एपस्टीनः सेक्स, सत्ता का वैश्विक मकड़जाल

Categorized as हरिशंकर व्यास कालम

चाहे तो इसे पतनगामी पूंजीवाद का मकड़जाल कहें या अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष का कालजयी सत्व-तत्व! मनुष्य आदिकाल से पैसे (पॉवर, अर्थ) और सेक्स (काम-भोग) की वासना में जन्म-जन्मांतर चक्र में खपा चला आ रहा है। इसी से धर्म व मोक्ष के फलसफ़े गढ़े। बावजूद इसके ताजा सुर्खियां चौंकाने वाली है। पहली बार सेक्स-पॉवर की धुरी का वैश्विक तानाबाना खुला है। आज जेफ़री एपस्टीन दुनिया का नंबर एक चर्चित चेहरा है। पहली बार अदालती दस्तावेज़ों से सत्ता, पूंजी और यौन-शोषण का इतना गहरा और पसरा नेटवर्क उभरा है।

एपस्टीन सिर्फ फ़ाइनेंसर, यौन अपराधी और मानव तस्कर नहीं था। वह उस नेटवर्क का रचयिता था, जो राष्ट्रपति, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, राजकुमार, खरबपति और वैश्विक प्रभावशाली कुलीनों, एलिट की भूख का सप्लायर था। वह संपर्कों, यात्राओं और संवादों से वह सब करता हुआ था जो आमतौर पर देशों की राजधानियों में सिमटे सत्ता-दलालों का पैमाना रहा है। पहली बार मालूम हुआ कि अमेरिका यदि दुनिया को नचाता है तो अमेरिकी दलाल भी दुनिया को नचाते हैं। इनकी वह वैश्विक, बहुराष्ट्रीय मंडी है, जिससे तमाम देशों के नेताओं की भूख पूरी होती है। और यह महज़ अफ़वाह या खोजी पत्रकारिता की सनसनी नहीं है, बल्कि अदालतों और जांच एजेंसियों के दस्तावेज़ों से उद्घाटित है।

सो, एपस्टीन केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उस व्यवस्था, उस भूख का प्रतीक है, जिसमें पैसा, प्रभाव और वासना एक-दूसरे को पोषित करते हैं। एपस्टीन इस तंत्र का केंद्रीय संचालक था। और वह अपराधी भी करार हुआ। जेल में ही उसने आत्महत्या की।

शुक्रवार को अमेरिका के न्यायिक विभाग ने 35 लाख से अधिक पेज और हजारों फ़ोटो और वीडियो सार्वजनिक किए। सब जेफ़री एपस्टीन और उसकी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल के सेक्स-रैकेट नेटवर्क की जांच से जुड़े हैं। इन दस्तावेज़ों में इलेक्ट्रॉनिक संदेश, फ़्लाइट लॉग, बैंक रिकॉर्ड आदि शामिल हैं। और उसके कारण अमेरिका में सर्वाधिक फ़ोकस में राष्ट्रपति ट्रंप लगातार हैं। उनके एपस्टीन के साथ रिश्तों का तानाबाना और खुला है।

शायद इसी कारण अमेरिकी न्याय विभाग ने सभी दस्तावेज़ जारी नहीं किए। उसने खुद बताया है कि और भी दस्तावेज़ फ़ाइलों में हैं, मगर उन्हें जारी नहीं किया जाएगा। यदि अमेरिका की संसद अपने कानूनी अधिकारों से जस्टिस विभाग को मजबूर नहीं करती, तो शुक्रवार के दस्तावेज़ भी सार्वजनिक नहीं होते। इसलिए आगे ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ेंगी। जस्टिस विभाग ने ट्रंप या उन जैसी वैश्विक हस्तियों को बचाने के लिए दस्तावेज़ों के महत्वपूर्ण अंश, जैसे गवाहों के बयानों पर काली स्याही पोतकर उन्हें पब्लिक से ओझल किया।

मतलब नाबालिग या कम उम्र की यौन पीड़िता ने गवाही में अपना जो बयान दर्ज कराया, उसके पूरे पेज को काली स्याही से पोत दिया। इस तरह स्याही से नाम, गवाही सब मिटा दिए गए। मतलब नेटवर्क के उजागर हुए कोई बीस-पच्चीस दलालों, सप्लायरों में किसने क्या किया और यौन-शोषण की शिकार महिलाओं ने क्या बयान दिए, सब काली स्याही में छुपाकर जस्टिस विभाग ने दस्तावेज़ जारी किए हैं।

सो, अमेरिकी कांग्रेस और खासकर डेमोक्रेट सांसदों ने न्यायिक विभाग पर आरोप लगाया है कि पहले तो उसने कानूनी समयसीमा की पालना नहीं की। फिर फ़ाइलों को पूरी और बिना काले अक्षरों (unredacted) के रूप में जारी नहीं किया, ताकि पावरफुल लोगों की पहचान दबी रहे। उस नाते कह सकते हैं कि कहानी तो अभी शुरू हुई है।

अमेरिकी मीडिया में यह बहस चली हुई है कि फ़ाइलों के सार्वजनिक किए जाने के बावजूद कितने लाख काग़ज़, फ़ोटो, वीडियो न्यायिक विभाग ने दबाए हुए हैं? कितनी सच्चाई और गवाही सामने आई है और कितनी छिपी हुई है?

