बस, आ पहुंचे हैं, चार क़दम अब चलना है

यह हमारी राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक यात्रा के संक्रमण काल का चरम है। इस दौर के उस पार एक मुकद्दस आसमान हमारा इंतज़ार कर रहा है। बस, आ पहुंचे हैं, दूर नहीं कुछ, चार क़दम अब चलना है। जो लोग नरेंद्र भाई मोदी के आजीवन सत्तासीन बने रहने में यक़ीन करते हैं, वे चंद महीनों बाद अपना माथा… Continue reading बस, आ पहुंचे हैं, चार क़दम अब चलना है

चेते, सड़क सुरक्षा में लापरवाही छोड़े

नियम अवहेलना से दुर्घटनाएं बढ़ती हैं, सेवाओं की कमी से मौतें। समाधान? पहला, आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करें हर 10 किमी पर ट्रॉमा सेंटर हों। एकीकृत हेल्पलाइन ‘112’ को मजबूत बनाया जाए। दूसरा, शिक्षा, स्कूलों में ट्रैफिक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ। तीसरा, प्रवर्तन, पुलिस भर्ती बढ़ाएं, ई-मॉनिटरिंग लागू करें, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे। चौथा, बुनियादी… Continue reading चेते, सड़क सुरक्षा में लापरवाही छोड़े

ज्ञानवान होना ही मोक्ष की परम प्राप्ति

भारतीय परंपरा में जीवन में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास चारों ही आश्रम आवश्यक, महत्वपूर्ण और श्रमशील, कर्मप्रधान माने गये हैं। गृहस्थ सत्य है। सन्यास भी सत्य है। जीवन के दो पक्ष हैं। संसार के भोगों से पूर्वजन्म में ही निवृत्ति प्राप्त कर लेने वाला व्यक्ति इस जन्म में इस ओर रुचि नहीं रखता। लेकिन… Continue reading ज्ञानवान होना ही मोक्ष की परम प्राप्ति

कांग्रेस के संगठन साल में भी संगठन जीरो!

गजब की नकल कर रही है कांग्रेस बीजेपी की। बीजेपी ने जब नया आफिस बनाया तो उसने भी पहले पत्रकारों की एन्ट्री सीमित कर रखी थी। मगर जब कांग्रेस ने उसकी नकल की तो बीजेपी ने एन्ट्री खोल दी। मगर कांग्रेस पता नहीं क्या छुपा रही है, है क्या उसके पास छुपाने के लिए कि… Continue reading कांग्रेस के संगठन साल में भी संगठन जीरो!

संघ-परिवार: कुर्सी का बीमार

संघ परिवार के सर्वोपरि लोगों ने पुनः अपनी पुरानी बीमारी — पर-उपदेश कुशलता — का प्रदर्शन किया। साथ ही, किसी के साथ भी छल, यहां तक कि अपने सहयोगियों से भी। अपने ऊपर उपकार करने वालों से भी। किसलिए? केवल निजी स्वार्थ में, जिस में समाज या देश-हित का बहाना भी दिखाना कठिन है। अभी-अभी… Continue reading संघ-परिवार: कुर्सी का बीमार

टीवी बहस के नाम पर जो है वह

एक शोध के अनुसार, टीवी पर बहस में एंकरों द्वारा आक्रामक लहजे का इस्तेमाल 80 प्रतिशत से अधिक होता है, जो दर्शकों पर नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालता है। ये आंकड़े बताते हैं कि बहसें अब सूचना का स्रोत नहीं, बल्कि प्रचार का हथियार बन चुकी हैं। … भारत की टीवी बहसें लोकतंत्र का मजाक बन… Continue reading टीवी बहस के नाम पर जो है वह

राष्‍ट्रीय प्रतीकों का सम्‍मान आवश्यक

राष्ट्र प्रतीक देश के इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े होते हैं, जो अतीत से वर्तमान तक उनके रहस्यों, उनकी गहराइयों को दर्शाते हैं।अशोक चिह्न भारत का राजकीय प्रतीक है। यह भारत के प्राचीन गौरवमयी इतिहास से जुड़ा हुआ है। इसको सारनाथ में प्राप्त राष्ट्रीय स्तंभ अर्थात अशोक स्तंभ (लाट) से लिया गया… Continue reading राष्‍ट्रीय प्रतीकों का सम्‍मान आवश्यक

‘राष्ट्रीय प्रतीक’ का कश्मीर में विरोध

सवाल है कि भारत के राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ को हजरतबल दरगाह की शिलापट्ट पर वांछित सम्मान क्यों नहीं मिला? इसकी असली वजह इस्लाम-पूर्व सांस्कृतिक विरोध में निहित है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश इसी मानसिकता से उपजे बिना जड़ों के वे देश हैं जहां के लोग मौलिक सनातन जड़ों से कटकर स्वयं को अरब और… Continue reading ‘राष्ट्रीय प्रतीक’ का कश्मीर में विरोध

नेपाल में जनता का संघर्ष बार-बार

नेपाल बार-बार दिखाता है कि सत्ता और जनता का रिश्ता संविधान से नहीं, सड़कों पर गिरते लहू, आंसुओं और टूटती आवाज़ों से मापा जाता है। तराई से पहाड़ तक पथराव हुआ, गोलियां चलीं और लाठियां टूटीं। यह विरोध केवल आज का नहीं है; यह उन असंतोषों की कड़ी है, जो कभी मधेश आंदोलन, कभी जातीय… Continue reading नेपाल में जनता का संघर्ष बार-बार

वक्त राजनीति की नई परिकल्पना का

अक्सर देखा गया है कि समाज में नई उम्मीदें जन्म लेती हैं। ऐसी बहसें यह भरोसा बंधाती हैं कि मानव प्रयास से एक अलग, नए किस्म की दुनिया का निर्माण संभव है। जबकि ऐसे प्रयासों के अभाव में लोग हताशा का शिकार होते हैं, जैसा श्रीलंका, नेपाल, या बांग्लादेश में हुआ है। अनुभव यह है… Continue reading वक्त राजनीति की नई परिकल्पना का

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