‘राष्ट्रीय प्रतीक’ का कश्मीर में विरोध

सवाल है कि भारत के राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ को हजरतबल दरगाह की शिलापट्ट पर वांछित सम्मान क्यों नहीं मिला? इसकी असली वजह इस्लाम-पूर्व सांस्कृतिक विरोध में निहित है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश इसी मानसिकता से उपजे बिना जड़ों के वे देश हैं जहां के लोग मौलिक सनातन जड़ों से कटकर स्वयं को अरब और… Continue reading ‘राष्ट्रीय प्रतीक’ का कश्मीर में विरोध

नेपाल में जनता का संघर्ष बार-बार

नेपाल बार-बार दिखाता है कि सत्ता और जनता का रिश्ता संविधान से नहीं, सड़कों पर गिरते लहू, आंसुओं और टूटती आवाज़ों से मापा जाता है। तराई से पहाड़ तक पथराव हुआ, गोलियां चलीं और लाठियां टूटीं। यह विरोध केवल आज का नहीं है; यह उन असंतोषों की कड़ी है, जो कभी मधेश आंदोलन, कभी जातीय… Continue reading नेपाल में जनता का संघर्ष बार-बार

वक्त राजनीति की नई परिकल्पना का

अक्सर देखा गया है कि समाज में नई उम्मीदें जन्म लेती हैं। ऐसी बहसें यह भरोसा बंधाती हैं कि मानव प्रयास से एक अलग, नए किस्म की दुनिया का निर्माण संभव है। जबकि ऐसे प्रयासों के अभाव में लोग हताशा का शिकार होते हैं, जैसा श्रीलंका, नेपाल, या बांग्लादेश में हुआ है। अनुभव यह है… Continue reading वक्त राजनीति की नई परिकल्पना का

सिक्किम में धूमधाम से मनेगा मोदी का जन्मदिन

सुदूर सिक्किम में उनका जन्मदिन भविष्य की उम्मीदों के साथ मनाया जाएगा। सिक्किम के मुख्यमंत्री  प्रेम सिंह तामंग (गोले) ने प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिन के अवसर पर अनेक प्रकार के उत्सवों की तैयारी की है। सिक्किम के लिए यह सिर्फ उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि इस अवसर पर जन कल्याण की अनेक योजनाएं आरंभ… Continue reading सिक्किम में धूमधाम से मनेगा मोदी का जन्मदिन

आम आदमी का हीरो: ‘इंस्पेक्टर झेंडे’

मनोज बाजपेयी इस फिल्म का सबसे मजबूत पहलू हैं, उन्होंने इंस्पेक्टर जेंडे के किरदार को बहुत ही शिद्दत से निभाया है। मनोज की एक्टिंग में सख्ती भी है और हल्की-फुल्की हंसी भी। सबसे अच्छी बात यह है कि उनकी कॉमिक टाइमिंग बिल्कुल नैचुरल लगती है, कहीं भी ओवरएक्टिंग महसूस नहीं होती है। कई जगह उनका… Continue reading आम आदमी का हीरो: ‘इंस्पेक्टर झेंडे’

उजड्ड विमर्श की इंतिहा के दौर में

उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान नरेंद्र भाई मोदी की पलटन ने विपक्ष के प्रत्याशी रेड्डी पर नक्सलवादियों का पक्षधर होने की तोहमत भी ज़ोरशोर से लगाई। कहा कि जब वे सुप्रीम कोर्ट के जज थे तो उन्होंने सलवा जुडूम के बारे में एक फ़ैसला दिया था।…. तो शुरू से ही हारे हुए प्रतिपक्षी प्रत्याशी को हराने… Continue reading उजड्ड विमर्श की इंतिहा के दौर में

नौकरशाह के व्हिसलब्लोअर होने का हक

सरकार को व्हिसलब्लोअर संरक्षण को और मजबूत करना चाहिए ताकि नौकरशाह अपने कार्यकाल के दौरान ही गलत कार्यों को उजागर कर सकें, वो भी बिना किसी डर के। साथ ही, सेवानिवृत्त नौकरशाहों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश होने चाहिए कि किन परिस्थितियों में जानकारी साझा की जा सकती है। अंततः, नौकरशाहों को यह समझना होगा कि… Continue reading नौकरशाह के व्हिसलब्लोअर होने का हक

श्रीरामसेतु को क्यों नहीं आस्थास्थल का महत्व?

वाल्मीकि रामायण, महाभारत, स्कंदपुराण, विष्णुपुराण से लेकर कालिदास के रघुवंश तक—हर ग्रंथ में इस सेतु की कथा अंकित है। कथा यह भी कहती है कि विभीषण के अनुरोध पर श्रीराम ने लौटते समय अपने धनुष की नोक से सेतु का एक भाग तोड़ दिया, जिससे उसका नाम ‘धनुष्कोटि’ पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर… Continue reading श्रीरामसेतु को क्यों नहीं आस्थास्थल का महत्व?

जेन-जी का दीवाल पर दो टूक मैसेज- बेवकूफ बनाना बंद करो!

भारत के लिए नेपाल का घटनाक्रम बहुत बड़ा खतरा है। किसी और देश श्रीलंका, बांग्लादेश के साथ हमारी उतनी समानता नहीं है जितनी नेपाल के साथ। सब की यही दुआ प्रार्थना है कि हमारे यहां ऐसा हिंसक आन्दोलन कभी न हो। भारत के लोकतंत्र ने हमेशा इस तरह की आशंका को फेल किया है। मगर… Continue reading जेन-जी का दीवाल पर दो टूक मैसेज- बेवकूफ बनाना बंद करो!

बौद्धिक चोले में अंधभक्ति

क्या यह सब भारतीयों में, विशेषतः हिन्दुओं में ‘चिन्तन-फोबिया’ है — सोच-विचार से डरना? ताकि अपनी बनी-बनाई, तय की हुई विचार-प्रतिमा, नेता-प्रतिमा, मत-प्रतिमा खंडित न हो जाए? और उन प्रतिमाओं का पूजन, भजन, रंग-रोगन, झाड़-पोछ, धूपबत्ती दिखाने का नियमित अनुष्ठान बाधित, या बंद ही न करना पड़े! तब क्या होगा? फिर इतने दशकों के पाले… Continue reading बौद्धिक चोले में अंधभक्ति

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