स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग जरूरी

योग कोई जादू नहीं, बल्कि अभ्यास है। योग को धीरे-धीरे बढ़ाएँ, शरीर की सुनें और धैर्य रखें। याद रहे कि योग हमें सिखाता है कि सच्चा स्वास्थ्य बाहर नहीं, भीतर है। जब हम योग अपनाते हैं, तो न केवल हम स्वस्थ होते हैं, बल्कि समाज और पर्यावरण भी लाभान्वित होता है। इसलिए कोशिश करें कि… Continue reading स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग जरूरी

नरेंद्र भाई की काशी में मां गंगा के आंसू

वाराणसी के सौंदर्यीकरण और विकास की धुन में वहां के सैकड़ों मंदिरों और शिवलिंगों को पहले ही तोड़ा जा चुका है और अब अर्वाचीन महिमा का धनी मणिकर्णिका घाट भी नरेंद्र भाई की इस झोंक में तिरोहित हो गया।… जब यह सब हो रहा है तो मणिकर्णिका घाट के जीर्णोद्धार में सब से अहम भूमिका… Continue reading नरेंद्र भाई की काशी में मां गंगा के आंसू

अब डबल नहीं ट्रिपल इंजन की चाह

शिव सेना ब्रांड उप राष्ट्रीयता की हार और एमआईएम की बड़ी जीत का बारीकी से आकलन करें तो इसमें एमके स्टालिन और ममता बनर्जी दोनों के लिए चिंता की बात दिखेगी। दोनों उप राष्ट्रीयता की राजनीति करते हैं और दोनों मुस्लिम वोट को लेकर आश्वस्त रहते हैं कि वह उन्हीं को मिलेगा। लेकिन महाराष्ट्र के… Continue reading अब डबल नहीं ट्रिपल इंजन की चाह

हिंदू–मुस्लिम क्यों अमन से नहीं रह पाते?

यह ठीक है कि कई मुस्लिम शांतिपूर्वक रहना चाहते हैं, लेकिन इस्लामी सिद्धांत में सभी ईश्वर को एक मानने की गुंजाइश नगण्य है। यही कारण है कि एक पक्ष संघर्ष-अपमान को याद करता है, तो दूसरा पक्ष उसपर गर्व। यही हिंदू-मुस्लिम रिश्तों में जहर घोलता है। अतीत बदला नहीं जा सकता, लेकिन क्या ऐतिहासिक अपराधों… Continue reading हिंदू–मुस्लिम क्यों अमन से नहीं रह पाते?

दुनिया में जंगल राज लाने पर आमादा ट्रंप

‘ट्रंप का यह आकलन कि अमेरिकी प्रभुत्व को मजबूत करने के लिए वे किसी भी सैन्य, आर्थिक या राजनीतिक शक्ति का स्वतंत्र रूप से उपयोग कर सकते हैं, उनके विश्व दृष्टिकोण की सबसे स्पष्ट स्वीकारोक्ति है। इसके मूल में यह विचार है कि जब शक्तियां टकराती हैं तो निर्णायक तत्व कानून, संधियां और परंपराएं नहीं,… Continue reading दुनिया में जंगल राज लाने पर आमादा ट्रंप

ज़मीनी लेकिन बेचैन फ़िल्म: ‘कॉट स्टीलिंग’

हॉलीवुड फिल्मकार डैरेन एरोनोफ़्स्की की पिछली फिल्म ‘ब्लैक स्वान‘ यदि आत्म-विनाश की कविता थी, तो ‘कॉट स्टीलिंग‘ रोज़मर्रा के नरक की गद्य-कथा है। ‘कॉट स्टीलिंग‘ उन फिल्मों में से नहीं होगी, जिन्हें देखकर आप हल्के मन से बाहर निकलें। यह धीरे-धीरे चिपकती है, और बाद में याद आती है, खासतौर पर उन पलों में, जब… Continue reading ज़मीनी लेकिन बेचैन फ़िल्म: ‘कॉट स्टीलिंग’

भोपाल का शांत ओपेरा

भारत का साहित्यिक भविष्य केवल मेगा-उत्सवों पर नहीं टिक सकता। उसे जड़ों वाले, उच्च-सत्यनिष्ठ केंद्रों का नक्षत्र चाहिए, विशेषकर द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में, जहाँ जिज्ञासा प्रचुर है पर मंच दुर्लभ। बीएलएफ दिखाता है कि जब गंभीरता पर भरोसा किया जाए और ज्ञात श्रोताओं का सम्मान हो, तो क्या संभव है। इसका प्रभाव… Continue reading भोपाल का शांत ओपेरा

भारत को एक सूत्र में जोड़ता है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति पर्व भारतीय संस्कृति का महान लोकपर्व सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है जो देश के प्रत्येक कोने में अलग अलग स्वरूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करते हैं। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में जाना जाता हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा… Continue reading भारत को एक सूत्र में जोड़ता है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति: देवताओं का काल उत्तरायण

मकर संक्रांति का महत्व सूर्य के उत्तरायण होने से जुड़ा है। शीतकाल के अंत में सूर्य मकर रेखा को पार करते हुए उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। वास्तव में मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने और मकर राशि में प्रवेश करने के शुभ अवसर का पर्व है। इसे देवताओं… Continue reading मकर संक्रांति: देवताओं का काल उत्तरायण

स्वामी विवेकानंद और युवा दिवस

एक बड़े स्वप्नदृष्टा के रूप में विवेकानंद ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जिसमें धर्म अथवा जाति के आधार पर मनुष्य-मनुष्य में कोई भेद न रहे। उनका आत्मा और परमात्मा में अनन्य विश्वास था। उनके अनुसार भिन्न-भिन्न स्रोतों से निकलकर सभी नदियों के समुद्र में मिल जाने की भांति ही भिन्न-भिन्न रुचि के… Continue reading स्वामी विवेकानंद और युवा दिवस

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