बंगाल चुनाव करवट बदल रहा है

एक मार्च से ही केंद्रीय बलों की तैनाती हो रही है और 10 मार्च तक कुल 480 कंपनियों को पश्चिम बंगाल में तैनात किया जाएगा। इसका अर्थ है कि चुनाव की घोषणा होने और अधिसूचना जारी होने से पहले ही केंद्रीय बलों की पर्याप्त तैनाती हो जाएगी। जमीनी स्तर पर इसका कितना लाभ होगा यह… Continue reading बंगाल चुनाव करवट बदल रहा है

भारत का विमानन क्षेत्र कैसे बने सुरक्षित?

भारत का विमानन क्षेत्र दुनिया का सबसे तेज बढ़ने वाला क्षेत्र है, लेकिन अभी भी निजी चार्टर में सुरक्षा की लापरवाही घातक साबित हो रही है। सरकार, डीजीसीए और ऑपरेटर्स मिलकर सुधार करें तो ही यात्रियों का भरोसा बहाल हो सकेगा। हाल में निजी चार्टर विमानन कंपनियों से जुड़ी विमान दुर्घटनाओं ने पूरे देश को… Continue reading भारत का विमानन क्षेत्र कैसे बने सुरक्षित?

शिव में ही अंत और शिव में ही प्रारंभ

रंगभरी एकादशी के अगले दिन महादेव अपने वैरागी रूप में मणिकर्णिका महाश्मशान में भस्म की होली खेलते हैं। यह उनके गृहस्थ और औघड़, दोनों रूपों का संतुलन दिखाता है। लोक मान्यता है कि रंगभरी के उत्सव में देवता तो शामिल हुए, पर भूत-प्रेत और अघोरी छूट गए थे। इसलिए महादेव अगले दिन मसान में उनके… Continue reading शिव में ही अंत और शिव में ही प्रारंभ

टैरिफ और ताकत का अनुशासन

भारत इस आर्थिक कूटनीति की वापसी से परखा गया। आलोचकों का तर्क है कि नई दिल्ली ने दबाव में जल्दी कदम उठाया — कृषि और नीतिगत स्वायत्तता के कुछ मोर्चों पर रियायत दी, जबकि धैर्य बेहतर शर्तें दिला सकता था। जिन देशों ने अधिक घर्षण सहा, उनकी तुलना में भारत का रुख सावधान दिखा। आरोप… Continue reading टैरिफ और ताकत का अनुशासन

एप्स्टीन फाइल का क़हर

फ़ाइलें 30 जनवरी 2026 को सामने इसलिए आई क्योंकि अमरीका के सांसदों ने न्यायिक विभाग पर भारी दबाव बनाया। अभी भी बहुत सारी सूचनाओं को ये विभाग दबा कर बैठा है। अमरीका के जो भी सांसद बारी-बारी से जाकर न्यायिक विभाग में इन फाइलों का निरीक्षण कर रहे हैं वे सदमें में आ जाते हैं।… Continue reading एप्स्टीन फाइल का क़हर

विश्व शांति के लिए जरूरी है आपसी समझ

महोपनिषद का प्रसिद्ध वाक्य—“अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्”—दुनिया को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है। ईशोपनिषद कहता है कि जो सबमें स्वयं को और स्वयं में सबको देखता है, वह किसी से द्वेष नहीं करता। 23 फरवरी- विश्व शांति व आपसी समझ दिवस पॉल हैरिस ने 1905 में रोटरी… Continue reading विश्व शांति के लिए जरूरी है आपसी समझ

बांग्लादेश हो या नेपालः सामने वही सवाल

बांग्लादेश में विद्रोह का जो परिणाम हुआ है, उससे अलग सूरत नेपाल में नहीं होगी, जहां अगले पांच मार्च को आम चुनाव होना है। क्या बिना ऐसी संगठित पार्टी की मौजूदगी के- जिसके पास स्पष्ट विचारधारा और सुपरिभाषित संगठन हो- कोई ऐसा परिवर्तन हो सकता है, जिससे मूलभूत ढांचा बदले और आम जन के जीवन… Continue reading बांग्लादेश हो या नेपालः सामने वही सवाल

ट्रंप और राहुल एक जैसे! भारत के उदय से असहज

राहुल कांग्रेस की उस व्यवस्था से आते हैं, जिसमें भारतीय परंपरा-स्वाभिमान उत्सव का नहीं, बल्कि तथाकथित पिछड़ेपन, उत्पीड़न और महिला-विरोध का प्रतीक माना जाता है। दशकों तक भारतीय संस्कृति के प्रति हीन-भावना रखने वालों को मतदाता लगातार खारिज कर रहे है। समय कई बार ऐसी चौंकाने वाली समानताएं हमारे सामने रख देता है, जो राजनीति-जीवन… Continue reading ट्रंप और राहुल एक जैसे! भारत के उदय से असहज

भोजपुरी की आवाज आखिर तक अनसुनी रहेगी?

भोजपुरी केवल एक बोली नहीं, बल्कि गंगा-सरयू-गंडक के दोआब से लेकर समुद्र पार मॉरीशस, सूरीनाम, फ़िज़ी, त्रिनिदाद तक फैली एक विश्वव्यापी सांस्कृतिक भाषा है। इसे बोलने वालों की संख्या लगभग 20 करोड़ है। यही वह भाषा है जो प्रवासी भारतीयों के बीच पहचान, स्मृति और स्वाभिमान की मुख्य कड़ी बनी हुई है। 21 फरवरी को… Continue reading भोजपुरी की आवाज आखिर तक अनसुनी रहेगी?

‘ओ’ रोमियो’: माफ़िया, मोहब्बत और मिज़ाज का शेक्सपीरियन संगम

सिने-सोहबत फ़िल्म पत्रकार-लेखक हुसैन ज़ैदी की किताब ‘द माफ़िया क्वींस ऑफ़ मुंबई‘ से प्रेरित है, जिसका स्क्रीनप्ले ख़ुद विशाल भारद्वाज ने लिखा है। ज़ैदी की लेखनी जहां अपराध जगत की स्त्रियों की जटिल दुनिया को दस्तावेज़ी सटीकता के साथ खोलती है। आज के ‘सिने-सोहबत’ में विशाल भारद्वाज की फ़िल्म ‘ओ’ रोमियो’ पर विमर्श करते हैं।… Continue reading ‘ओ’ रोमियो’: माफ़िया, मोहब्बत और मिज़ाज का शेक्सपीरियन संगम

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