‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’

Categorized as लेख

रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स उन फ़िल्मों में से नहीं है जो तालियां बटोरे। यह उन फ़िल्मों में है जो असुविधा पैदा करती हैं और यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है।नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का अभिनय यहां किसी संवाद या भावुक दृश्य का मोहताज नहीं। उनका चेहरा ही इस फ़िल्म का सबसे सशक्त संवाद है। आंखों में स्थायी थकान, आवाज़ में संयम और चाल में एक नैतिक बोझ, यह जटिल यादव अब अपराध को नहीं, अपने ही पेशे की सीमाओं को जांच रहा है।

सिने -सोहबत

हिंदी सिनेमा में क्राइम-थ्रिलर अक्सर या तो मनोरंजन का उपकरण बन जाते हैं या फिर महज़ शैलीगत अभ्यास। बहुत कम फ़िल्में होती हैं जो अपराध को सिर्फ़ ‘किसने किया’ के सवाल से आगे ले जाकर ‘क्यों किया गया और व्यवस्था ने क्या किया’ जैसे असहज प्रश्नों तक पहुंचाती हैं। आज के ‘सिने-सोहबत’ में हम चर्चा करेंगे हनी त्रेहन निर्देशित ‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’ की जो इसी श्रेणी की फ़िल्म है। यह न केवल 2020 में आई हनी त्रेहन की ही फ़िल्म ‘रात अकेली है’ की वैचारिक उत्तरकथा है, बल्कि उसके नैतिक संसार को और अधिक स्याह, जटिल और बेचैन करती है।

ताज़ातरीन फ़िल्म ‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’ एक हत्या-कथा कम और एक टूटे हुए सामाजिक ढांचे की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अधिक है।

‘द बंसल मर्डर्स’ की कहानी एक संपन्न और प्रभावशाली बंसल परिवार की सामूहिक हत्या से शुरू होती है। एक रात, एक घर, कई लाशें, सुनने में यह किसी पारंपरिक ‘व्होडनिट’ (Whodunit) की संरचना जैसा लगता है। लेकिन जैसे-जैसे इंस्पेक्टर जटिल यादव (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) जांच में उतरते हैं, मामला महज़ हत्या का नहीं रह जाता।

यह जाँच धीरे-धीरे धन, वर्चस्व, धार्मिक आडंबर, पारिवारिक उत्तराधिकार और राजनीतिक संरक्षण के ऐसे गलियारों में पहुंचती है, जहां सच सिर्फ़ तथ्य नहीं, बल्कि एक असुविधाजनक विकल्प बन जाता है। फ़िल्म का साहस इसी में है कि यह दर्शक को समाधान नहीं, संदेह की स्थिति में छोड़ती है।

‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’ की कहानी में हत्या किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम नहीं, बल्कि सालों से जमा होती चुप्पियों, समझौतों और अपराधों की परिणति है।

ऐसी फ़िल्में काफ़ी कम होती हैं, जिनकी प्रीक्वल और फिर सीक्वल में क़िरदारों की बारीकियों पर इस सूक्ष्मता से काम होता हो। अब इस फ़िल्म के प्रोटैगोनिस्ट इंस्पेक्टर जटिल यादव की ही बात की जाए तो उस शख़्स का चेहरा तो वही इस फ़िल्म की प्रीक्वल वाले किरदार का है लेकिन इंसान बदल गया है उसकी शख़्सियत बदल गई है। यदि 2020 की ‘रात अकेली है’ में जटिल यादव एक ऐसा पुलिस अफ़सर था, जो जाति, प्रेम और व्यवस्था के बीच फंसा हुआ दिखता था, तो ‘द बंसल मर्डर्स’ में वही जटिल कहीं अधिक थका हुआ, चुप और अंतर्मुखी है।

