भारत की वेंचर कैपिटल केवल मृगतृष्णा

सरकारी विज्ञप्तियों में जिन यूनिकॉर्न का जश्न मनाया जाता है, उनके मुकाबले हजारों स्टार्टअप्स ऐसे हैं जिन्हें इस योजना की पूंजी कभी नहीं मिली। मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से केवल 1 से 2 प्रतिशत को ही लाभ मिला। वेंचर फंड्स से कंपनियों तक वास्तविक निवेश में देरी रही। मंजूरी चक्र लंबे हुए।… भारत वेंचर कैपिटल… Continue reading भारत की वेंचर कैपिटल केवल मृगतृष्णा

एचबीए1-सी टेस्ट और डायबिटीज

अध्ययन के अनुसार, दक्षिण एशियाई लोगों में एचबीए1सी और वास्तविक ब्लड ग्लूकोज के बीच सहसंबंध कमजोर है। उदाहरण के लिए, एनीमिया वाले क्षेत्रों में एचबीए1सी पर निर्भरता से डायबिटीज का निदान 20-30% मामलों में गलत हो सकता है। यह न केवल निदान को प्रभावित करता है, बल्कि उपचार को भी, अनावश्यक दवाएं या देरी से… Continue reading एचबीए1-सी टेस्ट और डायबिटीज

नफरत की खेती के नतीजे भुगतता पाकिस्तान

पाकिस्तान में लगभग 4 करोड़ शिया बसते हैं। पिछले दो दशकों में 4,000 से अधिक शिया मुसलमान इस्लाम के नाम पर जिहादी हमलों में मारे जा चुके हैं। यह दर्दनाक मौतें प्रशासनिक विफलता का परिणाम नहीं, बल्कि उस जहरीली सोच का स्वाभाविक नतीजा है, जिसका आधार ही असहिष्णुता और घृणा हैं। ….क्या मस्जिद में नमाज… Continue reading नफरत की खेती के नतीजे भुगतता पाकिस्तान

एआई से डरने की बात नहीं, बशर्ते…

एआई का जिस तेजी से विकास हो रहे है और उसके नए-नए टूल्स आ रहे हैं, उससे मौजूदा अर्थव्यवस्था के बीच रोजगार बाजार में उथल-पुथल मचना तय है। लेकिन तकनीक के बदलाव को रोका नहीं जा सकता। फिर भी लोग विकल्पहीन नहीं हैं। उनके पास नई आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था बनाने का विकल्प मौजूद है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस… Continue reading एआई से डरने की बात नहीं, बशर्ते…

बांग्लादेश से बंगाल तक बदलाव की हवा!

तीन सौ सदस्यों की बांग्लादेश संसद में सिर्फ तीन हिंदू जीते हैं। य़ह अब तक की सबसे कम संख्या है। इसका मतलब है कि मुस्लिम ध्रुवीकरण लगभग सौ फीसदी रहा। वहां कट्टरपंथी या उदार दोनों किस्म के मुस्लिम मतदाताओं ने हिंदुओं को हराने के लिए वोट किया। इस किस्म का ध्रुवीकरण पश्चिम बंगाल में हिंदू… Continue reading बांग्लादेश से बंगाल तक बदलाव की हवा!

बेख़ुदी बेसबब नहीं, कुछ तो है, जिस की पर्दादारी है

नरेंद्र भाई मोदी को क्या पड़ी है कि वे ट्रंप की हर एक शर्त मान कर व्यापार समझौता करने पर तुले हुए हैं? क्या इस के पीछे कोई रहस्य है? क्या ट्रंप के यह कहने में कोई गहरा संदेश छिपा हुआ है कि प्रधानमंत्री मोदी मुझे स्नेह करते हैं, वे मेरे मित्र हैं और इसलिए… Continue reading बेख़ुदी बेसबब नहीं, कुछ तो है, जिस की पर्दादारी है

धुंध, दोष और दर्द की पड़ताल: ‘कोहरा 2’

लेखक गुंजित चोपड़ा और डिग्गी सिसोदिया अपराध को सनसनी नहीं बनाते। वे उसे सामाजिक संरचना की उपज की तरह देखते हैं। कथा की संरचना बेहद संयमित है और हर एपिसोड एक नई परत हटाता है। सीज़न दो का सबसे बड़ा गुण यह है कि वह दर्शक को जज बनने नहीं देता। वह हमें परिस्थितियों के… Continue reading धुंध, दोष और दर्द की पड़ताल: ‘कोहरा 2’

बिखरती वैश्विकी में भारत एक मोड़ पर

अर्थशास्त्री इस स्थिति को लेकर सावधान हैं। जगदीश भगवती ने पहले ही चेताया था कि बहुत सारे अलग-अलग व्यापार समझौते “स्पेगेटी बाउल” जैसी उलझन पैदा करते हैं—नियम जटिल हो जाते हैं और लाभ सबसे कुशल व्यापारियों को नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से पसंदीदा साझेदारों को मिलता है। दो सौदों की कहानी भारत की 2026 की… Continue reading बिखरती वैश्विकी में भारत एक मोड़ पर

‘स्व’ के प्रथम उद्घोषक स्वामी दयानन्द

उन्होंने 1876 में स्वराज्य का नारा दिया। सत्यार्थ प्रकाश के षष्ठम समुल्लास में उन्होंने साफ लिखा—“कोई कितना ही करे, परंतु जो स्वदेशी राज्य होता है, वह सर्वोपरि उत्तम होता है।” आगे चलकर बाल गंगाधर तिलक ने इसी भाव को अपने प्रसिद्ध वाक्य में रूप दिया—“स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।” वेदों के गहरे ज्ञाता और आर्य… Continue reading ‘स्व’ के प्रथम उद्घोषक स्वामी दयानन्द

तकनीक में वैश्विक स्तर का भारत भ्रम

कोई देश केवल घोषणा करके तकनीकी महाशक्ति नहीं बन जाता। तकनीकी शक्ति धीरे-धीरे बनती है—दशकों की मेहनत, गहरे शोध, मज़बूत संस्थाओं और सवाल पूछने वाली संस्कृति से। … वैश्विक तकनीकी नेतृत्व का मतलब कुछ और होता है। वह सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, सुपरकंप्यूटिंग, उन्नत रोबोटिक्स, नई सामग्री, जैव-प्रौद्योगिकी और मूल एआई मॉडलों जैसी खोजों से तय होता… Continue reading तकनीक में वैश्विक स्तर का भारत भ्रम

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