मुझे लगता है कि नितिन के अध्यक्षीय कार्यकाल की कामयाबी मूलतः इस पर निर्भर करेगी कि यह सब करते हुए वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ अपने संबंधों को कितना मजबूत बना कर रख पाते हैं। तोते के असली प्राण रायसीना पर्वत की मीनार में नहीं, अंततः नागपुर के गुंबद में बंद रहेंगे। 45 साल… Continue reading नितिन की नियति है ‘मोशा’ का ठप्पा-धारक होना