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का अभिनय यहां किसी संवाद या भावुक दृश्य का मोहताज नहीं। उनका चेहरा ही इस फ़िल्म का सबसे सशक्त संवाद है। आंखों में स्थायी थकान, आवाज़ में संयम और चाल में एक नैतिक बोझ, यह जटिल यादव अब अपराध को नहीं, अपने ही पेशे की सीमाओं को जांच रहा है।

पहली फ़िल्म में वह सच तक पहुंचने की कोशिश करता था; दूसरी फ़िल्म में वह यह समझ चुका है कि सच तक पहुंचना और उसे लागू कर पाना दो अलग बातें हैं।

‘रात अकेली है’ (2020) की आत्मा व्यक्तिगत थी। वह फ़िल्म जाति, यौन नैतिकता और सामाजिक पाखंड की कहानी थी। हत्या वहां एक बहाना थी। असली संघर्ष था व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम सामाजिक संरचना। ‘द बंसल मर्डर्स’ में दृष्टि और व्यापक हो जाती है। यहां संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, संस्थागत है। जाति की जगह सत्ता ले लेती है, प्रेम की जगह संपत्ति और परंपरा।

जहां पहली फ़िल्म में अपराध का समाधान अपेक्षाकृत स्पष्ट था, वहीं दूसरी फ़िल्म समाधान को ही संदिग्ध बना देती है। यह बदलाव दर्शाता है कि निर्देशक हनी त्रेहन  ने फ्रेंचाइज़ी को दोहराने की बजाय उसके नैतिक क्षितिज का विस्तार किया है।

हनी त्रेहन का निर्देशन इस फ़िल्म की सबसे बड़ी ताक़त है। वे दृश्य को बोलने देते हैं, संवाद को नहीं। लंबे साइलेंट शॉट्स, स्थिर कैमरा और सीमित बैकग्राउंड स्कोर, यह सब मिलकर एक ऐसा वातावरण रचते हैं जिसमें बेचैनी धीरे-धीरे भीतर उतरती है।

यह सिनेमा दर्शक से धैर्य मांगता है। यहां कोई तेज़ ट्विस्ट नहीं, कोई ज़ोरदार क्लाइमेक्स भी बिलकुल नहीं है पर शायद यही इस फ़िल्म का वैचारिक वक्तव्य है। वास्तविक जीवन में न्याय भी इसी तरह अधूरा और अस्पष्ट होता है।

समर्थ कलाकार चित्रांगदा सिंह, दीप्ति नवल और अन्य महिला पात्र फ़िल्म में केंद्र में नहीं हैं, लेकिन वे कथा की नैतिक धुरी हैं। विशेष रूप से ‘गुरु मां’ का किरदार जो कि आस्था और सत्ता के खतरनाक गठजोड़ का प्रतीक बनकर उभरता है।

इस  फ़िल्म में यह भी  बख़ूबी रेखांकित होता है कि कैसे महिलाएं अक्सर अपराध की सूत्रधार नहीं, लेकिन उसके नैतिक आवरण के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं।

वैसे इस फ़िल्म में कुछ कमियां भी ज़रूर दिखीं। पटकथा की सीमाएं भी दिखीं, जहां फ़िल्म चूकती है। यह कहना ज़रूरी है कि ‘द बंसल मर्डर्स’ एक निर्दोष फ़िल्म नहीं है। इसकी सबसे बड़ी कमजोरी इसकी असमान पटकथा है। कुछ पात्र केवल संकेत बनकर रह जाते हैं, जिन पर और गहराई से काम किया जा सकता था। इसके अलावा, फ़िल्म का अंतिम हिस्सा कुछ दर्शकों को अधूरा लग सकता है। लेकिन यह अधूरापन शायद लेखक की विफलता नहीं, बल्कि जान बूझकर चुनी गई नैतिक स्थिति है।

