चेहरा बदलना काफी है?

घरेलू बाजार पर ध्यान केंद्रित कर अर्थव्यवस्था को दिशा देने की क्षमता भारतीय राज्य ने विकसित की होती, तो क्या संकट इतना गहराता? व्यक्तियों पर बात केंद्रित कर नीतियों पर पुनर्विचार से बचते हुए आखिर हम कहां पहुंचेंगे? देश गहरे आर्थिक संकट में है, इससे अब केंद्र भी इनकार नहीं कर रहा है। वित्त मंत्री… Continue reading चेहरा बदलना काफी है?

इजराइल का पेच है

ईरान के पड़ोसी देशों का अहसास है कि मौजूदा लड़ाई ने उस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। उन्हें यह अंदेशा भी है कि ईरान की निर्णायक हार नेतन्याहू की ‘ग्रेटर इजराइल’ की महत्त्वाकांक्षा को बल प्रदान करेगी। अमेरिका- ईरान युद्ध खत्म होने के बारे में रविवार को गुजरते हुए पहर के साथ… Continue reading इजराइल का पेच है

बेचैन करने वाली बात

अफसोसनाक है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धविराम से लेकर आज तक कई महत्त्वपूर्ण फैसलों का एलान अमेरिका ने भारत सरकार के कुछ कहने से पहले कर दिया है। इस सिलसिले में नई कड़ी मार्को रुबियो ने जोड़ी है। भारत अपनी विदेश नीति में किस संबंध को प्राथमिकता दे, यह तय करना निर्वाचित केंद्र सरकार… Continue reading बेचैन करने वाली बात

क्वॉड बस औपचारिकता है?

अब चूंकि चीन की घेराबंदी अमेरिका की तात्कालिक प्राथमिकता नहीं है, तो जाहिर है, इस मकसद के लिए बने समूह भी उसकी प्राथमिकता सूची में नीचे चले गए हैँ। क्वॉड इसी परिवर्तन का शिकार बना है। भारत में क्वाड्रैंगुलर सिक्युरिटी डॉयलॉग (क्वॉड) का शिखर सम्मेलन होना था, लेकिन महज विदेश मंत्रियों की बैठक से ये… Continue reading क्वॉड बस औपचारिकता है?

अनिश्चय के काले बादल

आरबीआई ने राजकोष की मदद के लिए पहले से अधिक उत्साह दिखाया है। वार्षिक लाभांश के अपने पास रखे जाने वाले हिस्से में कटौती करते हुए उसने केंद्र को रिकॉर्ड 2,86,588 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने आगाह किया है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण विश्व अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितता के… Continue reading अनिश्चय के काले बादल

सवाल था, जवाब देते!

अगर हकीकत यह नहीं होती कि मोदी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करते, या प्रश्न पहले से तय किए बिना इंटरव्यू नहीं देते, तो नॉर्वे की घटना को कोई तव्वजो नहीं देता। ना ही स्वेंडसन भारत में इतनी बहुचर्चित हो जातीं। साधारण-सा सवाल था और वो भी यह कि आप कुछ सवालों के जवाब क्यों नहीं देते?… Continue reading सवाल था, जवाब देते!

यह चुनौती गंभीर है

छात्र एआई के जरिए अपना टास्क पूरा कर रहे हैं। इससे वे नंबर ज्यादा ला रहे हैं, लेकिन सीख कम रहे हैं। इस कारण रोजगार बाजार में उनकी चुनौतियां बढ़ेंगी। उनकी नौकरी पर खतरा मंडराएगा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस्तेमाल से विश्वविद्यालयों में छात्र नंबर ज्यादा ला रहे हैं, लेकिन उनका सीखना घट गया है। यह… Continue reading यह चुनौती गंभीर है

लाचारी जनित निर्ममता

आवारा कुत्तों से बेशक इनसान की सुरक्षा खतरे में पड़ी है। चूंकि इसका कोई संवेदनशील और व्यावहारिक समाधान सामने नहीं है, अतः कोर्ट एक विवादास्पद निर्णय पर पहुंचा है। एक तरह से यह लाचारी जनित फैसला है। सर्वोच्च न्यायालय ने रेबीज या किसी अन्य गंभीर रोगों से ग्रस्त आवारा कुत्तों को मार डालने का रास्ता… Continue reading लाचारी जनित निर्ममता

आरक्षण ठीक है, लेकिन..

पंचायत से संसद तक निर्वाचित संस्थाओं में सामाजिक संरचना का अधिकतम प्रतिनिधित्व हो, इस पर राजनीतिक आम-सहमति है। बहरहाल, जहां तक पंचायती संस्थाओं की बात है, उनके सामने इससे भी बड़े सवाल मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थानों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए एक खास पिछड़ा वर्ग… Continue reading आरक्षण ठीक है, लेकिन..

युवा असंतोष का इज़हार

लोकतांत्रिक समाजों में काउंटर कल्चर आंदोलनों की रही प्रभावशाली भूमिका को देखते हुए कॉकरोच केंद्रित चर्चा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। असंतुष्ट नौजवान अक्सर उलटबासियों का सहारा लेते हैं। कॉकरोच वाली टिप्पणी पर जैसी प्रतिक्रिया हुई है, वह खासकर युवा वर्ग में गहराते असंतोष और उनमें फैल रही बेचैनी का संकेत है। युवाओं के… Continue reading युवा असंतोष का इज़हार

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