बंगाल के नतीजों का चौतरफा असर होगा

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प्रधानमंत्री मोदी इस लगातार डायरेक्ट अमेरिका के सामने झुकते चले जा रहे हैं। यह देश के लिए एक बड़ा चिंता का विषय था लेकिन अब तो पाकिस्तान
पर से आतंकवादी ठप्पा हटाना … क्या पाकिस्तान के सीमा-पार आतंकवाद के इतिहास के बावजूद यह भारत का अचानक जानबूझकर नरम रूख अपनाना नहीं है?

आ गए एग्जिट पोल। पर  जब असली नतीजों पर ही लोगों को विश्वास नहीं रहा तो एग्जिट पोल पर क्या होगा? लेकिन बात लोगों के विश्वास होने न होने से आगे चली गई है। अब तो कहा जाए, दिखाया जाए वही सही! मान लो अच्छा है नहीं मानोगे तो क्या कर लोगे? अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप जो, इनके आदर्श हैं वे इनके खिलाफ और देश के खिलाफ क्या कह रहे हैं? वह यह सुनते नहीं मगर जो बात इन्हें सूट करती है जैसे ट्रंप का बंदूक लेकर ईरान को धमकाना, वह यह जल्दी पकड़ लेते हैं।
बहुत आश्चर्य नहीं करना जब प्रधानमंत्री मोदी इसी अंदाज में कोई धमकी देते नजर आएं! फिलहाल पाकिस्तान को नहीं दे सकते क्योंकि वह राष्ट्रपति ट्रंप का नया चहेता बना है। चीन को धमकाने का सवाल ही नहीं पर देश में ही किसी को धमका सकते हैं।

पोज अच्छा है। ट्रंप की राजनीति भी पोज और हेडलाइनों के लिए ही हुई हैं। बाकी तो कुछ किया नहीं। ट्रंप ने देश को नरककुंड बोल दिया तब भी चुप रहे। शायद वह धमकी याद आ जाती होगी कि मैं तुम्हारा राजनीतिक कैरियर खत्म कर सकता हूं। तो देश की जनता, भाजपा, संघ समझे या न समझे  अपना राजनीतिक कैरियर बचाना ज्यादा जरूरी है। वह देश को गालियां दे रहा है तो देने दो!

मगर मामला इन सब से बहुत आगे चला गया है। कहां यह बताने से पहले यह बता दें कि इसीलिए बंगाल जीतना बहुत जरूरी लग रहा है। कैसे भी अगर बंगाल के नतीजे अपने पक्ष में घोषित करवा लिए तो पार्टी संघ के अंदर जो विरोध शुरू हो गया वह सब दब जाएगा। फिर मैसेज चला जाएगा कि सत्ता चाहे जैसे लाएं यही ला के देते हैं। और बंगाल के नतीजे कहीं वही घोषित हो गए जो जनता ने चाहे हैं। मतदान किया है तो फिर सबको कमजोरियां याद आने लगेंगी। और यह भी कि उनकी वजह से देश की बेइज्जती हो रही है।

हां, अब वह बात देश की बेइज्जती हो रही है और मामला बहुत आगे तक चला गया है। वह क्या? वह यह कि चीन को तो खुद क्लीन चिट दी थी मगर इस समय खुद की स्थिति डांवाडोल है तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पाकिस्तान क्लीन चिट नहीं एक वह सर्टिफिकेट दिलवाया है जो उसकी लाख तारीफ करने के बावजूद ट्रंप नहीं दे पाए। रक्षामंत्री ने बिश्केक की एससीओ बैठक में कहा है कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या धार्मिक पहचान नहीं होती। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गलत नहीं कहा कि यह पाकिस्तान को “शर्मनाक क्लीन चिट” है। ऐसा प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका के प्रति “तुष्टिकरण” और चीन के प्रति “संतुलित समर्पण” की बदौलत है। तभी सवाल है कि क्या पाकिस्तान के सीमा-पार आतंकवाद के इतिहास के बावजूद यह भारत का अचानक जानबूझकर नरम रूख अपनाना नहीं है? हम सीमापार से संचालित कश्मीर के आतंकवाद पर चालीस सालों से लिख और बोल रहे हैं। और खुद अमेरिका जिसके बारे में यह कहा जा रहा है कि उसके कहने से भारत ने पाकिस्तान को यह सर्टिफिकेट दिया खुद उसकी आतंकवादी गतिविधियों पर कई बार सवाल उठा चुका है।

जबकि ध्यान रहे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का वह बयान कि पाकिस्तान आतंकवाद का केन्द्र है। एपिसेंटर आफ टेरिरिज्म। लेकिन आज ट्रंप का पाकिस्तान से ज्यादा चहेता कोई नहीं है। वहां उस आर्मी चीफ आसिम मुनीर की भी वे रोज तारीफ करते हैं जो सीधे सीधे पिछले साल पहलगाम के आतंकवादी हमले से पहले बयान देने के जिम्मेदार थे। लेकिन ईरान के साथ समझौते में ट्रंप पाकिस्तान का बड़ा रोल देख ऱहे हैं इसलिए उसकी तारीफ न केवल खुद कर रहे हैं बल्कि भारत से भी करवा रहे हैं जो पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों का सबसे बड़ा शिकार है।

