एक सार्थक न्यायिक हस्तक्षेप

हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों का तानाशाही भरा और असंवैधानिक रवैया “ऑरवेलियन डिस्टोपिया” की धारणा को साकार कर सकता है। कहा जा सकता है कि फिलहाल इससे अधिक सटीक चेतावनी और कोई नहीं हो सकती। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो-टूक फैसला दिया है कि सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाना… Continue reading एक सार्थक न्यायिक हस्तक्षेप

देश को सच बताएं

भारत के अभिन्न अंगों को आधिकारिक भारतीय मानचित्र के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए, इस रुख से देश को आश्वस्त करने के बाद सरकार को यह बताना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र इस भावना के खिलाफ क्यों गया? सोलहवीं सदी से इस्तेमाल हो रहे मर्केटर मानचित्र को बदलने के प्रस्ताव का संयुक्त राष्ट्र में समर्थन कर… Continue reading देश को सच बताएं

यूं ही चलता रहेगा?

कुछ सवाल हैं, जो हर हादसे बाद उठते हैं। दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी अवैध और असुरक्षित निर्माण तथा सुरक्षा नियमों की अनदेखी के साथ चल रहे आवासीय कारोबार का अड्डा बन गई है। कहानी एक जैसी होती है, सिर्फ घटना का स्थल और उसके शिकार पात्र बदल जाते हैं। हाल में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इमारत… Continue reading यूं ही चलता रहेगा?

परंपरा पर फिर प्रहार

हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के मामले में कोलेजियम, केंद्र, और राज्य- तीनों की अपनी भूमिका है। इसमें से किसी एक को दरकिनार करना पूरी प्रक्रिया की साख को संदिग्ध बना देता है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के मामले में एक बार फिर संघीय परंपरा की अनदेखी की… Continue reading परंपरा पर फिर प्रहार

कंपनियों के लिए चेतावनी

रूटो की आम छवि अमेरिका समर्थक की है, लेकिन हाल में उन्होंने चीन से संबंध मजबूत किए हैं। चीन का पहलू अफ्रीका में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए नई चुनौती बन कर उभरा है। बढ़ते राजनीतिक विरोध की चुनौती झेल रहे केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो का भारतीय कंपनी- टाटा केमिकल्स मगाडी को… Continue reading कंपनियों के लिए चेतावनी

आशंकाओं में दम है

जब रकम वापसी शुरू होगी, तो क्या जो संकट अभी टाला गया है, उसका उस समय अधिक बड़े रूप में सामना करना पड़ेगा? क्या फौरी संकट टालने के लिए भविष्य की चुनौतियां बढ़ा ली गई हैं? फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट बैंक (एफसीएनआर-बी) योजना के जरिए अनिवासी भारतीयों और विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों… Continue reading आशंकाओं में दम है

अब लाचारी और निराशा

संयुक्त राष्ट्र की यह पहली ऐसी रिपोर्ट है, जिसमें इतनी अंधकारमय तस्वीर का वर्णन है। जलवायु विशेषज्ञों ने कहा है कि नेपाल में जो हुआ, वह दुनिया के संभावित भविष्य की एक मिसाल भर है। ग्लेशियर गिरने से नेपाल में आई तबाही की दर्दनाक कहानियों के बीच संयुक्त राष्ट्र ने यह भयानक आकलन दुनिया के… Continue reading अब लाचारी और निराशा

इतना विचलित क्यों होना?

जीडीपी आंकड़ों के जरिए अगर मकसद खुशहाली का राजनीतिक कथानक गढ़ना नहीं, बल्कि जमीनी स्थितियों का सही अंदाजा लगाना है, तो सरकार को उन पर उठाए गए प्रश्नों और आलोचनात्मक चर्चा का स्वागत करना चाहिए। नरेंद्र मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिजिस्तान में थे, मगर वहीं से रील बना कर उन्होंने… Continue reading इतना विचलित क्यों होना?

संदेह से वाकिफ़ आयोग

तो सवाल उठेगा कि निर्वाचन आयोग ने आम जन और विपक्ष के मन से संदेह दूर करने का क्या प्रयास किया है? जब कभी ऐसे सवाल उठे, आयोग ने उनके प्रति लापरवाह रुख क्यों अपनाया? कम-से-कम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मामले में निर्वाचन आयोग इससे अवगत है कि इनको लेकर आम लोगों के मन… Continue reading संदेह से वाकिफ़ आयोग

भारत की असहज उपस्थिति

दुनिया में बदले समीकरणों के बीच एससीओ में प्रभावी देशों के साथ भारत के रुख की दूरी बढ़ती नज़र आई है। इसकी संभवतः सबसे प्रमुख मिसाल चीन की महत्त्वाकांक्षी योजना- बीआरआई है। शंघाई सहयोग संगठन की शिखर बैठक में कही गई बातों और बिशकेक घोषणापत्र पर गौर करें, तो अहसास होता है कि इस मंच… Continue reading भारत की असहज उपस्थिति

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