बिहारः ‘वोट खरीद’ की विद्रूपता के भरोसे एनडीए!

फिलहाल यही नजर आता है कि बिहार में 6 और 11 नवंबर को होने जा रहे मतदान एक सामान्य चुनाव का हिस्सा होंगे। इसमें कोई ऐसा नया तत्व नहीं है, जो मतदाताओं में नई आशाएं पैदा करे। प्रशांत किशोर नया तत्व जरूर हैं, मगर अरविंद केजरीवाल की यादें अभी इतनी ताजा हैं कि उनका नयापन… Continue reading बिहारः ‘वोट खरीद’ की विद्रूपता के भरोसे एनडीए!

समावेशी विकास का उत्तराखंड मॉडल

भारत में विकास के कई मॉडल की चर्चा होती है। सबकी अपनी खूबियां हैं और अपने अपने राज्य के हिसाब से उनका महत्व और उपयोगिता है। आमतौर पर विकास के मॉडल के तौर पर बड़े राज्यों की चर्चा की जाती है, जिनका सकल घरेलू उत्पाद बहुत बड़ा होता है या जहां औद्योगिकरण की संभावनाएं ज्यादा… Continue reading समावेशी विकास का उत्तराखंड मॉडल

‘कांतारा चैप्टर 1’: शिल्प और सिनेमाई साधना की गाथा

पिछले लगभग एक दशक से दक्षिण की फ़िल्मों ने भारतीय कहानी कहने की परंपरा को नए आयाम दिए हैं। आज के ‘सिने-सोहबत’ में हाल ही में आई फ़िल्म ‘कांतारा चैप्टर 1’ के माध्यम से उस तत्व की भी पड़ताल करते हैं। मेरे ख़्याल से वो बात है अपनी कहानी में ‘कन्विक्शन’ की। दक्षिण की फिल्मों… Continue reading ‘कांतारा चैप्टर 1’: शिल्प और सिनेमाई साधना की गाथा

सरकार ‘शटडाउन’ फिर भी अमेरिका चल रहा है!

महत्वपूर्ण सबक यह निकलता है कि लोकतंत्र में दलगत राजनीति और प्रशासनिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन आवश्यक है। अमेरिका में शटडाउन अक्सर दोनों दलों, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के बीच वैचारिक टकराव का परिणाम होता है। कर प्रणाली, सामाजिक सुरक्षा या रक्षा बजट जैसी नीतिगत असहमति वहाँ शटडाउन को जन्म देती है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में शासन… Continue reading सरकार ‘शटडाउन’ फिर भी अमेरिका चल रहा है!

भाजपा को बिहार में दलित, पिछड़ों के सवाल भारी पड़ेंगे

चीफ जस्टिस पर जूते से हमले की घटना के साथ रायबरेली में एक दलित हरिओम को भयानक रूप से पीट पीट कर मारने का अर्थ है कानून का डर नहीं हैं। क्या दलित-पिछड़ों की सुरक्षा, सम्मान से जुड़े यह सारे सवाल बिहार चुनाव में भाजपा के हिन्दू मुसलमान के नकली मुद्दे के सामने दब जाएंगे?… Continue reading भाजपा को बिहार में दलित, पिछड़ों के सवाल भारी पड़ेंगे

बिना जीवनी जाने कैसे ‘आई लव मुहम्मद’?

अधिकांश मुसलमान भी मुहम्मद को पूरा नहीं जानते। …जब उन्हें सब के लिए हर विषय में‌ अनुकरणीय बताया तो उन के जीवन की पूरी जानकारी लेना लाजिम हो जाता है। वरना अनुकरण कैसे होगा?…विचारशील मुसलमान भी समझते हैं कि ऐसे प्रोफेट को पूरी मानवता के लिए ‘अनुकरणीय‘ बताना बेढब है! इसीलिए मुस्लिम नेता और उलेमा मुहम्मद की… Continue reading बिना जीवनी जाने कैसे ‘आई लव मुहम्मद’?

ट्रंप का गाज़ा में “कॉमर्शियल ब्रेक” कराना!

ट्रंप का ताजा युद्धविराम भी “नोबेल महत्वाकांक्षा” से भरा लगता है—घरेलू संकटों के बीच एक चमकदार विरासत की कोशिश। पर इस बार भी व्यवहारिक समस्याएं हैं। बंधक रिहाई का कार्यक्रम, तब जबकि गाज़ा के बंदरगाह बर्बाद हैं; पुनर्निर्माण के लिए अरब पूंजी को स्थायित्व पर भरोसा नहीं। दो-राष्ट्र ढांचे या यरूशलम पर समानता के बिना… Continue reading ट्रंप का गाज़ा में “कॉमर्शियल ब्रेक” कराना!

मुहम्मद की जीवनी इस्लाम की कुंजी

जानने के लिए इब्न इशाक का ‘सीरते रसूल अल्लाह’‌ (अंग्रेजी अनुवाद: ‘द लाइफ ऑफ मुहम्मद‘, कराचीः ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस) सर्वोत्तम ग्रंथ है। वह घटनाओं से भरी हुई रोचक कथा है।… मुहम्मद का सबसे प्रिय काम जिहाद था। हदीस (बुखारी, 9-90-332) के अनुसार, यदि उन का बस चलता तो वे तमाम जिहादियों को इकट्ठे जिहाद लड़ने… Continue reading मुहम्मद की जीवनी इस्लाम की कुंजी

भारत की पहचान भगदड़ भी है!

तमिलनाडु के करूर में अभिनेता-नेता विजय की राजनीतिक रैली में 41 लोगों की मौत हुई। ऐसे हादसों की सूची लंबी है लेकिन यहाँ सवाल उठता है कि एक के बाद एक हादसों से हमने क्या सीखा? क्या ऐसे हादसे कभी कम होंगे?  2024 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में भोले बाबा के सत्संग के दौरान… Continue reading भारत की पहचान भगदड़ भी है!

शरद पूर्णिमा का पर्व कई अर्थ लिए हुए

चंद्रमा की सोलह कलाएं मनुष्य के गुणों की प्रतीक हैं — पूर्ण चंद्रमा का यह दर्शन जीवन की पूर्णता का संकेत है। इसलिए कहा गया है कि योगेश्वर श्रीकृष्ण सभी सोलह कलाओं से सम्पन्न थे। इसी भाव में शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा के दर्शन और पूजा को आत्मशुद्धि और मानसिक शांति का प्रतीक… Continue reading शरद पूर्णिमा का पर्व कई अर्थ लिए हुए

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