एक प्रधानमंत्री ने कभी दावा किया था कि उसने सौ मिलियन गरीबों के बैंक खाते खुलवाए हैं। मैंने उन खातों की पासबुकें देखीं। पहली एंट्री-जीरो। अगली—कुछ नहीं। दस साल बाद भी वे पासबुकें नीतियों के कब्रिस्तान की निशानियां हैं। एक घर में मुझे चौथी कक्षा का बच्चा मिला। वह एक अंकों का जोड़ कर लेता… Continue reading वह गांव, जिसे समय ने भुला दिया
