दूषित जल की समस्या का समाधान क्या?

दूषित जल की समस्या का समाधान संभव है, यदि बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया जाए। सबसे पहले, स्रोत पर प्रदूषण को रोकना जरूरी है। उद्योगों को अपशिष्ट उपचार संयंत्र स्थापित करने के लिए बाध्य किया जाए। कृषि में जैविक खेती को प्रोत्साहित करें ताकि रसायनों का अपवाह कम हो। सीवेज उपचार को 100% बनाना चाहिए, जो वर्तमान… Continue reading दूषित जल की समस्या का समाधान क्या?

क्या हारती हुई बाजी लड़ रही हैं ममता दीदी?

क्या 15 साल की एंटी इन्कम्बैंसी के कारण उनकी स्थिति कमजोर हुई है? ध्यान रहे ल़ड़ना, भिड़ना उनके स्वभाव का हिस्सा है और एक समय राज्य के लोगों ने इसे पसंद भी किया। लेकिन अब इसकी तीव्रता बढ़ती जा रही है। उनके स्वभाव की उग्रता का असर उनकी पूरी पार्टी के ऊपर दिख रहा है।…… Continue reading क्या हारती हुई बाजी लड़ रही हैं ममता दीदी?

‘वेनेजुएला’ से भारत का क्या सबक?

वेनेजुएला पर अमेरिका का औचक सैन्य हमला कोई अपवाद नहीं है। यह उसी शाश्वत सिद्धांत को पुनर्स्थापित करता है, जो सदियों से वैश्विक राजनीति को संचालित करता आया है— ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’। स्वयंभू ‘सभ्य समाज’ का हाल यह है कि वह केवल शांति, संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर उपदेश देता है, लेकिन शक्ति के… Continue reading ‘वेनेजुएला’ से भारत का क्या सबक?

वेनेजुएला में अमेरिका की ताकत दिखी या कमजोरी?

ट्रंप काल में अमेरिका को अपनी साम्राज्यवादी मंशाओं को पूरा करने के लिए नग्न होना पड़ रहा है। दुनिया फिलहाल हैरत के साथ यह नंगा नाच देख रही है, मगर वह इन नग्नता के पीछे की कमजोरी भी देख रही है। इसीलिए ये संभावना बनी हुई है कि वेनेजुएला में ट्रंप प्रशासन ने जो दुस्साहस… Continue reading वेनेजुएला में अमेरिका की ताकत दिखी या कमजोरी?

न सफेद झक्क, न काली कट्ट

एक प्रधानमंत्री जी मानते हैं कि उन की निर्णयात्मक क्षमता अभूतपूर्व है, अद्भुत है और सटीक है। सो, वे बिना किसी से सालह-मशवरा करे निर्णय लेते हैं और सब पर थोप देते हैं। उन्हें इस से कोई लेनादेना ही नहीं है कि उन का फ़ैसला कितना अर्थवान है और कौन क्या सोचेगा?… इसलिए इसी में… Continue reading न सफेद झक्क, न काली कट्ट

इंडिगो प्रकरणः नियामक की सुस्ती घातक

नागर विमानन मंत्रालय और डीजीसीए दोनों अक्सर डेटा दिखाते हैं कि हर साल सैकड़ों इनफोर्समेंट एक्शन लिए जाते हैं, जिसमें चेतावनी, सस्पेंशन, कैंसिलेशन और आर्थिक दंड शामिल हैं। लेकिन कागज़ी कार्रवाई और वास्तविक नज़ीर के बीच एक बड़ा एग्ज़िक्यूशन गैप है। हाल के वर्षों में 500–600 से अधिक एन्फ़ोर्समेंट एक्शन हर साल दर्ज हुए, पर… Continue reading इंडिगो प्रकरणः नियामक की सुस्ती घातक

राहुल की संघ पर समझ, मगर कांग्रेस संगठन पर नहीं!

राहुल का लोकसभा में बोलना, मोदी को चैलेंज करना, विभिन्न समुदायों से मिलना, सबकी आवाज उठाना और कांग्रेस के मूल सिद्धांतों गरीब समर्थक, धर्मनिरपेक्षता, प्रगतिशीलता पर अडिग रहना सब ठीक है। मगर उनसे मिलना आज भी पार्टी में सहज सुलभ नहीं माना जाता है। और उनकी सोच से हटकर उन्हे किसी अलग बात के लिए… Continue reading राहुल की संघ पर समझ, मगर कांग्रेस संगठन पर नहीं!

ममदानीः न्यूयॉर्क से नई राजनीति की ज़िद

ममदानी ने कुरान पर हाथ रख कर शपथ ली। और न्यूयार्क ने पहला मुस्लिम मेयर तथा दक्षिण एशियाई मूल का मेयर पाया। कुछ घंटे बाद उन्होंने सिटी हॉल में हजारों लोगों के सामने दोबारा शपथ ली। इस बार उनके राजनीतिक नायकों में से एक सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने उन्हे शपथ दिलाई। दिन का समापन ब्रॉडवे… Continue reading ममदानीः न्यूयॉर्क से नई राजनीति की ज़िद

क्या रूसी लोग युद्धखोर हैं?

रूसी इतिहास में युद्ध सदियों से बार-बार की परिघटना है। अमेरिकी इतिहासकार प्रो. ग्रेगोरी कार्लटन ने अपनी पुस्तक ‘रसिया: द स्टोरी ऑफ वार‘ (2017) में रूसी इतिहास का एक रोचक आकलन किया है। … ऐतिहासिक रूप से रूसियों के लिए युद्ध उन के अस्तित्व का सामान्य अंग रहा है। रूसी सैन्य अकादमी के प्रमुख रहे… Continue reading क्या रूसी लोग युद्धखोर हैं?

सिखों के दशम गुरु — गुरु गोविंद सिंह

उन्होंने देश, धर्म और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सिखों को संगठित किया और उन्हें सैनिक परिवेश में ढाला। मान्यता है कि धर्म और न्याय की प्रतिष्ठा के लिए गुरु गोविंद सिंह का अवतरण हुआ था। इसी उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा था — “मुझे परमेश्वर ने दुष्टों का नाश करने और धर्म… Continue reading सिखों के दशम गुरु — गुरु गोविंद सिंह

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