भारत आत्मनिर्भरता की और है!

आज का भारत केवल बढ़ नहीं रहा, बल्कि शेष दुनिया को दिशा भी दे रहा है। यहां परंपरा और आधुनिकता का संगम है, जहां अर्थव्यवस्था केवल लाभ का नहीं, बल्कि लोककल्याण का माध्यम है। यह वही भारत है, जो अब दूसरों की शर्तों पर नहीं, बल्कि अपने हितों और स्वाभिमान के लिए दुनिया में पहचान… Continue reading भारत आत्मनिर्भरता की और है!

युवा विद्रोह में अब नया क्या है?

जेन-जी कोई नई परिघटना नहीं है। मगर पिछले एक सदी में जब कभी युवाओं ने ऐसे तेवर अपनाए, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंदर विकल्प होने का भरोसा उनमें बना रहता था। उदाहरण के तौर जेपी आंदोलन और असम आंदोलन से लेकर अन्ना आंदोलन तक पर गौर किया जा सकता है। मगर अब दुनिया के कई… Continue reading युवा विद्रोह में अब नया क्या है?

‘जंगल राज’ का नैरेटिव लौट आया

वास्तविकता है कि लालू प्रसाद के परिवार के साथ ‘जंगल राज’ की विरासत जुड़ी है। तेजस्वी यादव उसी विरासत के प्रतिनिधि हैं। कांग्रेस को पता था कि उनके नाम की घोषणा से लोगों की स्मृति में पुरानी सारी कहानियां फिर से जीवित हो जाएंगी। उन 15 वर्षों में कितने नरसंहार हुए, कितनी हत्याएं हुईं और… Continue reading ‘जंगल राज’ का नैरेटिव लौट आया

सर्व कल्याणकारी सूर्यदेव

पंचांग के अनुसार स्वच्छता, शुद्धता और पावनता की महत्ता से संबंधित चार दिवसीय कार्तिक छठ महोत्सव की शुरुआत 2025 में 25 अक्टूबर 2025 शनिवार को नहाय-खाय के साथ होगा। 26 अक्टूबर 2025 रविवार को विधि-विधान पूर्वक लोहंडा, खरना का आयोजन होगा। 27 अक्टूबर 2025 सोमवार को सूर्यास्तगामी भगवान सूर्य को संध्याकालीन अर्घ्य दिया जाएगा। डूबते… Continue reading सर्व कल्याणकारी सूर्यदेव

मनोरंजन की पाठशाला: ‘थामा’

कहानी बेहद दिलचस्प है और पूरी फ़िल्म में दर्शकों को हिलने तक नहीं देती है। इंटरवल के बाद तो ये फ़िल्म हिंदी सिनेमा में मौजूद मनोरंजन की सभी परिभाषाओं की पुनर्परिभाषित करती नज़र आती है। पूरी कहानी बता कर मैं अपने पाठकों को इस फ़िल्म का दर्शक बनने से रोकना नहीं चाहता। सिने-सोहबत आज के… Continue reading मनोरंजन की पाठशाला: ‘थामा’

विश्वामित्र: पुरुषार्थ से ब्राह्मणत्व सिद्ध किया

विश्वामित्र शब्द विश्व और मित्र से बना है जिसका अर्थ है- सबके साथ मैत्री अथवा प्रेम। लेकिन वसिष्ठ द्वारा कामधेनु न देने पर उनसे शत्रुता, युद्ध और फिर पराजय की घटना के कारण वे अपकीर्ति के शिकार भी हुए। ऋग्वेद में अनेक मंत्रों से सिद्ध होता है कि विश्वामित्र यज्ञों में पुरोहित का कार्य करते… Continue reading विश्वामित्र: पुरुषार्थ से ब्राह्मणत्व सिद्ध किया

न्यायिक प्रक्रिया में सामंजस्य आवश्यक

कानून की प्रक्रिया एक श्रृंखला के समान है, जिसमें हर कड़ी की अपनी अहमियत है। पुलिस, वकील, गवाह और मुवक्किल, अगर इनमें से किसी ने भी अपना कर्तव्य ईमानदारी से नहीं निभाया, तो न्याय का पहिया अटक सकता है। वकीलों को चाहिए कि वे केवल तकनीकी जीत के लिए नहीं, बल्कि सच्चे न्याय के लिए… Continue reading न्यायिक प्रक्रिया में सामंजस्य आवश्यक

कांग्रेस, राजद ने फिर फैलाया रायता!

मुख्य जिम्मेदारी कांग्रेस की थी। हमेशा राष्ट्रीय पार्टी की होती है। आरजेडी पर आरोप लगाना आसान है। मगर वह मेन प्लेयर है। उस पर उम्मीदवारों का ज्यादा दबाव था। कार्यकर्ता भी उसके पास ज्यादा हैं तो उम्मीदवार भी। और पिछले दो चुनावों से वह सबसे ज्यादा सीटें भी जीत रही है। पिछली बार 2020 में… Continue reading कांग्रेस, राजद ने फिर फैलाया रायता!

‘स्वदेशी’ कैसे हमारा जमीनी आंदोलन बने?

दीवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए गणेश-लक्ष्मी जी के विग्रह अब चीन से ही बन कर आते हैं। पटाखे और बिजली की लड़ियाँ भी अब चीन से ही आती हैं। इसी तरह राखियां, होली के रंग पिचकारी, जन्माष्टमी के लड्डू गोपाल व अन्य देवताओं के विग्रह भी वामपंथी चीन बना कर भेज रहा है, जो… Continue reading ‘स्वदेशी’ कैसे हमारा जमीनी आंदोलन बने?

भूदेवी, लक्ष्मी और लोकदेवी

दीपावली के अवसर पर पूजी जाने वाली लक्ष्मी भी मूलतः वेदकालीन देवी हैं, पर समय ने उनके स्वरूप को इतना बदल दिया कि उनका वैदिक रूप लगभग भुला दिया गया।….जब दीपावली की रात्रि में हम लक्ष्मी-पूजन करते हैं, तो वस्तुतः हम पृथ्वी को प्रणाम कर रहे होते हैं। मिट्टी के कुल्हड़ों में खील-लाई रखकर, दीप… Continue reading भूदेवी, लक्ष्मी और लोकदेवी

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