प्रबंध के घमंड की वजह से इंडिगो संकट !

सवाल है जब डीजीसीए ने सभी ऑपरेटरों को नए नियमों का अनुपालन करने के लिए पर्याप्त समय दिया था, तो इंडिगो ने उन्हें नजरअंदाज करने व लापरवाही का रवैया क्यों अपनाया? इंडिगो का नए एफडीटीएल नियमों को नजरअंदाज करने का तरीका भी जेट एयरवेज की याद दिलाता है, जो इसी तरह के घमंड के चलते… Continue reading प्रबंध के घमंड की वजह से इंडिगो संकट !

एआई की दौड़ में भारत फिसड्डी है!

भारत की एआई दौड़ से बहिष्कृति एक गहरी संरचनात्मक विफलता की निशानी है—एक ऐसी तकनीकी खाई जिसे बिना क्रांतिकारी बदलाव के पाटना लगभग असंभव लगता है। सच्चाई यह है: भारत इस दौड़ में शामिल ही नहीं हो सकता। सेमीकंडक्टर और एआई जैसी नई मूलभूत तकनीकों में भारत छह पीढ़ियों से पिछड़ा हुआ है। हर साल… Continue reading एआई की दौड़ में भारत फिसड्डी है!

जरूरी है इस्लाम के ‘जिहाद’ और ‘जुल्म’ को जानना

जिहाद हिंसक और अहिंसक दोनों तरह का हो सकता है। परन्तु हिंसा, मौखिक और शारीरिक दोनों ही उस का प्रमुख औजार रहा है। बिना जिहाद और हिंसा के मुहम्मद पूरी तरह विफल रहते हुए गुजर गये होते। मुहम्मद का सब से बड़ा आविष्कार जिहाद था। यही बाद में, मदीना से उन के सफल होने का… Continue reading जरूरी है इस्लाम के ‘जिहाद’ और ‘जुल्म’ को जानना

भारत में मानवाधिकार की अवधारणा प्राचीन

वैदिक मतानुसार सभी मनुष्य जन्म से समान हैं और उनमें कोई श्रेष्ठ या निम्न नहीं है, जो आधुनिक मानवाधिकारों के गैर भेदभाव के सिद्धांत का आधार है। सभी मनुष्यों को एक दूसरे के प्रति दयालु और जिम्मेदार होने का उपदेश देता ऋग्वैदिक मंत्र मनुर्भव वर्तमान के मानवाधिकारों का मूल है। यजुर्वेद 36/18का मित्रस्य अर्थात मित्रता… Continue reading भारत में मानवाधिकार की अवधारणा प्राचीन

मौलाना मदनी का जुल्म

जमाते उलेमा के नेता मौलाना महमूद मदनी ने गत ३० नवंबर को भोपाल में एक सभा में कहा कि ‘इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसी इस्लाम की पवित्र धारणा को दुर्व्यवहार, अव्यवस्था और हिंसा से जुड़े शब्दों में बदल दिया है। … कहीं पर कोई आतंकवादी घटना हो जाती है तो उसको जिहाद… Continue reading मौलाना मदनी का जुल्म

भारत के आंकड़ों के ‘सी ग्रेड’ में जाने की कहानी

भविष्य में जब इतिहास लिखा जाएगा, तो उसमें यह दर्ज होगा कि जो भारत में आत्म-साक्षात्कार का जो तरीका महालनोबिस की टीम ने बनाया, उसे अपनी फ़ौरी सियासी जरूरतों को पूरा करने के लिए किस तरह नरेंद्र मोदी सरकार ने लांछित कर दिया। इस सरकार और इसके समर्थकों को अभी शायद ये अहसास नहीं है… Continue reading भारत के आंकड़ों के ‘सी ग्रेड’ में जाने की कहानी

मोदी-पुतिन की कूटनीति दुनिया ने देखी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के साथ भारत के संबंधों को ‘ध्रुव तारे की तरह अटल’ बताया। उन्होंने कहा कि 25 साल पहले राष्ट्रपति पुतिन ने ही साझेदारी की नई बुनियाद रखी थी और उसके बाद दुनिया के कितने संकट देखे, दोनों देशों ने कितने उतार चढ़ाव देखे फिर भी दोनों के संबंध स्थिर रहे।… Continue reading मोदी-पुतिन की कूटनीति दुनिया ने देखी

औपनिवेशिक मानसिकता का सच बड़ा है!

यूं तो प्रधानमंत्री मोदी ने मैकॉले मानसिकता की सही पहचान की है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। भारत का प्रभावशाली राजनीतिक, बौद्धिक और सामाजिक वर्ग सिर्फ मैकॉले ही नहीं, बल्कि कार्ल मार्क्स की विचारधारा से भी लंबे समय तक ग्रस्त रहा है। स्वतंत्रता के बाद से यह वैचारिक तंत्र— कभी साथ मिलकर, कभी अलग-अलग… Continue reading औपनिवेशिक मानसिकता का सच बड़ा है!

‘तेरे इश्क में’: एक मनोवैज्ञानिक विमर्श

फ़िल्म का मूल संघर्ष प्यार और ऑब्सेशन की वह महीन रेखा है, जिसे पार करते ही प्रेम विष में बदल जाता है।… इस फ़िल्म की कहानी में आधुनिक रिश्तों में इमोशन की एक दिलचस्प यात्रा है। तब प्यार किस तरह की कसौटी से गुज़रता है जब दो प्यार करने वालों के रिश्ते में इमोशनल बैगेज,… Continue reading ‘तेरे इश्क में’: एक मनोवैज्ञानिक विमर्श

प्रश्नों के अमरत्व पर नहीं है कोई प्रश्नचिह्न

संसद के चालू शीतकालीन सत्र में उठ रहे सवाल मामूली नहीं हैं। वे हमारे देश की मूलभूत परंपराओं की हिफ़ाज़त के लिए उपजे हैं। वे हमारे मुल्क़ के शाश्वत मूल्यों की रक्षा के लिए जन्मे हैं। वे हमारे जनतंत्र की बुनियाद को पोला बनाने की साज़िश के ख़िलाफ़ परचम लहरा रहे हैं। निर्वाचन प्रक्रिया की… Continue reading प्रश्नों के अमरत्व पर नहीं है कोई प्रश्नचिह्न

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