लोग अब मोदी को गलत मान रहे राहुल को नहीं

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एक साल पहले अहमदाबाद के कांग्रेस अधिवेशन में राहुल ने चेतावनी दी थी कि आर्थिक तूफान आने वाला है। और एक साल जब सरकार ने कुछ नहीं किया केवल बातें, राहुल को गलत साबित करना तो राहुल ने फिर कहा कि आर्थिक तूफान आ गया। और अब खुद प्रधानमंत्री मोदी को मानना पड़ा कि हां देश की आर्थिक स्थिति बहुत खतरनाक मोड़ पर आ गई है।

तीखी गर्मी के समय में राहुल गांधी ने राजनीति को और गर्म कर दिया है। जबकि बीजेपी समझ रही है कि उसे मुद्दा मिल गया। लेकिन जैसे पहले दिन से कांग्रेस राहुल के साथ मजबूती से खड़ी हुई है वैसी ही डटी रही तो बीजेपी के लिए मोदी का बचाव करना आसान नहीं होगा। गोदी मीडिया सहित जो लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमला कांग्रेस को नुकसान पहुंचाता है वह यह भूल गए वह समय मोदी से उम्मीदों का था। कांग्रेस एक लेमडक सरकार का नेतृत्व करते हुई सत्ता से बाहर हुई थी। तीन साल 2011 के आखिर से 2014 के मध्य तक यूपीए सरकार समय काटती दिख रही थी। लोग गलत फैसलों से उतने निराश नहीं होते जितने फैसला न करने से।

इसलिए 2014 के बाद नरेंद्र मोदी के पक्ष में यह बात कही जाती थी कि उनके खिलाफ बोली गई कोई भी बात उनके फायदे में जाती है। गुजरात माडल का एक ऐसा झूठा प्रचार कर रखा गया था कि लोग सोचते थे कि उसे बनाने वाला अगर केन्द्र में आएगा तो यहां भी कुछ काम होगा। मगर किसे मालूम था कि गुजरात भी एक प्रचार था और यहां भी वही प्रचार ही प्रचार होगा। अब उस प्रचार की हवा निकल गई है। खुद मोदी ने मान लिया है कि देश की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। और इसके लिए वह जनता से त्याग की मांग कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने अपने लोकसभा क्षेत्र रायबरेली में बुधवार को बोला क्या और किस कार्यक्रम में बोला यह जानना जरूरी है। राहुल बहुजन स्वाभिमान सभा में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम पहले स्वतंत्रता संग्राम लड़ने वाले वीरा पासी की याद में हो रहा था। यहां राहुल ने कहा कि हम पासी जी को याद करते हैं अंबेडकर जी को याद करते हैं मगर जो हमारे इन नायकों की विचारधारा थी जब उस पर आक्रमण होता है तो हम उसकी रक्षा नहीं कर पाते। नरेन्द्र मोदी कहते हैं विदेश मत जाओ, सोना मत खरीदो, इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदो। खाद नहीं है। खाद मत डालो  यह सब कहते हैं। और खुद विदेशों में चले जाते हैं। हजारों करोड़ रू. के जहाज में।

फिर राहुल ने मुख्य बात कही कि आप लोग चुप रहते हो। एक शब्द नहीं बोलते हो। प्रधानमंत्री वोट चोरी करते हैं, संविधान पर आक्रमण करते हैं। मनरेगा खत्म करते हैं, जाति जनगणना नहीं करवाते। और फिर राहुल ने दूसरी मुख्य बात कही कि पूरा देश अंबानी-अडानी को बेच दिया हैं। राहुल गांधी ने सारे सवाल उठाए। क्योंकि उन्होंने कहा कि बहुत मुश्किल समय आने वाला है। आर्थिक तूफान।  मनरेगा बंद वही पब्लिक सेक्टर का निजीकरण कर दिया। यूनिवर्सिटी में आरएसएस के वाइस चांसलर बिठा दिए। जिन्हें कुछ नहीं मालूम। साइंस, हिस्ट्री, ज्याग्राफी नहीं मालूम मगर यूनिवर्सिटी चला रहे हैं।

यह सारा बैकग्राउन्ड बताना इसलिए जरूरी है कि आज सारा मीडिया गद्दार गद्दार शब्द को लेकर तो शोर मचा रहा है मगर राहुल ने अपने पूरे भाषण में देश की चिंताजनक स्थिति को किस तरह सामने रखा वह नहीं बता रहा। गद्दार तो राहुल ने बिल्कुल लास्ट में कहा। जब वास्तव में परेशान जनता में से आवाजें आने लगीं कि क्या करें?

