युवा शक्ति का रुतबा

सत्ता के ऊपरी हलकों तक शायद यह संदेश पहुंचा है कि दमन के तरीके का उलटा परिणाम हो सकता है। इसलिए अब युवाओं के प्रति संवेदनशील होने का संकेत दिया जा रहा है। यह स्वागतयोग्य है। कॉकरोच आंदोलन के तहत युवाओं की लामबंदी का सत्ता प्रतिष्ठान पर कितना प्रभाव हुआ है, इसकी झलक सोमवार को… Continue reading युवा शक्ति का रुतबा

और गहरे हुए सवाल

जगदीशन के तीसरा कार्यकाल ना लेने के फैसले को एचडीएफसी बैंक में संस्थागत पुनर्गठन की जरूरत से जोड़ कर देखा गया है। अब बैंक के सामने कॉरपोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों की बहाली की कठिन चुनौती है। सामान्य स्थितियों में फिर नियुक्ति ना मांगने के एचडीएसी बैंक के महाप्रबंधक और सीईओ शशिधर जगदीशन की घोषणा… Continue reading और गहरे हुए सवाल

अब खतरा आ पहुंचा

नेपाल की त्रासदी का संदेश है कि प्राकृतिक तकाजों को नजरअंदाज करने का समय बीत चुका है। विकास के नाम पर पर्यावरणीय सुरक्षा की बलि देना जारी रहा, तो ऐसी घटनाओं से बचना संभव नहीं रह जाएगा। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, यह चर्चा दशकों पुरानी हो चुकी है। इसके क्या घातक… Continue reading अब खतरा आ पहुंचा

अज़ीब मुकाम है यह!

सोनिया गांधी अपने अनुभव सुनाना चाहती हैं, तो आखिर उसका अवसर उन्हें क्यों नहीं मिलना चाहिए? अगर उनकी टिप्पणियां पूर्वाग्रह भरी हुईं, तो उनसे आहत पक्ष के पास जवाब देने का पूरा अवसर मौजूद रहेगा। कहने को तो भारत लोकतंत्र है, लेकिन यहां विपक्ष के सर्व-प्रमुख नेताओं तक को अपनी कहानी बताने की आजादी नहीं… Continue reading अज़ीब मुकाम है यह!

बांग्लादेश की सामरिक दिशा

पाकिस्तान की मुख्य भूमिका वाले समझौतों से जुड़ने की इच्छा और चीनी हथियार प्रणालियों को खरीदने का फैसला बांग्लादेश की नई सामरिक दिशा के ठोस संकेत हैं। भारत को इससे उचित संदेश ग्रहण करना चाहिए। बांग्लादेश ने पुष्टि कर दी है कि वह चीन में बने 4.5वीं पीढ़ी के जे-10सीई लड़ाकू विमान खरीदने जा रहा… Continue reading बांग्लादेश की सामरिक दिशा

निजी कंपनियां जोखिम से भरा फैसला

डीआरडीओ ने पारंपरिक मिसाइल क्षेत्र में जो तकनीकें विकसित की हैं, भारत सरकार ने उन सबको निजी कंपनियों को सौंपने को मंजूरी दे दी है। सवाल है, अपने अनुसंधान क्यों नहीं कर सकतीं? भारत में 2001 में रक्षा क्षेत्र को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोला गया था। 2020 में इस क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट से… Continue reading निजी कंपनियां जोखिम से भरा फैसला

एक और अप्रभावी दांव?

सैन्य विकल्प समाप्त हो जाने के बाद अमेरिका अब आर्थिक दबाव के जरिए वह हासिल करने की कोशिश कर रहा है, जो सैन्य बल से संभव नहीं हुआ। लेकिन आर्थिक कदम भी दंत-विहीन ही हैं। अमेरिका ने ईरान को दुनिया में “पराया” बना देने के बड़े इरादे के साथ ‘ऑपरेशन इकॉनमिक आउटकास्ट’ का एलान किया।… Continue reading एक और अप्रभावी दांव?

भारत के लिए अपमानजनक

मोदी पत्रकारों के सवालों का जवाब देना पसंद नहीं करते, यह जग-जाहिर है। इसलिए भारत का प्रेस कांफ्रेंस ना रखने का अनुरोध असामान्य नहीं है। असामान्य अमेरिका का उस अनुरोध के प्रति दिखाई गई बेकद्री है। कूटनीतिक स्तर पर हुए संदेशों के आदान-प्रदान की सार्वजनिक चर्चा कर अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जताया है… Continue reading भारत के लिए अपमानजनक

समस्या है, या उपलब्धि?

भारत में मजबूत होती के-शेप अर्थव्यवस्था में ‘समृद्ध उपभोक्ताओं’ की संख्या बढ़ना लाजिमी है। कोरोना काल के बाद समृद्धि का वितरण और गतिरुद्ध हुआ है। लग्जरी उपभोग का बढ़ना उसका ही परिणाम है।  मार्केट एजेंसी नीलसन-आईक्यू की ताजा रिपोर्ट के इस अनुमान पर कुछ हलकों में सुखबोध देखने मिला है कि अगले दस साल में… Continue reading समस्या है, या उपलब्धि?

चीनी के बाद चावल?

पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की नीति के गंभीर परिणाम सामने होने के बावजूद सरकार में इस नीति पर पुनर्विचार के संकेत नहीं हैं। जबकि उचित यह होगा कि वह इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न ना बनाए। केंद्र के इस दावे पर यकीन करना कठिन है कि चीनी आयात के फैसले का पेट्रोल में इथेनॉल… Continue reading चीनी के बाद चावल?

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