ईमेल दस्तावेज़ों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम बार-बार है। इन्हें ट्रंप ने डेमोक्रेट नेताओं की साज़िश कहकर ख़ारिज किया है। ताज़ा दस्तावेज़ों के हाई-प्रोफ़ाइल व्यक्तियों में बिल गेट्स, ट्रंप के वाणिज्य मंत्री, ब्रिटिश प्रिंस एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर, इलॉन मस्क आदि कई नाम हैं।

निश्चित ही ज़िक्र से यह निष्कर्ष नहीं निकलता है कि ये सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे थे, मगर यह भी तथ्य है कि भंडाफोड़ होने के ख़तरे के चलते ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर ने पहले ही पदवी छोड़ दी। एपस्टीन द्वारा प्रिंस को भेजी गई यौन शोषण की शिकार महिला ने कहा है कि “उन्हें पूर्व प्रिंस के साथ सेक्स के लिए ब्रिटेन भेजा गया था।” इस महिला के वकील ने एपस्टीन के वैश्विक नेटवर्क की शिकार दो सौ से ज़्यादा यौन पीड़िताओं के मामले देख रहे हैं। उन्होंने वर्जीनिया जियुफ़्रे का भी केस लड़ा, जिसका आरोप था कि सन् 2001 में, जब वह 17 साल की थीं, तब उन्हें लंदन लाया गया ताकि वह पूर्व प्रिंस की भूख पूरी कर सकें।

जेफ़री एपस्टीन को सबसे पहले 2008 में फ़्लोरिडा में 14 साल की लड़की से सेक्स के लिए उकसाने के मामले में दोषी ठहराया गया था। उसने अपनी सज़ा जुलाई 2010 में पूरी की। बीबीसी के अनुसार, एपस्टीन ने तब कई महिलाओं को व्यावसायिक उड़ानों और अपने निजी जेट्स के ज़रिए ब्रिटेन पहुंचाया था।

सो, जेफ़री एपस्टीन का कारनामा, वैश्विक नेटवर्क का ही नहीं है। इस कहानी के और भी पहलू है। अमेरिकी मीडिया में कहा जा रहा है कि इज़राइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद की बदौलत एपस्टीन का साम्राज्य बना। अमेरिका में यहूदी ताक़त का वह एक प्रतिनिधि चेहरा था। इसलिए पश्चिम एशिया की क्षेत्रीय राजनीति, ईरान बनाम सऊदी अरब की भू-राजनीति से लेकर मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा चुनाव के लिए एपस्टीन से गुहार, आदि के ऐसे असंख्य क़िस्से हैं, जिससे मालूम होता है कि दुनिया वैसे ही चलती हुई है जैसे भारत में लुटियन दिल्ली के नेटवर्क रहे है।

बावजूद एपस्टीन ने सालों तक जितना बड़ा यौन तस्करी नेटवर्क चलाया है तथा वह देशों/शक्तिशाली व्यक्तियों से लगातार जुड़ा रहा, वह भूमंडलीकृत दुनिया से विकसित अजूबा था। ख़ासकर इसलिए कि वैश्विक मीडिया की सक्रियता के बावजूद कभी किसी को भनक नहीं लगी। एपस्टीन मूलतः पूंजीपति फ़ाइनेंसर था। वित्तीय करियर में उसने अमीर, शक्तिशाली और प्रसिद्ध लोगों के साथ सेक्स के ज़रिए वैश्विक सामाजिक नेटवर्क बनाया। 2008 में उसे कम उम्र की लड़कियों के साथ यौन गतिविधि के लिए अदालत ने दोषी ठहराया था। बावजूद इसके वह रूका, थमा नहीं। जेल से छूटने के बाद उसने रुतबा बनाया। 2019 में वह फ़ेडरल नाबालिग यौन तस्करी के आरोपों में गिरफ्तार हुआ। अदालत फ़ैसला सुनाने ही वाली थी कि उसने 2019 में जेल में आत्महत्या की।

कैसा अजब मामला है जो अमेरिका की व्यवस्था यानी अदालत, संसद, मीडिया आदि से इस वैश्विक नेटवर्क की परतें तब खुलती हुई हैं, जब ट्रंप का पहला कार्यकाल था; या अब दूसरा कार्यकाल है। मेरा मानना है कि नई परतों की नई सुर्खियों ने ट्रंप को बैचेन तो किया होगा।  तभी जिस दिन न्यायिक विभाग ने दस्तावेज़ सार्वजनिक किए, उसी दिन ध्यान बंटाने के लिए अमेरिकी पत्रकारिता का एक जाना-माना पत्रकार एक बेहूदा मामले में गिरफ्तार हुआ। सो, संभव है कि राष्ट्रपति ट्रंप नई सुर्खियों के लिए अचानक ईरान पर निशाना साधकर अपने सूरमा होने की नई सुर्खी बनाने की कोशिश करें।


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