लेखक गुंजित चोपड़ा और डिग्गी सिसोदिया अपराध को सनसनी नहीं बनाते। वे उसे सामाजिक संरचना की उपज की तरह देखते हैं। कथा की संरचना बेहद संयमित है और हर एपिसोड एक नई परत हटाता है। सीज़न दो का सबसे बड़ा गुण यह है कि वह दर्शक को जज बनने नहीं देता। वह हमें परिस्थितियों के… Continue reading धुंध, दोष और दर्द की पड़ताल: ‘कोहरा 2’