फ़िल्म के संगीत और तकनीकी पक्ष की बात करें तो इस फ़िल्म में संगीत न्यूनतम है और सही अर्थों में पृष्ठभूमि बनकर रहता है। बेहद सार्थक कैमरामैन पंकज कुमार की सिनेमैटोग्राफी धूसर रंगों और छायाओं के माध्यम से एक ऐसे समाज की रचना करती है जहां उजाला केवल दिखावा है।

फ़िल्म में संगीत दिया है स्नेहा खानवलकर ने और गीतकार हैं राज शेखर और स्वानंद किरकिरे।

माना जाता है कि फिल्ममेकिंग की प्रक्रिया में सबसे अहम् और आख़िरी राउंड एडिटिंग टेबल पर संपन्न होता है। इस फ़िल्म के एडिटर हैं ए श्रीकर प्रसाद जो कि अपने आप में फ़िल्म एडिटिंग में एक बहुत बड़ा नाम हैं। ज़ाहिर है उनके योगदान से इस फ़िल्म में चार चांद लगने ही थे।

‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स ‘उन फ़िल्मों में से नहीं है जो तालियां बटोरे। यह उन फ़िल्मों में है जो असुविधा पैदा करती हैं और यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है। यह फ़िल्म बताती है कि अपराध अक्सर व्यक्ति नहीं करता, व्यवस्था करवाती है। साथ ही इस फ़िल्म में यह अहसास भी साफ़ है कि कई बार पुलिस अधिकारी भी न्याय का वाहक नहीं, उसका गवाह भर होता है।

‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’ उनके लिए है जो सिनेमा को सिर्फ़ मनोरंजन नहीं बल्कि संवाद भी मानते हैं। नेटफ़्लिक्स पर है। देख लीजिएगा।  (पंकज दुबे मशहूर बाइलिंगुअल उपन्यासकार और चर्चित यूट्यूब चैट शो ‘स्मॉल टाउन्स बिग स्टोरीज़” के होस्ट हैं।)


Previous News Next News

More News

केरल में 19 दवाएं खराब मानक गुणवत्ता वाली घोषित

September 12, 2026

केरल औषधि नियंत्रण विभाग ने अगस्त 2026 के दौरान की गई प्रयोगशाला जांच के बाद 19 दवा नमूनों को “मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं” घोषित किया है। इन नमूनों में आम तौर पर उपयोग होने वाली कई दवाएं शामिल हैं, जैसे कि लोपेरामाइड हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट आईपी 2 एमजी, डिक्लोफेनाक सोडियम टैबलेट आईपी 50 एमजी, फोलिक…

तेलंगाना विधानसभा में प्रजा विश्वासम संशोधन विधेयक पेश

September 12, 2026

तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने शनिवार को विधानसभा में ‘तेलंगाना प्रजा विश्वासम (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य छोटी-मोटी, तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाना और कारोबार करने में आसानी (ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस) को बढ़ावा देना है। बिल…

हरीश रावत का कांग्रेस कार्य समिति से इस्तीफा

September 12, 2026

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था कांग्रेस कार्य समिति से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस सूत्रों ने शनिवार को बताया कि श्री रावत ने स्वयं कार्य समिति से इस्तीफा देने की पेशकश की है और अपना त्यागपत्र कांग्रेस आलाकमान को भेज दिया है।…

मोदी ने यूएई, मलेशिया, वियतनाम और इथियोपिया के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता की

September 12, 2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मलेशिया, वियतनाम, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इथियोपिया के नेताओं के साथ शनिवार को द्विपक्षीय बैठकें कीं जिनमें महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। ये बैठकें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुईं। प्रधानमंत्री मोदी ने अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद…

ब्रिक्स मीडिया किट में भी दिखी भारतीयता की झलक

September 12, 2026

राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को शुरू हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्रालय की ओर से देश-विदेश के पत्रकारों को दिए गए मीडिया किट में घरेलू उत्पादों को प्रोत्साहित करने वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अपील की बानगी दिखी। इस किट में पांच पंखुडी वाले कमल…

logo