कांग्रेस जा रही रसातल में

कांग्रेस को जोड़े रखने में नेहरू, गांधी परिवार और सत्ता ये दो फेविकोल रहे हैं। अब दोनों का जोड़ समाप्त हो रहा है। परिवार कमजोर हो रहा है और सत्ता आती नहीं दिख रही है। इसलिए कांग्रेस के बड़े और लोकप्रिय नेता पार्टी छोड़ रहे हैं और राहुल गांधी ऐसा दिखा रहे हैं, जैसे उनको… Continue reading कांग्रेस जा रही रसातल में

‘गुस्ताख़ इश्क़’: पुराने ज़माने के प्रेम की नई दास्तान

पुरानी दिल्ली की गलियों में शूट किए गए दृश्य फ़िल्म को एक सपनों जैसा रंग देते हैं। ।।।।“उल जलूल इश्क़”, “आप इस धूप में”, और “शहर तेरे” जैसे गीत केवल गाने नहीं, बल्कि कहानी की आत्मा हैं। संगीत का सुर और शब्दों की कोमलता फ़िल्म की नज़ाकत को और बढ़ा देती है। धुनें दिल में… Continue reading ‘गुस्ताख़ इश्क़’: पुराने ज़माने के प्रेम की नई दास्तान

बाल उत्पीड़न है गंभीर मसला

राष्ट्रीय स्तर पर हुए अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में बच्चों के बड़े हिस्से ने किसी न किसी रूप में यौन शोषण का अनुभव किया है। कई अध्ययनों में यह अनुपात 40–50 प्रतिशत तक बताया गया है। आध्यात्मिक आश्रमों, धार्मिक आवासीय विद्यालयों, मदरसों, कॉन्वेंट्स, हॉस्टलों और कोचिंग संस्थानों जैसे बंद व अनुशासित माहौल… Continue reading बाल उत्पीड़न है गंभीर मसला

हर योजना और मामले में धमक मनवाना!

जब करना जो मर्जी है फिर बिना लोगों की जान लिए कर लें। काले कृषि कानून लाए। 750 से ज्यादा किसान मरे। फिर वापस लिए। काहे को लाए थे?  लोगों में अपनी सत्ता की धमक पैदा करने?  हो गई। उससे पहले नोटबंदी से हो गई थी। कोरोना में अचानक लाक डाउन करके लाखों लोगों को… Continue reading हर योजना और मामले में धमक मनवाना!

विवाह पंचमी सीता-राम विवाह का दिन

मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को भगवान श्रीराम तथा जनकपुत्री जानकी (सीता) का विवाह होने के कारण इस पंचमी को विवाह  पंचमी कहा जाता है। श्रीराम सीता की महत्ता को देखते हुए इनके सम्मान में सदियों से इस तिथि को भारत में विवाह पंचमी का शुभ मांगलिक त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाये जाने की प्राचीन परंपरा है।… Continue reading विवाह पंचमी सीता-राम विवाह का दिन

मानवाधिकारों में सेना बनाम सुप्रीम कोर्ट

मणिपुर अथवा कश्मीर में जारी घटनाओं में, अदालत के आदेश, सेना के अधिकार और जनता का विश्वास—तीनों पहलू परस्पर टकरा सकते हैं। मगर, लोकतंत्र की खूबसूरती इनमें संतुलन बनाना और संवाद की प्रक्रिया में सही समाधान ढूंढना ही होना चाहिए। जरूरत इसी बात की है कि अतीत के अनुभवों से सीखकर, आज के तात्कालिक विवादों… Continue reading मानवाधिकारों में सेना बनाम सुप्रीम कोर्ट

ऊंची छलांग के लिए तैयार बिहार

बिहार के लोगों को भरोसा है कि यह सरकार अगले पांच साल में विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ा देगी। इस भरोसे का कारण यह है कि बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास का काम पूरा हो गया यानी लॉन्च पैड तैयार हो गया। … देश के जीडीपी में बिहार का हिस्सा धीरे धीरे बढ़… Continue reading ऊंची छलांग के लिए तैयार बिहार

उन वादियों से: ‘बारामूला’

‘बारामूला’ केवल एक हॉरर फ़िल्म नहीं है, यह ऐतिहासिक भूल-चूक, सामूहिक ज़ख्म और पहचान की स्थिति पर टिप्पणी भी है। फ़िल्म बताती है कि कैसे राजनीतिक हिंसा केवल भौतिक नहीं रहती; वह स्मृति, पहचान और पीढ़ियों के रिश्तों में दर्ज हो जाती है। यहां भूत-प्रेत का रूप वास्तव में उन अनसुलझी चोटों का प्रतीक है… Continue reading उन वादियों से: ‘बारामूला’

दो सौ बहत्तर रखवालों को श्रद्धा-अंजलि

जब कभी ये 272 जन्म कुंडलियां खंगाली जाएंगी, उन में से बहुतों की असलियत सुन कर भारतमाता के होश उड़ जाएंगे।… साहित्यकार, लेखक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता जेलों में ठूंसे जाते रहे, तब ये 272 बुद्धिविलासी कहां थे? क़ानूनी प्रक्रियाओं की खुली अवहेलना कर सैकड़ों लोगों को जेल भेजा गया, तब इन में से कोई… Continue reading दो सौ बहत्तर रखवालों को श्रद्धा-अंजलि

चुनाव आयोग पर सभी का विश्वास क्यों नहीं?

बिहार चुनाव से चुनाव आयोग की निष्पक्षता, राजनीतिक दलों के आचरण और चुनाव जीतने की रणनीति सभी पर गंभीर चर्चा है। पर आयोग को चाहिए कि वह अपने हर निर्णय में पारदर्शिता, कठोरता और समान व्यवहार बनाए रखे, तभी वह जनता का भरोसा लौटाने में कामयाब होगा। विपक्ष को अपनी कमियों से सीख लेनी होगी,… Continue reading चुनाव आयोग पर सभी का विश्वास क्यों नहीं?

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