ट्रंप की लटकी तलवार

व्यापार वार्ता में शामिल भारतीय अधिकारियों ने अमेरिका के सामने अब तक यह स्पष्ट क्यों नहीं किया है कि हर रियायत झटकने के बाद नया दबाव बना देने की ट्रंप प्रशासन की नीति भारत को मंजूर नहीं है? भारत की दलीलों को डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने स्वीकार नहीं किया। उसने अमेरिका की 2026 की विशेष… Continue reading ट्रंप की लटकी तलवार

संस्थाओं पर सियासी रंग!

एनएचआरसी के बारे में जस्टिस श्रीधरन की टिप्पणी इस धारणा की पुष्टि करती है कि संवैधानिक/वैधानिक संस्थाएं अपना काम करने के बजाय किसी राजनीतिक परियोजना से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 588 मदरसों पर लगे आरोप की जांच करने का आदेश उत्तर प्रदेश सरकार को दिया। इल्जाम है कि ये… Continue reading संस्थाओं पर सियासी रंग!

ये जो चुनाव हुआ

पहले चुनाव बिल्कुल दोषमुक्त होते थे ऐसा नहीं कहा जा सकता। लेकिन तब उन्हें ऐसे युद्ध की तरह भी नहीं लड़ा जाता था, जिसमें विरोधी को समूल नष्ट कर देने की भावना हो। कभी चुनाव को लोकतंत्र का उत्सव समझा जाता था। तब चुनाव बिल्कुल दोषमुक्त थे या वे पूरी तरह स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ढंग… Continue reading ये जो चुनाव हुआ

इतनी निर्भरता ठीक नहीं

चीन पर भारत की प्रमुख निर्भरता उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में नहीं, बल्कि घरेलू उत्पादन के क्षेत्र में है। इसका मतलब है कि भारत का कारखाना क्षेत्र चीन से आए पाट-पुर्जों और रासायनिक सामग्रियों पर अत्यधिक निर्भर हो चुका है। चीन पर भारत की कारोबारी निर्भरता चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई है। सवाल सिर्फ बढ़ते… Continue reading इतनी निर्भरता ठीक नहीं

ढांचागत बदलाव की ओर

चूंकि यूएई अब स्वतंत्र रूप से तेल का उत्पादन और बिक्री करेगा, अतः खरीदार देशों के पास सौदेबाजी के लिए ओपेक में बचे 11 और ओपेक+ के 22 देशों के अतिरिक्त भी एक विकल्प उपलब्ध हो जाएगा।  ईरान और अमेरिका- इजराइल के युद्ध से दुनिया- खास कर पश्चिम एशिया में- कई तरह के ढांचागत बदलावों… Continue reading ढांचागत बदलाव की ओर

न्यायपालिका का नैतिक संकट

केजरीवाल ने यह कहते हुए न्यायपालिका के खिलाफ “सत्याग्रह” शुरू किया है कि इसके हर अंजाम को भुगतने को वे तैयार हैं। यह घटनाक्रम संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भारतीय राजनीतिक वर्ग की खंडित होती आस्था की मिसाल है। दिल्ली हाई कोर्ट की जज न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के सामने पेश ना होने का एलान कर… Continue reading न्यायपालिका का नैतिक संकट

कुछ तो लगाम लगाइए!

दवा एवं मेडिकल उपकरणों की ऐसी कीमत तय की जा सकती है, जो कारखाना लागत से चार से पांच गुना अधिक हो। जबकि फिलहाल अस्पताल और रिटेलर इनको लागत से 10 से 25 गुना तक अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। ये खबर आक्रोश जरूर पैदा करती है, मगर चौंकाने वाली बिल्कुल नहीं है, कि… Continue reading कुछ तो लगाम लगाइए!

प्रतीकात्मक ही ज्यादा

न्यूजीलैंड से भारत का मुक्त व्यापार समझौता होना महत्त्वपूर्ण है। इसके जरिए दोनों देश दुनिया को एक ठोस संदेश भेज रहे हैं। मगर जहां तक आर्थिक फायदों का संबंध है, तो इस करार से भारत को सीमित लाभ ही होगा। आज के दौर में जब मुक्त बाजार की पैरोकार अर्थव्यवस्थाएं अपने दरवाजे पर लगातार रुकावटें… Continue reading प्रतीकात्मक ही ज्यादा

टूटा-फूटा अमेरिकन ड्रीम

भारतीय मूल के 40 फीसदी अमेरिकी नागरिकों के मन में पिछले साल कभी ना कभी अमेरिका से चले जाने का भाव आया। ताजा राजनीतिक एवं आर्थिक स्थितियों तथा सामाजिक दबावों के कारण ऐसे हालात बने हैं। किसी तरह अमेरिका पहुंच जाना भारतीय मध्य वर्ग का सपना रहा है। अगर वहां बसने का इंतजाम भी हो… Continue reading टूटा-फूटा अमेरिकन ड्रीम

हकीकत, जो चेतावनी है

सात साल बाद बर्नस्टीन रिसर्च ने प्रधानमंत्री को अपनी दूसरी चिट्ठी लिखी है, जिसमें वह भारत को लेकर चिंता में डूबा नजर आया है। इसमें उसने भारत की विकास कथा के लिए खड़ी कठिन चुनौतियों पर रोशनी डाली है। अंतरराष्ट्रीय इक्विटी रिसर्च एवं ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने पत्र लिख कर प्रधानमंत्री को उन गंभीर आर्थिक… Continue reading हकीकत, जो चेतावनी है

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