हक्सले, ऑरवेल और भारत 2026

सन् 1985 में नील पोस्टमैन ने “हँसते-हँसते विनाश की ओर” (Amusing Ourselves to Death) किताब लिखी थी। उसमें आधुनिक सभ्यता को लेकर एक ठंडी और बेचैन कर देने वाली चेतावनी छिपी थी। पोस्टमैन का कहना था कि समाज धीरे-धीरे उस “टाइपोग्राफिक माइंड” से दूर जा रहा है, जो पढ़ने, तर्क करने, धैर्य रखने और विचार… Continue reading हक्सले, ऑरवेल और भारत 2026

दुनिया का नया दरबार: बीजिंग

इस मई बीजिंग में दिलचस्प दृश्य, नजारा है। डोनाल्ड ट्रंप का ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में स्वागत हुआ। उन्होंने 21 तोपों की सलामी, सैन्य बैंड और अमेरिकी-चीनी झंडे लहराते स्कूली बच्चों की सधी हुई पंक्तियों के बीच प्रवेश किया। कैमरे एक साथ घूमे। लाल कालीन के किनारे खड़े अधिकारी मशीन की तरह ताली बजाते… Continue reading दुनिया का नया दरबार: बीजिंग

वीज़ा लाइन में हम और हमारे मैनर्स

कुछ दिन पहले यह जानकर एक अजीब-सी संतुष्टि हुई कि भारत भी ब्रिटिश नागरिकों के वीज़ा खारिज करता है। डिनर टेबल पर यही चर्चा छिड़ी थी और प्रतिक्रिया लगभग ‘वाह’ जैसी! किसी ने कहा, “अच्छा है, दिल को थोड़ा सुकून मिलता है कि उन्हें भी रिजेक्शन झेलना पड़ता है।” दूसरे ने उस घायल सभ्यतागत गर्व… Continue reading वीज़ा लाइन में हम और हमारे मैनर्स

क्या G2 ही अब दुनिया की नई व्यवस्था है?

आज बीजिंग में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने बैठे हैं। यह केवल एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं है। यह उस बदलती दुनिया की एक शांत लेकिन निर्णायक तस्वीर है, जहाँ पुरानी व्यवस्था अपनी पकड़ ढीली कर रही है और नई व्यवस्था अभी अपना नाम भी पूरी तरह नहीं पा… Continue reading क्या G2 ही अब दुनिया की नई व्यवस्था है?

“गर्मी 2026: स्थगित छुट्टियाँ”

2026 गर्मियों का नया अहसास लिए हुए है। न केवल मौसम बदला हुआ है, बल्कि गर्मियों की छुट्टियों का बोझ भी बढ़ा हुआ है। मौसम किसी यात्रा की संभावना नहीं, बल्कि ठहरा देने, रोक देने का मनोभाव लिए हुए है। घरों के भीतर छुट्टियों की योजनाएँ अचानक समाप्त नहीं हो रहीं, बल्कि चुपचाप गायब हो… Continue reading “गर्मी 2026: स्थगित छुट्टियाँ”

जनता संयम करें, सत्ता उड़ान भरे!

तो अब जनता के लिए संयम का समय है। 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुपचाप परदा हटा दिया। असलियत सामने आई। देशवासियों से कहा गया—विदेश यात्राएं टालिए, ईंधन-तेल कम खर्च कीजिए, गाड़ियां साझा कीजिए, घर से काम कीजिए। हमेशा की तरह भाषा सधी हुई थी। आवाज में चिंता थी, ठहराव था, और तकलीफों… Continue reading जनता संयम करें, सत्ता उड़ान भरे!

क्षेत्रीय दलों का भी लेफ्ट जैसे हिसाब बराबर!

ताजा चुनाव नें क्षेत्रीय दलों का भविष्य दिखला दिया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की करारी हार, तमिलनाडु में स्टालिन की फिसलन और केरल में वामपंथ की कमजोर होती पकड़ ने बाकि क्षेत्रीय दलों को भी बैचेन कर दिया होगा। है। सवाल सीधा है, क्या क्षेत्रीय दल 2029 के आते-आते खत्म नहीं हो जाएंगे?… Continue reading क्षेत्रीय दलों का भी लेफ्ट जैसे हिसाब बराबर!

ममता ने भरोसा पहले गंवाया!

भारत के कोई सत्तारूढ़ पार्टी चुनाव इसलिए नहीं हारती कि कोई विकल्प आ खड़ा हुआ है। उसका पतन तब होता है, जब विश्वास खत्म हो जाता है। और लगभग चुपचाप विकल्प शक्ल पा जाता है। यही आज के चुनाव नतीजों का लबोलुआब है। सत्ता बहसबाजी से नहीं, भरोसे के खिसकने से हारती है। राजनीति चालबाज… Continue reading ममता ने भरोसा पहले गंवाया!

नोटबंदी, कोविड के बाद फिर कतार का समय!

भारत में फिर संकट की स्थिति है। यह वाक्य असाधारण नहीं है। रोजमर्रा की बात है। कई मायनों में संकट देश की एक स्थायी राष्ट्रीय स्थिति बन गया है। एक के बाद एक संकट मोदी सरकार की पहचान हैं। इसे आज के शेयर बाजार से भी बूझ सकते है। हल्का सा तेज होता है और… Continue reading नोटबंदी, कोविड के बाद फिर कतार का समय!

खाडी में तीसरा सप्ताह ज्यादा सहमा हुआ!

अमेरिका–इज़राइल–ईरान युद्ध का तीसरा सप्ताह अब शुरू है और स्थिति गंभीर है। आखिर हर कोई हर किसी पर बम गिरा रहा है। इज़राइल लेबनान और ईरान पर हमले कर रहा है। वही हिज़्बुल्लाह इज़राइल पर रॉकेट दाग रहा है तो ईरान केवल इज़राइल को ही नहीं बल्कि खाडी के अरब देशों को मिसाइलों, ड्रोन से… Continue reading खाडी में तीसरा सप्ताह ज्यादा सहमा हुआ!

logo