गैर-बराबरी के मुकाबले में भी राहुल बिना डर के डटे हैं!

राहुल को मोदी की बनाई पूरी व्यवस्था से लड़ना पड़ रहा है। पूर्व में कोई उदाहरण?  फिलहाल विरथ रघुवीरा ही याद दिलाते हैं। शायद लोगों की समझ में आए। और अंत भी कि रावण रथी की कहानी खत्म हुई थी।…. लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं है। रास्ता थोड़ा लंबा हो सकता है। मगर राहुल गलत नहीं… Continue reading गैर-बराबरी के मुकाबले में भी राहुल बिना डर के डटे हैं!

कांग्रेस ‘वोट चोरी’ का मुद्दा नहीं छोड़ेगी

कांग्रेस पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों की समीक्षा नहीं की है। राष्ट्रीय जनता दल ने समीक्षा बैठक बुलाई तो उसमें समीक्षा कुछ नहीं हुई, तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुना गया। उधर कांग्रेस ने चुनाव नतीजों की समीक्षा की बजाय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की समीक्षा के… Continue reading कांग्रेस ‘वोट चोरी’ का मुद्दा नहीं छोड़ेगी

वैदिक शब्दों से ही हैं लौकिक नाम

भारत सहित वेद व संस्कृत से प्रभावित कई संस्कृतियों में वेद संहिताओं से ही नाम रखने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। वेदों के अध्ययन- अध्यापन की वृहत परंपरा होने के कारण वैदिक शब्द, पद व अभिधान से परिचित जन उन शब्दों का अनुकरण कर नाम,पद अभिधान रखते थे, जो बहुत ही अर्थपूर्ण और उपयुक्त होता… Continue reading वैदिक शब्दों से ही हैं लौकिक नाम

क्यों नहीं रुकते आतंकी हमले?

आतंकवाद से निपटने के लिए बल प्रयोग ही अकेला उपाय न हो। क्या उपाय हो सकते हैं उनके लिए हमें शोधपरख अध्ययनों की जरूरत पड़ेगी। पिछले 40 साल के अपने सोच विचारदृष्टि अपनी कार्यपद्धति पर नजर डालें तो हमें हमेशा तदर्थ उपायों से ही काम चलाना पड़ा है। इसका उदाहरण कंधार विमान अपहरण के समय… Continue reading क्यों नहीं रुकते आतंकी हमले?

ममदानी की जीतः गहरा और दूरगामी है संदेश

ममदानी की जीत ने दिखाया है कि वामपंथी झुकाव लिए हुए लोकलुभावन वादों से वैसा जनमत जुटाया जा सकता है, जिसे नियंत्रित करना किसी एस्टैबलिशमेंट के वश में नहीं है। अब यह परिघटना अन्य अमेरिकी राज्यों में भी आगे बढ़ सकती है। उसका नतीजा आर्थिक मुद्दों पर नए ध्रुवीकरण के रूप में सामने आ सकता… Continue reading ममदानी की जीतः गहरा और दूरगामी है संदेश

आतंक पर निर्णायक जीत से दूर क्यों?

जिहाद की बौद्धिक जड़ों पर सभ्य समाज प्रायः चुप रहता है, जबकि जिहाद से निर्णायक संघर्ष तभी संभव है, जब उसके मूल विचारों पर सीधी बहस की जाए। क्या मौजूदा दौर में ऐसा संभव है?… कश्मीरी डॉक्टर उमर नबी, अनंतनाग अस्पताल में डॉक्टर आदिल अहमद राठर, फरीदाबाद के अल-फलाह अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर मुजम्मिल अहमद… Continue reading आतंक पर निर्णायक जीत से दूर क्यों?

बिहार में चला मोदी-नीतीश का जादू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित समारोह से पहले सोशल मीडिया में एक वाक्य में बिहार के परिणामों की व्याख्या करते हुए लिख दिया था कि बिहार के लोगों ने सुशासन को चुना है। इस वाक्य में समूचा बिहार चुनाव छिपा है। बिहार में आरंभ से ही इस बात का मुकाबला था कि… Continue reading बिहार में चला मोदी-नीतीश का जादू

सत्ता, स्त्री और संघर्ष का प्रखर रूप: ‘महारानी’

इस सीज़न की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यह रानी भारती को सिर्फ़ एक ‘महिला मुख्यमंत्री’ की तरह प्रस्तुत नहीं करता। यह उन्हें सत्ता के उस द्वंद्व में फेंकता है जहां नैतिकता, राजनीति और व्यक्तिगत अस्तित्व की लड़ाई एक-दूसरे से टकराती रहती है। सत्ता के मोह और जनसेवा के उद्देश्य के बीच का संघर्ष… Continue reading सत्ता, स्त्री और संघर्ष का प्रखर रूप: ‘महारानी’

और कितना गिरेंगे टीवी चैनल?

धर्मेंद्र की झूठी मौत की खबर ने एक बार फिर दिखाया कि आज का मीडिया अपनी जिम्मेदारी और नैतिकता को भूल चुका है। टीआरपी और लोकप्रियता के लिए खबरें छापना और सेलिब्रिटीज की निजता का उल्लंघन करना अब आम बात हो गई है। इससे न केवल सेलिब्रिटीज को नुकसान होता है, बल्कि आम जनता को… Continue reading और कितना गिरेंगे टीवी चैनल?

बीजेपी के माहौल के लिए एग्जिट पोल

17 एक्जिट पोल एनडीए को जिता रहे हैं। खासतौर से भाजपा की सीटें बढ़ा चढ़ाकर। भाजपा 101 सीटों पर चुनाव लड़ी है। और एक एक्जिट पोल उसे 95 सीटों पर जिता रहा है। स्ट्राइक रेट कितना हुआ?  95 ही हुआ ना! या 94  हो जाएगा! और वफादारी पूरी दिखाने के लिए महगठबंधन को केवल 32… Continue reading बीजेपी के माहौल के लिए एग्जिट पोल

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