प्रधानमंत्री मोदी इस तरह लगातार डायरेक्ट अमेरिका के सामने झुकते चले जा रहे हैं वह देश के लिए एक बड़ा चिंता का विषय था लेकिन अब तो पाकिस्तान के साथ खड़े होना उस पर से आतंकवादी ठप्पा हटाना जिसे हम कह रहे हैं परोक्ष मदद मगर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस तो उसे डायरेक्ट पाकिस्तान को समर्थन ही कह रही है, करके मोदी सरकार ने चिंता से भी आगे जाकर देश पर आतंकवादी का समर्थन करने का एक दाग ही लगवा लिया है।

क्या यह सब जनता को समझ में नहीं आ रहा?  माना कि गोदी मीडिया इन सब को छुपाकर मोदी पर कोई आंच नहीं आने दे रहा। मगर अब गोदी मीडिया के अलावा और भी विकल्प हैं जहां से खबरें लोगों तक पहुंच जाती हैं। और जनता के मन में कुछ सवाल तो पैदा होने ही लगते हैं। और जनता के अलावा खुद उनकी पार्टी और संघ जो हमेशा से पकिस्तान को एक मुख्य मुद्दा बनाए रखती है। यहां तक कि खेलकूद और कला में भी उस पर इस बयान कि कोई देश आतंकवादी नहीं है का कोई असर नहीं होगा? वह यह नहीं सोचेगी कि उसकी आज तक कि सारी राजनीति जिस पाकिस्तान के इर्द गिर्द ही घूमती थी उसे अचानक उनके नेता ने यह सर्टिफिकेट क्यों दिलवा दिया?

क्या पाकिस्तान अमेरिका से इतनी ताकत पाकर और फिर भारत से भी मदद पाकर कश्मीर के मुद्दे पर और जोर नहीं डालेगा?  भारत के लिए कश्मीर सबसे बड़ा
मुद्दा क्या मोदी जी भूल गए? मोदी का बंगाल जीतना उनके लिए कितना फायदेमंद है यह अलग बात है मगर देश के लिए उससे क्या क्या खतरा है यह जानना बहुत जरूरी है।

बंगाल एक प्रदेश नहीं जैसे मोदी ने हरियाणा, महाराष्ट्र या बिहार जीत लिया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मय सबूतों के सबके सामने रख दिया कि इन प्रदेशों में कैसी गड़बड़ियां हुईं। वह सवाल लोगों के दिमाग तक गया मगर फिर भी यह एक घरेलू विषय ही रहा। क्योंकि उस समय तक मोदी सरकार पर ट्रंप प्रशासन ने शिकंजा नहीं कसा था। लेकिन डील के बाद और रूस से तेल खरीदने के लिए परमिशन देने की बात बाहर आने के बाद मोदी की छवि कमजोर पड़ने लगी। उसके बाद एपसिटन फाइल पर देश में चर्चा होनो लगी।  राहुल ने इस पर लोकसभा में चैलेंज कर कहा  कि मोदी ट्रंप के भारी दबाव में हैं। और वे इसका जवाब नहीं दे सकते। और यह सही साबित हुआ मोदी जवाब नहीं दे पाए। और इस बीच ट्रंप ने देश के खिलाफ ही एक सीधा हमला कर दिया। उसने भारत को नरक कुंड बता दिया।

यह देश के लिए खतरे की शुरूआत है। एक तरफ ट्रंप भारत के खिलाफ कुछ भी बोलते हैं, दूसरी तरफ उतना ही ज्यादा पाकिस्तान की तारीफ करते हैं। मोदी यदि बंगाल में हारे तो उसके बाद पार्टी और संघ में उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत आएगी। और उनके खिलाफ क्या देश में पूछा जाने लगेगा कि ट्रंप को जवाब क्यों नहीं देते हैं? उसके कहने से पाकिस्तान को सर्टिफिकेट क्यों दिलवाते हैं ?

सबसे बड़ी बात कि ट्रंप के यहा जनरल मुनीर की चली तो क्या इसी तरह कश्मीर पर भी अमेरिका की कोई बात को मानना होगा?  या जैसा ट्रंप ने पिछले साल सीज फायर की घोषणा करते हुए कहा था कि अब कश्मीर पर बात होगी तो क्या उस तीसरी पार्टी मध्यस्थता का विरोध कर पाएंगे ? अगर बंगाल में जनता ने जो चाहा और वोट दिया है उसके अनुरूप नतीजे यदि आए तो यह जनादेश भी प्रधानमंत्री को चीन या अमेरिका-पाकिस्तान की तरफ झुकने को रोकने वाला होगा। और यदि बंगाल में मोदी का परचम लहराया तो कई तरह के सवाल उठ खड़े होंगे वैश्विक चुनौतियों का असल मुकाबला नहीं हो पाएगा।


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