अमेरिका से व्यापार करार में भारत हित क्या?

समझौते के मुताबिक अमेरिका बादाम, सोयाबीन तेल, कपास और डेयरी निर्यात बढ़ाएगा। डेयरी में, वर्तमान 60% टैरिफ कम होने से कीमतें 15% गिर सकती हैं, जिससे किसानों को 1.03 लाख करोड़ का वार्षिक नुकसान हो सकता है। आयात 25 मिलियन टन बढ़ सकता है, 1-2 गाय वाले छोटे किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़… Continue reading अमेरिका से व्यापार करार में भारत हित क्या?

सौदे की ताक़त खोई, फिर भी कह रहे ‘जीत हमारी’ !

नई दिल्ली आज जिस बदलाव को “ऐतिहासिक रीसेट” बता रही है, उसका असली मतलब सीमित है। अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ़ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति दी है। यह राहत है, लेकिन बहुत छोटी। खासकर तब, जब 2019 से पहले भारत को शून्य शुल्क का लाभ मिलता था। इतना ही… Continue reading सौदे की ताक़त खोई, फिर भी कह रहे ‘जीत हमारी’ !

नरवणे, कमान और नेतृत्व का मौन से पलायन

अगस्त 2020 में जब लद्दाख की सीमा के रेज़िन ला पर चीनी बख़्तरबंद दस्ते हिमालयी सीमा पर भारतीय ठिकानों की ओर बढ़ रहे थे तो वह बेहद नाज़ुक क्षण था। सेनाध्यक्ष नरवणे ने राजनीतिक नेतृत्व से स्पष्ट दिशा माँगी। पर उन्हे उत्तर मिला—“जो आपको ठीक लगे, वही करें”—वह मार्गदर्शन नहीं था। यह ज़िम्मेदारी से बचने… Continue reading नरवणे, कमान और नेतृत्व का मौन से पलायन

प्राचीन भारत में मानव बंधुत्व की अवधारणा

ऋग्वेद का यह मंत्र सहयोग, संवाद और एकजुट संकल्प के महत्व पर बल देता है। यह बताता है कि समाज की प्रगति तभी संभव है, जब लोग विभाजन के बजाय एक समुदाय के रूप में एक साथ सोचें और एक ही उद्देश्य के लिए कार्य करें। ठीक उसी प्रकार जैसे प्राचीन ऋषि और देवता मिलकर… Continue reading प्राचीन भारत में मानव बंधुत्व की अवधारणा

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कैसे प्रभावी बने?

समझौता वैश्विक अनिश्चितताओं, जैसे कि अमेरिकी टैरिफ और चीन से व्यापार विचलन के बीच, भारत को रणनीतिक लाभ देगा। अनुमान है कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को 41-65 प्रतिशत बढ़ाएगा और जीडीपी में 0.12-0.13 प्रतिशत की वृद्धि करेगा।  यह चीन से व्यापार विचलन (5-9 प्रतिशत) को बढ़ावा देगा, जो यूरोपीय संघ की डी-रिस्किंग और भारत… Continue reading ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कैसे प्रभावी बने?

अब ‘विश्व व्यवस्था’नहीं, शक्ति का खेल

यदि यूरोप का अतीत कलंकित है, तो अमेरिका का इतिहास रणनीतिक भूलों से भरा है। उसने ही साम्राज्यवादी चीन के विश्व उदय का रास्ता खोला था। वर्ष 1999 में व्यापार समझौता और 2001 में ‘विश्व व्यापार संगठन’ में प्रवेश दिलाकर अमेरिका ने चीन को उत्पादन का वैश्विक केंद्र बना दिया। तब चीन की जीडीपी 1.2… Continue reading अब ‘विश्व व्यवस्था’नहीं, शक्ति का खेल

कांग्रेस चुनाव लड़ भी रही है या नहीं?

भारतीय जनता पार्टी की चुनाव तैयारियों के साथ कांग्रेस की तैयारियों की तुलना करें तो दिखेगा कि कांग्रेस मीलों पीछे है। यह भी कह सकते हैं कि कांग्रेस ने अभी तैयारी शुरू ही नहीं की है, जबकि वह तमिलनाडु को छोड़ कर हर चुनावी राज्य में विपक्ष में है। विपक्षी पार्टी के नेताओं के पास… Continue reading कांग्रेस चुनाव लड़ भी रही है या नहीं?

चमकता सोना और डूबता डॉलर

2026 के पहले चार हफ्तों में सोने की कीमत में 17 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ। सोने और चांदी के भाव में अभूतपूर्व उछाल असल में विश्व अर्थव्यवस्था में युगांतकारी परिवर्तन का सूचक है। यह कोई फौरी समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे इस समय हो रहा ढांचागत बदलाव है। इस बदलाव के बाद… Continue reading चमकता सोना और डूबता डॉलर

आत्मसंघर्ष का फ़साना: ‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’

‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ सिर्फ एक क्लासिक क्राइम-थ्रिलर नहीं है। यह एक बौद्धिक और नैतिक जांच का मंच भी है जो यह बताती है कि कानून, नैतिकता, संस्थान और कार्रवाई कैसे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यह उन कहानियों की श्रेणी में आती है जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं देतीं, बल्कि सोचने के लिए… Continue reading आत्मसंघर्ष का फ़साना: ‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’

सड़ांध में तब्दील हो रही आचरण संहिता

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने क्या किया? उन्होंने राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण की सिर्फ़ तीन पंक्तियां पढ़ीं और बाकी के 11 पैराग्राफ पढ़ने से इनकार करते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया। राज्यपालों के भाषण के वक़्त सदन के सदस्यों का बहिर्गमन तो देखा था, लेकिन इस बार हम ने राज्यपाल… Continue reading सड़ांध में तब्दील हो रही आचरण संहिता

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