सन् 1985 में नील पोस्टमैन ने “हँसते-हँसते विनाश की ओर” (Amusing Ourselves to Death) किताब लिखी थी। उसमें आधुनिक सभ्यता को लेकर एक ठंडी और बेचैन कर देने वाली चेतावनी छिपी थी। पोस्टमैन का कहना था कि समाज धीरे-धीरे उस “टाइपोग्राफिक माइंड” से दूर जा रहा है, जो पढ़ने, तर्क करने, धैर्य रखने और विचार… Continue reading हक्सले, ऑरवेल और भारत 2026