राहुल ने धन्यवाद भी कह दिया था। मीडिया के हमारे बहुत सारे साथी जिन्होंने राहुल को बहुत कवर किया है जानते है कि राहुल का भाषण कहां खत्म होने वाला है। और अधिकांश समय उनके धन्यवाद के साथ कि आप दूर दूर से आए हैं यह कहते ही पत्रकार साथी अपनी स्टोरी फाइल करने निकल पड़ते हैं। एक आम बात भी कही जाती है कि प्रियंका के भाषण में उनके मंच से उतरने तक रूकना पड़ता है पता नहीं उतरते उतरते क्या कह जाएं। मगर राहुल के बारे में सब भरोसे से कहते है कि चलो खत्म हो गया।

मगर यहां जनता का रिस्पांस देखकर धन्यवाद कहकर, बहुत गर्मी में आए हैं बोलकर आखिरी 30 सेंकड में आज तक कि अपनी सबसे बड़ी बात कह दी। उन्होंने कहा कि जब आप घर जाओ और इनके कार्यकर्ता आपके सामने आएं और नरेन्द्र मोदी, अमित शाह की बात करें तो उनसे कहो कि इन्होंने देश को बेचने का काम किया है। संविधान, अंबेडकर, गांधी पर आक्रमण किया है। मोदी और अमित शाह गद्दार हैं।

राहुल का पूरा भाषण कहीं नहीं बताया जा रहा। देश की स्थिति क्या है? जनता की हालत क्या है? मोदी जी लोगों को विदेश जाने से मना करके खुद पांच देशों की विदेश यात्रा पर चले जाते हैं। कुछ नहीं बताया जा रहा। केवल ‘गद्दार’ शब्द बताकर समझा जा रहा है कि इससे मोदी की छवि फिर से निखार ली जाएगी। लेकिन अब वह समय नहीं है कि राहुल के खिलाफ बोलने से जनता की समझ में आ जाए कि हां राहुल तो ऐसे ही बोलते रहते हैं। राहुल की कही हर बात अब सही निकल रही है। एक साल पहले अहमदाबाद के कांग्रेस अधिवेशन में राहुल ने चेतावनी दी थी कि आर्थिक तूफान आने वाला

है। और एक साल जब सरकार ने कुछ नहीं किया केवल बातें, राहुल को गलत साबित करना तो राहुल ने फिर कहा कि आर्थिक तूफान आ गया। और अब खुद प्रधानमंत्री मोदी को मानना पड़ा कि हां देश की आर्थिक स्थिति बहुत खतरनाक मोड़ पर आ गई है। लेकिन उसे दुरुस्त करने के बदले वे जनता से ही यह कह रहें हैं कि वह यह नहीं करे, वह नहीं करे। लगता है जैसे जनता ही दोषी है। और अगर उसके बाद कोई है तो वे राहुल। या शायद राहुल ही पहले नंबर पर है।

इसलिए जो बात देश की बिगड़ती अर्थ व्यवस्था पर होना चाहिए थी वह राहुल पर होने लगी। जैसे राहुल अगर यह बात नहीं कहते तो देश की आर्थिक व्यवस्था सुधर जाती। नेता प्रतिपक्ष अगर अपना काम करता है तो कहते हैं क्यों कर रहे हैं? क्या कर रहे हैं? इस गद्दार शब्द का उपयोग तो भाजपा के लोग कर रहे थे। साथ में गाली देते हुए गोली मारने की बात भी कर रहे थे। गांधी नेहरू के लिए सबसे ज्यादा कहते हैं।

राहुल ने तो उन्हीं का शब्द इस्तेमाल किया है। लेकिन वह जैसे गांव में लड़के लोग एक ही रट लगाए बैठे रहते हैं कि मुझसे क्यों कहा। मैं चाहे जो कह सकता हूं। मुझसे कोई कुछ नहीं कह सकता। पचास करोड़ की गर्ल फ्रेंड, कांग्रेस की विधवा, सुर्पणखा, जर्सी गाय कुछ भी।

पहले कांग्रेस के बहुत सारे नेता  समझते थे कि मोदी के बारे में कुछ कहने से उन्हें फायदा हो जाता है। मगर वे दिन खत्म हो गए है। अब कांग्रेस के नेता खुलकर मोदी के बारे में और राहुल के समर्थन में बोलने लगे हैं। बुधवार को जैसे ही राहुल का भाषण हुआ बीजेपी और गोदी मीडिया शुरू हो गए। लेकिन राहुल ने वहीं रायबरेली से दोबारा कहा कि मैं डरने वाला नहीं हूं। माफी नहीं मागूंगा।

और यहां दिल्ली से कांग्रेस के मीडिया डिपार्टमेंट के चैयरमेन पवन खेड़ा और सीडब्ल्यूसी के सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल ने राहुल के बयान को सही ठहराते हुए देश की बदहाल हो चुकी आर्थिक स्थिति को सही परिप्रेक्ष्य में लोगों के सामने रख दिया। कांग्रेस ने बताया और यह जरूरी है कि लोगों को मालूम पड़े कि वास्तव में देश की आर्थिक स्थिति क्या है। जैसा कांग्रेस ने एक बयान जारी करके कहा कि देश के पैरों तले जमीन खिसक रही है। और प्रधानमंत्री विदेश में टाफियां बांट रहे हैं!


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