‘एक दीवाने की दीवानियत’ — टॉक्सिक जूनून

‘एक दीवाने की दीवानियत’ पर सबसे बड़ा प्रश्न इसका ‘संदेश’ है। क्या यह फिल्म प्यार की ताकत दिखाती है या प्यार के नाम पर नियंत्रण की संस्कृति को बढ़ावा देती है? विक्रम का किरदार अपने प्रेम को इतनी तीव्रता से जीता है कि वह दूसरे की स्वतंत्रता का अतिक्रमण कर देता है। यह वही समस्या… Continue reading ‘एक दीवाने की दीवानियत’ — टॉक्सिक जूनून

रो-को की सिडनी साझेदारी

भारत के लिए सत्ताईस हजार से ज्यादा रन बनाने वाले विराट कोहली का आक्रामकता से निकल कर संतोष में खेलना भी सभी देख रहे हैं। अपन ने भी खेल के जीवन से ही जीवन का खेल भी समझा है। इसलिए दो शून्य के बाद सिडनी में एक रन बनाने का जो संतोष कोहली को मिला,… Continue reading रो-को की सिडनी साझेदारी

बिहार के अंतःप्रवाह में तेजस्वी की उलटबांसी

अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं, कुल्हाड़ी पर ही अपना पैर मार लेने की इन तमाम महागठबंधनीय-कोशिशों के बावजूद मैं अपने सपनों की दुनिया इस उम्मीद के भरोसे क़ायम रखना चाहता हूं कि राहुल-तेजस्वी की संयुक्त जनसभाओं के बाद महागठबंधन के प्रति मतदाताओं के भाव की अंतर्धारा और दृढ़ होती जाएगी और वह ‘मोशा’-एनडीए की डोली… Continue reading बिहार के अंतःप्रवाह में तेजस्वी की उलटबांसी

हार न मानने वाली की एक प्रेरक कहानी!

ऐसी कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि पुलिस की वर्दी केवल कठोरता का प्रतीक नहीं, बल्कि भीतर छिपी संवेदनशीलता और शक्ति का भी प्रतिनिधित्व करती है। जब एक गर्भवती महिला अधिकारी वेटलिफ्टिंग में मेडल जीतती है, तो यह केवल एक खेलीय सफलता नहीं, बल्कि नारी सम्मान और मानव आत्मबल की पराकाष्ठा है। समाज को इस… Continue reading हार न मानने वाली की एक प्रेरक कहानी!

पटेल ने बनवाया था सोमनाथ मंदिर

जवाहरलाल के विरोध के बावजूद नवम्बर 1947 के मध्य में सरदार पटेल ने अपने प्रभास पाटन के दौरे के समय मंदिर का दर्शन किया। और एक सार्वजनिक सभा में घोषणा की कि नए साल के इस शुभ अवसर पर हमने फैसला किया है कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण करना चाहिए। सौराष्ट्र के लोगों को अपना सर्वश्रेष्ठ… Continue reading पटेल ने बनवाया था सोमनाथ मंदिर

बिहार में वादों की विश्वसनीयता पर वोट

तेजस्वी प्रण में बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी को एड्रेस किया गया है। हर घर में एक सरकारी नौकरी। बहुत बड़ा वादा है।… बिहार बेरोजगारी में भी देश में अव्वल है। प्रति व्यक्ति आय भी सबसे कम है और सबसे ज्यादा पलायन भी यहीं से होता है। इसलिए तेजस्वी का नौकरी का हर घर… Continue reading बिहार में वादों की विश्वसनीयता पर वोट

आर्थिक चाल बदली है तो नीति भी बदले!

भारत में अब खपत-आधारित विकास मॉडल उभर रहा है। पहले निवेश और बचत पर बल था; अब उपभोग और ऋण पर आधारित वृद्धि हो रही है।… उपभोक्ता कर्ज का फैलाव अब नई आर्थिक ताकत का संकेत बन चुका है। गांवों में भी अब डिजिटल लोन सहजता से मिल रहे हैं। पहले जहां साहूकार ऊंचे ब्याज… Continue reading आर्थिक चाल बदली है तो नीति भी बदले!

दत्तात्रेय भक्त सहस्त्रार्जुन

नर्मदा नदी के तट पर अवस्थित अपनी राजधानी माहिष्मति में उन्होंने लंकाधिपति रावण के अतिरिक्त नागों के राजा कार्कोटक नाग को भी हराकर बंदी बना रखा था। एक हज़ार हाथों की शक्ति होने की वरदान के कारण सहस्त्रार्जुन नाम से विख्यात माहिष्मती नरेश के पास एक हजार अक्षौहिणी सेनाएं भी थी। लेकिन परशुराम से उनकी… Continue reading दत्तात्रेय भक्त सहस्त्रार्जुन

बिहार: नया मोड़ या पुरानी राह?

बिहार के चुनाव में तीन पीढ़ियाँ और तीन दृष्टिकोण आमने-सामने हैं। नीतीश कुमार, जिनकी राजनीति स्थिरता और अनुभवी शासन का प्रतीक है। तेजस्वी यादव, जो परिवर्तन और युवा आकांक्षाओं के वाहक हैं। प्रशांत किशोर, जो मौजूदा राजनीति को बदलने की चुनौती दे रहे हैं। यह चुनाव यह तय करेगा कि बिहार पुरानी राजनीति की सीमाओं… Continue reading बिहार: नया मोड़ या पुरानी राह?

स्वच्छ यमुना से छठ व्रतियों में उमंग

पूर्वांचली समुदाय की सांस्कृतिक समृद्धि का पर्व छठ पर्व अब दिल्ली का पर्व हो चुका है, अब यमुना का पर्व हो चुका है। हर टेंपो, ऑटो, कार, गाड़ी में चलते चलते आपको छठ पर्व के भोजपुरी, मैथिली लोक धुन के गीत सुनाई पड़ जाएंगे. अब तो दिल्ली के घरों से भी ठेकुआ की सुगंध निकलती… Continue reading स्वच्छ यमुना से छठ व्रतियों में उमंग

logo