ज्ञान-विज्ञान से तौबा!

हैरतअंगेज है कि जिस समय सरकारी अधिकारी रिसर्च एंड डेवलपमेंट की जरूरत पर लंबे व्याख्यान दे रहे हों, खुद सरकार उस दिशा में छात्रों को ले जाने वाली योजनाओं पर विराम लगा रही है! क्या केंद्र सरकार ने इन्सपायर स्कॉलरशिप फॉर हायर एजुकेशन (इन्सपायर-एसएचई) को गुपचुप बंद कर दिया है? इस छात्रवृत्ति के आकांक्षी उत्तर… Continue reading ज्ञान-विज्ञान से तौबा!

इतना विचलित क्यों होना?

गैर-व्यापार रुकावटों का इस्तेमाल अमेरिका सहयोगी देशों के खिलाफ कर रहा है। इसका विरोध हर संप्रभु सरकार का कर्त्तव्य है। हैरतअंगेज है, मोदी सरकार ऐसे कर्त्तव्य निभाने की चर्चा भर से विचलित हो जाती है! वैसे देखा जाए, तो भारत सरकार की छवि के लिहाज से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सकारात्मक खबर दी। बताया कि… Continue reading इतना विचलित क्यों होना?

उचित प्रक्रिया पर जोर

जब हर व्यक्ति की नागरिकता को लेकर अनिश्चय खड़ा कर दिया गया है, सुप्रीम कोर्ट की ये व्यवस्था बेहद अहम है कि नागरिकता निर्धारण की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से “उचित, विधि-सम्मत और विवेकपूर्ण” होनी चाहिए। जिस समय नरेंद्र मोदी सरकार ने हर भारतीय की नागरिकता को सवालों के घेरे में डाल दिया है, असम के… Continue reading उचित प्रक्रिया पर जोर

आईने की जरूरत क्या!

इस वर्ष के एनवायरॉनमेंट परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत को 22.46 अंक मिले, जिसकी बदौलत 177 देशों की सूची में वह 176वें नंबर पर आया है। दो साल पहले भी भारत का यही दर्जा था। भारतवासियों को अपने बिगड़ते पर्यावरण के बारे में जानने के लिए शायद ही किसी अंतरराष्ट्रीय सचूकांक की जरूरत है। अतः इस… Continue reading आईने की जरूरत क्या!

“उचित समय” कब आएगा?

केंद्र ने स्पष्ट नहीं किया है कि “सही समय” से उसका तात्पर्य क्या है और उसकी राय में इसके कब तक आने की संभावना है? उचित होगा कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा वापसी से संबंधित इस भ्रम को वह दूर करे। उमर अब्दुल्ला की व्यग्रता समझी जा सकती है। वे पूर्ण बहुमत से… Continue reading “उचित समय” कब आएगा?

अपनी इज्जत, अपने हाथ!

क्या न्यायपालिका का रुख अब अधिक लोकतांत्रिक हो गया है और वह खुद को नागरिकों का ‘सेवक’ समझने लगी है? अथवा, उसे अहसास है कि असंतोष की अभिव्यक्ति को दंडित करने की कोशिश विपरीत परिणाम देगी? सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे के सामने अपनी याचिका की खुद पैरवी के लिए… Continue reading अपनी इज्जत, अपने हाथ!

कैसे पढ़ें, कैसे बढ़ें?

एक दशक में स्कूलों में छात्रों की संख्या 2.26 करोड़ घट गई। यह केंद्र की नीतिगत प्राथमिकताओं का परिणाम है। मोदी सरकार ने “संसाधनों के उपयोग में सुधार” के लिए स्कूल समेकन योजना शुरू की थी। चौंकाने वाले ये आंकड़े नीति आयोग की रिपोर्ट से सामने आए हैं कि पिछले दस साल में हर रोज… Continue reading कैसे पढ़ें, कैसे बढ़ें?

अमेरिका का ‘हार्ड बॉल’

लॉरेंस बिश्नोई के मामले में उचित यही होगा कि भारत अपनी न्याय प्रक्रिया के तहत आरोपियों पर मुकदमा चलाने के रुख पर कायम रहे। अमेरिकी ‘हार्ड बॉल’ के आगे नरम पड़ना उचित नहीं होगा। अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और पंजाब के पुलिस इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह सहित 37 व्यक्तियों पर विभिन्न अपराधों… Continue reading अमेरिका का ‘हार्ड बॉल’

युद्ध का समाधान नहीं?

नई लड़ाई का कारण युद्ध के परिणाम पर अमेरिका और ईरान के अलग-अलग आकलन हैं। अमेरिका युद्धविराम को ईरान के प्रति रियायत मानता है, जबकि ईरान की राय है कि वह अधिक प्रभावशाली होकर उभरा है। ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई फिर छिड़ गई है। दोनों पक्षों ने एलान कर दिया है कि शांति… Continue reading युद्ध का समाधान नहीं?

शहर रहने योग्य बनें

यह इंडेक्स संदेश देता है कि भारत को अपने शहरों को अधिक रहने योग्य बनाना है, तो उसे क्या करना चाहिए। ये इंडेक्स उन्हीं कसौटियों पर तैयार किया जाता है, जो गरिमामय जिंदगी के लिए जरूरी हैं।  मानसून की शुरुआत से ही शहरों की ढहती नागरिक सुविधाओं की कहानी सुर्खियों में है। यह हर साल… Continue reading शहर रहने योग्य बनें

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