गैर-बराबरी रोग है या लक्षण?

गैर-बराबरी पर गंभीरता से विचार करने के क्रम में पहला सवाल यह सामने आता है कि यह अपने-आप में एक समस्या है या मौजूदा आर्थिक का लक्षण भर है? मुद्दा यह है कि अगर उत्पादन के साधनों पर कुछ व्यक्तियों या व्यक्ति-समूहों का नियंत्रण रहेगा, तो यह कैसे संभव है कि उत्पादन से उत्पन्न धन… Continue reading गैर-बराबरी रोग है या लक्षण?

आधी रात को बिल पास करने का चलन

ऐसा लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को आधी रात तक या उसके बाद भी संसद चलाने का चस्का लग गया है। बहुत पहले आधी रात को संसद का सत्र बुला कर वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी कानून पास किया गया था। यह 2017 की बात है। उसके बाद इस साल… Continue reading आधी रात को बिल पास करने का चलन

विकसित भारत- जी राम जी!

जी राम जी को विकसित भारत के लिए विकसित ग्रामीण व्यवस्था तैयार करने के स्पष्ट उद्देश्य से लाया गया है। विपक्षी पार्टियों और आलोचकों को इस पर अमल का इंतजार करना चाहिए तब उनको वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगेगा। जहां तक तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल का आरोप है तो यह समझने की जरुरत है कि… Continue reading विकसित भारत- जी राम जी!

सर्दियों में तब खेलकूद बंद रखे?

लखनऊ में जो हुआ उसको दिल्ली सरकार के धुंआसे व कुहासे से समझते हैं। दो महीने से दिल्ली में वायु गुणवत्ता के लगातार गिरने, और सूचकांक के तेजी से बढ़ने की खबरें आ रही थीं। ऐसे में सरकार के कुछ न कर पाने का खामियाजा दिल्ली के स्कूल और उसमें पढ़ने वाले बच्चों को भुगतना… Continue reading सर्दियों में तब खेलकूद बंद रखे?

बॉन्डी बीच हमला और एक बहादुर इंसान

अहमद की यह वीरता इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हमला इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित था और अहमद खुद एक मुस्लिम हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। यह घृणा और हिंसा की विचारधारा है, जो किसी भी समुदाय को निशाना बना सकती है, लेकिन साहस और मानवता… Continue reading बॉन्डी बीच हमला और एक बहादुर इंसान

बदलती दुनिया में बेगाना होता भारत

भारत के लिए अमेरिकी नीति का बदलाव असहज समय में आया है। आज वाशिंगटन यह नहीं पूछता कि आप कौन हैं या आप क्या मानते हैं। वह सिर्फ़ यह पूछता है कि आप क्या करके दिखा सकते हैं।.. वाशिंगटन, ब्रसेल्स और टोक्यो जैसे राजनयिक गलियारों में भारत को अब एक ऐसे देश के रूप में… Continue reading बदलती दुनिया में बेगाना होता भारत

भारत को फिर चाहिए अपनी नैतिक ऊँचाई

हिंदुओं को दुनिया भर में सम्मान उनके उदात्त मूल्यों—सहिष्णुता, अहिंसा और ज्ञान—के कारण मिला। उपनिषदों से गांधी तक का बौद्धिक व नैतिक सफर भारत की आत्मा का प्रतिनिधि रहा है। वही नैतिक ऊँचाई अब धुंधला गई है।… अंतरराष्ट्रीय मीडिया अब हिंदू धर्म को आक्रामकता के प्रतीक के रूप में चित्रित करता है। अगर हिंदू धर्म… Continue reading भारत को फिर चाहिए अपनी नैतिक ऊँचाई

सोशल मीडिया से बचपन बचाने की चुनौती

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने एक साहसिक प्रयोग शुरू किया है। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर तालाबंदी। 10 दिसंबर से। दुनिया का पहला देश, जिसने सोशल मीडिया के प्रकोप से बचपन को बचाने की कोशिश की है। मुकम्मल तरीके से। लिहाजा दुनिया भर की निगाहें इस छोटे से… Continue reading सोशल मीडिया से बचपन बचाने की चुनौती

खानपान में मिलावट, गिरावट का संकट!

भारत में सचमुच खाद्य मिलावट की समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे ‘धीमी हत्या’ कह रहे हैं। कैंसर, हृदय रोग और किडनी फेलियर जैसी बीमारियों का बढ़ता ग्राफ इसी का नतीजा है। लेकिन हम कितने प्रभावित होंगे? समस्या कितनी गंभीर है? और सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए?… यूरोपीय संघ ने… Continue reading खानपान में मिलावट, गिरावट का संकट!

भारत में मुसलमान ज्यादा सुरक्षित

भारत में सभी प्रकार के मुसलमानों को समान और कुछ मामलों में अधिक संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। देश में लगभग 22 करोड़ मुसलमान हैं। पिछले सात दशक में उनकी आबादी सर्वाधिक— सात गुना से अधिक बढ़ चुकी है। अगर भारत सच में मुसलमानों के लिए ‘असुरक्षित’ है, उनकी आबादी कैसे बढ़ी? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी… Continue reading भारत में मुसलमान ज्यादा सुरक्षित

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