भारत में अंतर-मजहबी विवाह न तो नए हैं, न ही अवैध। दो वयस्कों के प्रेम-संबंध में मजहब-जाति, बाधा नहीं बननी चाहिए। लेकिन यदि विवाह छल आधारित हो और उसका उद्देश्य केवल मतांतरण के लिए दबाव बनाना हो, तो वह स्वतंत्रता नहीं, बल्कि अपराध है। माननीय न्यायमूर्ति भुइयां जी, गत 21 फरवरी को हैदराबाद में एक… Continue reading जस्टीस उज्जल भुइयां के नाम खुला पत्र
