श्रीराम आज भी क्यों प्रासंगिक?

श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व सर्वांगीण है। वे सफल राजनीतिज्ञ, कुशल कूटनीतिज्ञ, गहन विचारक और दार्शनिक के रूप में सदैव प्रतिष्ठित रहेंगे। इस बहुआयामी स्वरूप के पीछे उनकी दिव्य चेतना और शक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्रीराम का संपूर्ण जीवन मानवीय मर्यादाओं से संचालित है। वे हर परिस्थिति का सामना एक सामान्य मनुष्य की तरह करते हैं… Continue reading श्रीराम आज भी क्यों प्रासंगिक?

अमेरिका का स्वेज नहर क्षण

अब ऐसी ताकतों का उदय हो चुका है, जो अमेरिका को “नहीं” कह सकते हैं। वे उस इनकार पर कायम बने रह सकते हैं। जो ऐसा करने में सक्षम हैं, वे सभी एक ध्रुव हैं। ईरान ने खुद को एक ऐसा ध्रुव साबित किया है। उसने दिखाया है कि अपनी खास भौगोलिक स्थिति, सैन्य क्षमताओं… Continue reading अमेरिका का स्वेज नहर क्षण

न्यायपालिका संवैधानिक अधिकारों की संरक्षक

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की जटिलता बढ़ती जा रही है और विचाराधीन श्रेणी के 60 लाख मतदाताओं में से जिनके नाम कट रहे हैं उनकी सुनवाई के लिए बने अपीलीय ट्रिब्यूनल ने अभी तक अपना कामकाज आरंभ नहीं हुआ है। विचाराधीन श्रेणी के करीब 40 फीसदी यानी लगभग 24 लाख मतदाताओं के नाम कटने… Continue reading न्यायपालिका संवैधानिक अधिकारों की संरक्षक

चुप्पी की छटपटाहट: ‘बयान’

फ़िल्म का सबसे भयावह पहलू उसका ‘विलेन’ नहीं, बल्कि उसका पूरा ‘सिस्टम’ है, जिसमें पंथ, सत्ता और ‘खामोश हिंसा’ अपने अपने अनुपात में मौजूद हैं। पंथ नेता का किरदार जिसे चंद्रचूड़ सिंह ने बेहद संयमित और सधे तरीके से निभाया है, किसी पारंपरिक खलनायक की तरह नहीं है। वह चिल्लाता नहीं, हिंसक नहीं दिखता लेकिन… Continue reading चुप्पी की छटपटाहट: ‘बयान’

इस युद्ध से ऊर्जा लॉकडाउन का डर!

युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि ऊर्जा पाइपलाइनों और आर्थिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी लड़ा जाता है। गौरतलब है कि शांति की अपील सभी पक्षों, अमेरिका, इजरायल, ईरान और मध्यस्थ देशों से होनी चाहिए। अन्यथा, दुनिया भर में ऊर्जा लॉकडाउन का साया काफ़ी देर तक मँडराता रहेगा। दुनिया नए संकट के कगार पर है।… Continue reading इस युद्ध से ऊर्जा लॉकडाउन का डर!

श्रीराम का मर्यादित जीवन

श्रीराम के जीवन का सबसे बड़ा आधार सत्य है। वाल्मीकि रामायण में उन्हें सत्यवादी और दृढव्रतः कहा गया है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने मानवीय सीमाओं अर्थात मर्यादाओं में रहकर वह सर्वोच्च आचरण प्रस्तुत किया, जो आज भी मानवता का पथ-प्रदर्शक है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण केवल एक महाकाव्य… Continue reading श्रीराम का मर्यादित जीवन

भारत से गुजरती जलडमरूमध्य रेखा!

उन्नति के सतही चित्र के नीचे एक शांत, पर अधिक निर्णायक वास्तविकता मौजूद है—भारत की समृद्धि कुछ बाहरी निर्भरताओं पर टिकी है, जिन्हें न तो व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है, न ही रणनीतिक रूप से सुरक्षित किया गया है। यह बात सबसे स्पष्ट रूप से फारस की खाड़ी के साथ उसके संबंध में… Continue reading भारत से गुजरती जलडमरूमध्य रेखा!

क्यों एचपीवी वैक्सीन के दुष्प्रभावों को छिपाया?

पुस्तक के दावे के अनुसार वैक्सीन के छुपे नुकसान सोशल मीडिया या एंटी-वैक्सीन ग्रुप्स में फैल सकते हैं, जिससे हिचकिचाहट बढ़ सकती है। खासकर 2010 के ट्रायल विवाद के बाद। लेकिन भारत में मुख्यधारा मीडिया और स्वास्थ्य विभाग इसे ‘मिथ’ बताते हुए प्रमोशन जारी रखते हैं। अगर अमरीका में हुए मुकदमे को केंद्र में रखा… Continue reading क्यों एचपीवी वैक्सीन के दुष्प्रभावों को छिपाया?

अमरीका-ईरान युद्ध से पूर्व सैनिक चिंतित

भारत को अपनी गलती सुधारनी चाहिए। तटस्थ रहकर शांति की बात करनी चाहिए। ईरान से संबंध वापसी सुधारने चाहिए। तेल आयात के वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए। भारत की विदेश नीति हमेशा “सभी के साथ, किसी के खिलाफ नहीं” रही है। मोदी सरकार को इस सिद्धांत पर लौटना चाहिए। क्योंकि अंत में भारत का हित सबसे… Continue reading अमरीका-ईरान युद्ध से पूर्व सैनिक चिंतित

भारतीय गुरुकुल परंपराः आदि से आधुनिकता तक का सफर

भारतीय सभ्यता में शिक्षा केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं, बल्कि संस्कार और आत्मबोध की एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही है। प्राचीन भारत में गुरुकुल (गुरु का घर) इसी सोच का केंद्र था, जहाँ ज्ञान देना कोई व्यापार नहीं, बल्कि एक पवित्र कार्य माना जाता था। उस समय गुरुकुल शिक्षा की एक ऐसी खास और… Continue reading भारतीय गुरुकुल परंपराः आदि से आधुनिकता तक का सफर

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