हकीकत यह है कि जो राजनीतिक अधिकार मिले होते हैं, समाज की बहुसंख्यक आबादी उनके उपभोग के लिए भी सक्षम नहीं होती। उन्हें सक्षम बनाने का दायित्व राज्य नहीं लेता। ऐसे में सारे अधिकार वास्तव में प्रभु वर्ग के लिए सीमित रह जाते हैं। इसीलिए ऐसे चुनावी लोकतंत्र में बनने वाली सरकारें प्रभु वर्ग के… Continue reading सबकी खुशहाली के बिना कैसा लोकतंत्र?
