सबकी खुशहाली के बिना कैसा लोकतंत्र?

हकीकत यह है कि जो राजनीतिक अधिकार मिले होते हैं, समाज की बहुसंख्यक आबादी उनके उपभोग के लिए भी सक्षम नहीं होती। उन्हें सक्षम बनाने का दायित्व राज्य नहीं लेता। ऐसे में सारे अधिकार वास्तव में प्रभु वर्ग के लिए सीमित रह जाते हैं। इसीलिए ऐसे चुनावी लोकतंत्र में बनने वाली सरकारें प्रभु वर्ग के… Continue reading सबकी खुशहाली के बिना कैसा लोकतंत्र?

भाजपा में नई सुबह का आगाज

भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बिना शोर शराबे के इतना बड़ा परिवर्तन किया और उसे इतने सहज तरीके से स्वीकार कर लिया गया, जो भाजपा का अलग और विशिष्ठ चरित्र दिखाता है। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ साथ देश के समस्त कार्यकर्ताओं, नेताओं ने भी… Continue reading भाजपा में नई सुबह का आगाज

‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’

‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स ‘उन फ़िल्मों में से नहीं है जो तालियां बटोरे। यह उन फ़िल्मों में है जो असुविधा पैदा करती हैं और यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है।…नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का अभिनय यहां किसी संवाद या भावुक दृश्य का मोहताज नहीं। उनका चेहरा ही इस फ़िल्म का सबसे सशक्त संवाद है। आंखों… Continue reading ‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के आगे बेबस तंत्र

कागज़ पर सरकार ने कड़े कदमों का एक पूरा ढांचा बनाया है, लेकिन ज़मीनी असर सीमित है। यह वही कहानी है, जिसमें ज़िम्मेदारी सबकी है और जवाबदेही किसी की नहीं। बेबसी महज़ संसाधन समस्या नहीं, राजनीतिक प्राथमिकताओं की भी कहानी है। चुनावी बहस में प्रदूषण अभी भी हाशिये का मुद्दा है। इसलिए ‘आपातकालीन’ प्रेस कांफ्रेंस… Continue reading दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के आगे बेबस तंत्र

साहस और बलिदान का सम्मान

प्रतिवर्ष 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है। सिखों के दशम गुरु गुरु गोबिंद सिंह के छोटे पुत्रों- साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और साहिबजादे बाबा फतेह सिंह की बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए 2025 में 26 दिसम्बर दिन शुक्रवार को वीर बाल दिवस मनाया जाएगा, जिसकी व्यापक तैयारी सरकारी व भारतीय जनता… Continue reading साहस और बलिदान का सम्मान

वेदांग व विज्ञान की शोभा है गणित

गणित में शून्य, अनंत, स्वतंत्र नौ अंकों एवं दशमलव स्थान मान पद्धति की खोज प्राचीन भारत में ही हुई थी। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में दस गुणोत्तरी संख्या यथा लक्षांश, सहस्त्रांश, शतांश आदि शब्दावली भी प्रयोग में लाई गई है, जिससे दशमलव की परिकल्पना वैदिक युग से ही परिलक्षित होती है। दस गुणोत्तरी संख्या प्रणाली भारतीय… Continue reading वेदांग व विज्ञान की शोभा है गणित

गांधी से राम तक: भारत की आत्मा और पहचान की लड़ाई

गांधी की करुण पुकार “हे राम” और “जय श्रीराम” का हुंकार—इन दोनों के बीच का द्वैत, आज के भारत में उभरते वैचारिक विभाजनों का प्रतीक है। ये विभाजन केवल भाषणों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने तक गहरे जा पहुँचे हैं। तभी इतिहास से सबक लेने की आवश्यकता है।.. हमारे पास दो रास्ते हैं—या… Continue reading गांधी से राम तक: भारत की आत्मा और पहचान की लड़ाई

हिन्दू नेता अतीत-जीवी हैं

पिछले पचास वर्षों से देसी भारतीय नेताओं के पास केवल दलीय लड़ाई, गद्दी छीन-झपट की तिकड़में भर हैं। एक-दूसरे के प्रति द्वेष, झूठे-सच्चे आरोपों की पोटली है। उसी से लोगों को उकसाना और वोट-बटोरन मंसूबे ही उन की फुलटाइम चिन्ता दिखती है।… नेताओं का परनिंदक, शेखीबाज, और अतीतजीवी होना हिन्दू समाज की असमर्थता का संकेत… Continue reading हिन्दू नेता अतीत-जीवी हैं

संसद अमेरिका की और भारत की, इतना फर्क!

किसी भी लोकतंत्र में, सत्ता में कोई भी पार्टी क्यों न हो, ऐसे अधिकारियों को बुलाने, उन्हे जवाबदेह बनाने के कई लाभ हैं। सबसे पहले, यह जवाबदेही सुनिश्चित करता है। चुने हुए प्रतिनिधि कार्यकारी अधिकारियों से सवाल कर सकते हैं, जो जनता की ओर से होता है। इससे भ्रष्टाचार, दुरुपयोग या नीतिगत असफलताओं पर रोशनी… Continue reading संसद अमेरिका की और भारत की, इतना फर्क!

वंदे मातरम्- विरोध के मजहबी कारण झूठे

भारतीय उपमहाद्वीप में जो मुस्लिम समूह ‘वंदे मातरम्’ के विरोध के पीछे मजहबी कारणों का हवाला देता है, वह वास्तव में भ्रामक और झूठा है। विश्व के इस क्षेत्र में मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को इस्लामी पहचान का प्रतीक मानता है। परंतु पाकिस्तान न तो इस्लाम का रक्षक है, न ही ‘उम्माह’ के… Continue reading वंदे मातरम्- विरोध के मजहबी कारण झूठे

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