राष्ट्रवादी मूल्यों में खंपे संघ के सौ वर्ष…

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ भारत को केवल राजनीतिक भू सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक राष्ट्र मानता है। इसकी दृष्टि में भारतीय संस्कृति ही राष्ट्रीय एकता का आधार है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ साथ संघ मातृभूमि की सेवा को सर्वोपरि मानता है। यह आधुनिकता और परंपरा के संतुलन पर बल देता है। संघ की… Continue reading राष्ट्रवादी मूल्यों में खंपे संघ के सौ वर्ष…

चमक, दमक, धमक से भरपूर: ‘बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड’

‘बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड‘ के हर डिपार्टमेंट में अच्छा काम किया गया है। कलाकारों की परफॉर्मेंस की बात करें तो वो इसका एक बेहद मज़बूत पहलू है। एक से एक मंझे हुए कलाकारों में मनोज पाहवा इस शो की आत्मा हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और भावनात्मक गहराई दोनों ही कमाल की हैं। नए कलाकारों में लक्ष्य… Continue reading चमक, दमक, धमक से भरपूर: ‘बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड’

एआई से चुनौतियां ज्यादा

एआई के कारण होने वाला रोजगार नुकसान केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक चुनौती भी है। बेरोजगारी न केवल व्यक्तियों की आय को प्रभावित करती है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और सामाजिक स्थिति को भी ठेस पहुंचाती है। भारत जैसे विकासशील देश में, जहां पहले से ही बेरोजगारी और इम्पलॉयमेंट की समस्या है, एआई-प्रेरित… Continue reading एआई से चुनौतियां ज्यादा

भारतीय आख्यान परंपरा बेजोड़

भारतीय संस्कृति के अनुसार मानव और देव दोनों परस्पर संबद्ध हैं। मनुष्य यज्ञों में देवों के लिए आहुति देता है, जो प्रसन्न होकर उसकी अभिलाषा पूर्ण करते हैं और अपने प्रसादों की वृष्टि उनके ऊपर निरंतर करते रहते हैं। इस प्रकार वैदिक आख्यानों से संबंधित अनेक आख्यानों का विकास उपनिषद, ब्राह्मण व आरण्यक ग्रंथों, रामायण,… Continue reading भारतीय आख्यान परंपरा बेजोड़

बिहार में हार, जीत पर सब निर्भर!

बिहार चुनाव मोदी जी के अस्तित्व का सवाल बन गया है। हारे तो खेल खत्म। उन पर चारों तरफ से हमले हो रहे हैं। 11 साल तक उनकी बातों, भाषण, कहानियों का दौर रहा। मगर अब सवाल उठने लगे हैं। उनकी छवि गिर रही है। उन्होंने अपना छवि निर्माण राष्ट्रवाद पर किया था। मगर वह… Continue reading बिहार में हार, जीत पर सब निर्भर!

आद्या शक्ति नहीं, भीरूता माता

 वही गाँधी स्वतंत्र भारत के ‘राष्ट्रपिता‘ हैं तो न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के भी पिता हैं। अतः हिन्दुओं को जब चाहे, बात-बेबात फटकारना, और मुस्लिमों का हर हाल में बचाव करना भारतीय शासक वर्ग का एक प्रकार का सिग्नेचर ट्यून रहा है।… बाल ठाकरे जैसे अपवादों को छोड़, सभी नेता जिहाद और उस के प्रेरक… Continue reading आद्या शक्ति नहीं, भीरूता माता

आँकड़े “पकाने” से फूला है जीडीपी गुब्बारा!

भारत ने 2015 से जीडीपी (GDP) के आँकड़े “पकाने” शुरू किए और लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर तक उन्हें फुला दिया। जबकि नोटबंदी एक आर्थिक आपदा थी। … 2019 में अरविंद सुब्रमणियन, जो भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं, ने कहा था कि 2015 में आँकड़ों की पद्धति बदलने से 2011–17 के बीच विकास… Continue reading आँकड़े “पकाने” से फूला है जीडीपी गुब्बारा!

स्वच्छ ऊर्जा बाजार में चीन का एकाधिकार बना!

पिछले 15 वर्षों में चीन ने बिजली उत्पादन में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि एआई जैसी उभरती तकनीकें बिजली पर निर्भर हैं। चीन का स्वच्छ ऊर्जा निवेश न केवल पर्यावरण ग्लोबल साउथ’ रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक दक्षिण के 70 प्रतिशत सौर-पवन संसाधन चीन की रणनीति से जुड़ रहे… Continue reading स्वच्छ ऊर्जा बाजार में चीन का एकाधिकार बना!

अनंत रूपा और अनंत सामर्थ्य संपन्ना शक्ति

भारतीय संस्कृति ने प्रकृति को शक्ति माना और देवी की तरह पूजनीय स्थान दिया। यह शक्ति शाश्वत और सक्रिय है। वैदिक वचनों और संहिताओं में इसका उल्लेख है, और इसे ब्रह्म की गति और अभिव्यक्ति कहा गया है। यही परम सत्य है, जो ऋग्वेद से लेकर परमाणु की ऊर्जा तक विद्यमान है। मान्यता है कि… Continue reading अनंत रूपा और अनंत सामर्थ्य संपन्ना शक्ति

‘सामाजिक न्याय’ के पीछे मतांतरण का खेल

जातियों को वर्ण की अभिव्यक्ति से जोड़ना मूर्खता है। श्रीभगवद्गीता में श्रीकृष्ण, अर्जुन को संदेश देते हुए वर्ण को इस प्रकार परिभाषित करते हैं, ‘चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागश:’ (4:13) अर्थात मेरे द्वारा गुण और कार्य के आधार पर चार वर्णों की रचना की गई है। सच यह है कि औपनिवेशिक और वामपंथी समूह जानबूझकर इस… Continue reading ‘सामाजिक न्याय’ के पीछे मतांतरण का खेल

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