यह हमारी राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक यात्रा के संक्रमण काल का चरम है। इस दौर के उस पार एक मुकद्दस आसमान हमारा इंतज़ार कर रहा है। बस, आ पहुंचे हैं, दूर नहीं कुछ, चार क़दम अब चलना है। जो लोग नरेंद्र भाई मोदी के आजीवन सत्तासीन बने रहने में यक़ीन करते हैं, वे चंद महीनों बाद अपना माथा… Continue reading बस, आ पहुंचे हैं, चार क़दम अब चलना है
