से मुकाबला अवश्य कर सकेगा। लेकिन वहीं इस परियोजना में चुनौतियां भी हैं। जैसे कि इंजन विकास में देरी, फंडिंग की कमी और समयसीमा का पालन। इसलिए यदि ‘एमका’ को एक सफल परियोजना… Continue reading लड़ाकू विमान अपग्रेड का हाल कहीं पहल जैसा न हो

‘राष्ट्रवादी’ देसी शासकों ने शिक्षा को बनाया बाँझ

जो लोग मैकाले को कोसते और ‘इंडियन नॉलेज‘ का डंका पीटते हैं, वही दूसरी साँस में भारतीय इंजीनियर, डॉक्टर और टीचर ‘एक्सपोर्ट‘ करने की डींग भी हाँकते हैं। जबकि ऐसे भारतीय मैकाले-शिक्षा, यानी अंग्रेजों की देन हैं! इसी तरह, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम्‘ बोल कर फूलते हैं, वही अमेरिका और यूरोप को नीच बताते हैं। ऐसे… Continue reading ‘राष्ट्रवादी’ देसी शासकों ने शिक्षा को बनाया बाँझ

‘इंडियन नॉलेज सिस्टम’ का तोतारटंत तमाशा

निस्संदेह, भारतीय सभ्यता कभी महान थी। पर हजार सालों से भी अधिक समय से वह जिस हाल में गई और अभी जो है — उस में गर्व करने के लिए क्या है? उपनिषद, गीता, योगसूत्र, आदि आध्यात्मिक ज्ञान हैं, वह भी हजारों वर्ष पहले के। तक्षशिला या मौर्य साम्राज्य भी सदियों पहले की स्मृतियाँ है।… Continue reading ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम’ का तोतारटंत तमाशा

दुनिया बदल रही है पर क्या भारत तैयार?

दुनिया आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ शक्ति केवल सैन्य या आर्थिक आकार से तय नहीं होगी, बल्कि उन देशों से तय होगी जो सहयोग के ऐसे नेटवर्क बना सकें जिनमें दूसरे देश भरोसे के साथ शामिल होना चाहें।.. पर आज भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता दोनों पर ऐसे सवाल उठ… Continue reading दुनिया बदल रही है पर क्या भारत तैयार?

अमेरिका का झूठ भी थकता नहीं!

सोशल मीडिया पर @sankofa360 से एक पोस्ट काफ़ी वायरल हुई जिसमें लिखा है कि, “प्रिय दुनिया, क्या तुम अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा झूठ बोलने से थक नहीं गए हो? क्या तुम उस साम्राज्य से थक नहीं गए हो जो खून और मौत की तलाश में नहीं रुकता?… अमेरिका के फैसले गलत साबित होते गए… Continue reading अमेरिका का झूठ भी थकता नहीं!

जस्टीस उज्जल भुइयां के नाम खुला पत्र

भारत में अंतर-मजहबी विवाह न तो नए हैं, न ही अवैध। दो वयस्कों के प्रेम-संबंध में मजहब-जाति, बाधा नहीं बननी चाहिए। लेकिन यदि विवाह छल आधारित हो और उसका उद्देश्य केवल मतांतरण के लिए दबाव बनाना हो, तो वह स्वतंत्रता नहीं, बल्कि अपराध है। माननीय न्यायमूर्ति भुइयां जी, गत 21 फरवरी को हैदराबाद में एक… Continue reading जस्टीस उज्जल भुइयां के नाम खुला पत्र

इतना बेपर्द और बेशर्म क्यों हो गया है अमेरिका?

डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन की विदेश एवं युद्ध नीतियों का क्या मकसद है, अपने इस भाषण में मार्को रुबियो ने इसे दो-टूक या बेहिचक लहजे में दुनिया के सामने रखा।.. यह वह मार्ग है, जिस पर हम आपसे (यूरोप से) हमारे साथ जुड़ने का अनुरोध करते हैं। यह वह मार्ग है, जिस पर हम पहले भी… Continue reading इतना बेपर्द और बेशर्म क्यों हो गया है अमेरिका?

बंगाल में आर-पार की चुनावी लड़ाई

अब बिहार में भाजपा की सरकार बनने जा रही है। 20 साल का नीतीश कुमार का राज समाप्त हो रहा है। यह संयोग भी है कि ये दोनों राज्य किसी समय बंगाल का हिस्सा रहे थे। इनके बाद अब बंगाल की बारी है। भारतीय जनता पार्टी कुछ इसी अंदाज में चुनाव की तैयारी कर रही… Continue reading बंगाल में आर-पार की चुनावी लड़ाई

आदि शक्ति से आधुनिक नारी

संस्कृति के विकास के श्रेष्ठ काल वैदिक युग में महिलाओं की स्थिति अत्यंत सम्मानजनक थी। उस समय वैचारिक, पारिवारिक और धार्मिक स्वतंत्रता का वातावरण था और समाज में महिलाओं का सम्मान पुरुषों से कम नहीं था। शिक्षा और आत्मविकास के अवसर महिलाओं के लिए खुले थे। सामाजिक बंधन कठोर नहीं थे, इसलिए महिलाओं को भी… Continue reading आदि शक्ति से आधुनिक नारी

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